Korba Power Plant: 15800 करोड़ के सबसे बड़े पावर प्लांट का कार्य प्रारंभ हुआ न कि शिलान्यास...पूर्व CM के ट्वीट पर जेनरेशन कंपनी के अफसरों ने कहा...

Korba Power Plant: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल कोरबा में छत्तीसगढ़ जेनरेशन कंपनी के 1320 मेगावॉट के सुपर क्रीटिकल पावर प्लांट का कार्य प्रारंभ किया। इसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ट्वीट आया...राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री से जिस कार्य का शिलान्यास हो गया था, उसका फिर से शिलान्यास करा लिया। इस पर जेनरेशन कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हमने शिलान्यास तो कहीं लिखा ही नहीं। पढ़िये अफसरों ने क्या कहा...

Update: 2025-03-31 07:49 GMT
Korba Power Plant: 15800 करोड़ के सबसे बड़े पावर प्लांट का कार्य प्रारंभ हुआ न कि शिलान्यास...पूर्व CM के ट्वीट पर जेनरेशन कंपनी के अफसरों ने कहा...
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Korba Power Plant: रायपुर। नवरात्रि के पहले दिन कोरबा में सबसे बड़े पावर प्लांट का कार्य प्रारंभ हो गया। छत्तीसगढ़ पावर जेनरेशन कंपनी के 15800 करोड़ की लागत से 1320 मेगावॉट के प्लांट बन जाने के बाद छत्तीसगढ़ जेनरेशन कंपनी पावर प्रोडक्शन में एनटीपीसी से भी आगे निकल जाएगा। कोरबा में अभी एनटीपीसी का 2600 मेगावॉट का प्लांट है और छत्तीसगढ स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी हसदेव ताप परियोजना का 1340 मेगावॉट। 1320 मेगावॉट के इस ताप विद्युत परियोजना से उसका प्रोडक्शन बढ़कर 2660 मेगावॉट हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल बिलासपुर के मोहभठ्ठा में आयोजित कार्यक्रम में बटल दबाकर इस सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट का काम प्रारंभ किया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कल देर शाम ट्वीट आया...राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री से जिस बिजली परियोजना का शिलान्यास पहले हो चुका था, उसका शिलान्यास करा लिया।'


छत्तीसगढ़ जेनरेशन कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने शिलान्यास नहीं, कार्य प्रारंभ किया। कोरबा के कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनर के साथ ही प्रधानमंत्री के मंच पर भी ’कार्य प्रारंभ’ लिखा था। यहां तक निमंत्रण पत्र और मीडिया को जारी विज्ञापनों में भी ’कार्य का शुभांरभ’ लिखा है। कोरबा के हसदेव ताप परियोजना स्थल पर जहां कल कार्य शुरू हुआ, वहां लगे पत्थर में भी ’कार्य शुभारंभ’ लिखा गया, इसलिए इसे शिलान्यास कहना सही नहीं होगा।

अफसरों का कहना है कि सितंबर 2023 में आनन-फानन में इसका शिलान्यास कर आधे-अधूरे टेंडर जारी कर दिया था।

पर्यावरण स्वीकृति भी नहीं

अफसरों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने बिना किसी पर्यावरण स्वीकृति के, बिना निविदा और कार्यादेश जारी किए जल्दीबाजी में परियोजना का शिलान्यास करा दिया था। जबकि, वर्तमान में सिर्फ विस्तृत निविदा ही जारी नहीं किया गया है बल्कि पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ भेल (BHEL) को कार्यादेश जारी कर प्रधानमंत्री के हाथों कार्य प्रारंभ कराया गया है।

देखिए परियोजना का डिटेल....



 


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