छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए गुड न्यूज़: 'लाख की खेती' से होगी बंपर कमाई, 1 पेड़ से मिलेंगे 5000 तक! जानें कैसे?

छत्तीसगढ़ के कोरबा (Korba) जिले में कटघोरा वनमंडल की 'लाख पालन योजना' से किसानों की इनकम बढ़ने वाली है। 2026 में 1000 किसानों को इस प्रॉफिटेबल स्कीम से जोड़ा जाएगा।

Update: 2026-02-28 08:06 GMT

फोटो: AI

कोरबा 28 फरवरी 2026: अगर आप खेती-किसानी से जुड़े हैं और अपनी इनकम (Income) बढ़ाना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक शानदार खबर है । कटघोरा वनमंडल (Katghora Forest Division) ने स्थानीय किसानों के लिए 'लाख पालन योजना' (Lac Cultivation Scheme) का ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार किया है जो उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल सकता है । इस ईको-फ्रेंडली (Eco-friendly) बिज़नेस से न सिर्फ पर्यावरण बचेगा, बल्कि रूरल एरिया में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे ।



 क्या है मौजूदा स्टेटस? 25 किसानों को 17 लाख की कमाई का चांस

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और एमडी (जिला यूनियन कटघोरा) कुमार निशांत (IFS) के डायरेक्शन में हाथी प्रभावित इलाकों में इस योजना को तेजी से लागू किया गया है। ग्राम पाथा और छिंदमेर के 25 किसानों ने अपने 56 कुसुम और बेर के पेड़ों पर 2 क्विंटल 'कुसुमी बीहन लाख' का संचरण (Inoculation) किया है ।

वन विभाग का एस्टिमेट है कि इससे करीब 16 क्विंटल लाख का शानदार प्रोडक्शन होगा। इसे बेचकर इन 25 किसानों को लगभग 17 लाख रुपये की तगड़ी कमाई (Income) होने की उम्मीद है ।



2026 का मेगा प्लान: 1000 किसानों को जोड़ने का टारगेट

शुरुआती सक्सेस को देखते हुए वनमंडल ने आगामी 2026 सीजन के लिए बड़ा टारगेट (Target) सेट किया है । वन धन विकास केंद्र जटगा और डोंगानाला के तहत 1000 किसानों को इस प्रॉफिटेबल योजना से जोड़ा जाएगा । इसमें किसानों के पलाश, बेर और कुसुम के पेड़ों की प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) की जाएगी। सबसे खास बात इस पहल से अगले सीजन में किसानों को प्रति वृक्ष (Per Tree) 3000 से 5000 रुपये तक की एक्स्ट्रा इनकम हो सकेगी ।


लाख (Lac) आखिर है क्या और इसकी इतनी डिमांड क्यों है?

लाख एक नेचुरल राल (Natural Resin) है जिसे 'Laccifera Lacca' नाम के छोटे-छोटे कीड़े बनाते हैं । ये कीड़े पोषक पेड़ों का रस चूसते हैं और अपनी सेफ्टी के लिए शरीर से एक लिक्विड निकालते हैं, जो जमकर लाख बन जाता है । आजकल ग्लोबल मार्केट में ऑर्गेनिक और ईको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स का जमाना है, इसलिए नेचुरल लाख की डिमांड तेजी से बढ़ रही है । इसका इस्तेमाल वार्निश, दवाओं व फलों की कोटिंग, कॉस्मेटिक्स (श्रृंगार), पॉलिश और सजावटी चीजों में होता है। इसके अलावा फूड आइटम्स, परफ्यूम (सुगंध उद्योग) और इलेक्ट्रिकल कुचालक (Insulators) बनाने में भी इसकी भारी मांग है ।

छत्तीसगढ़ में कमर्शियल लेवल पर कुसुमी लाख के लिए कुसुम, बेर और सेमियालता के पेड़ों का इस्तेमाल होता है। वहीं रंगीनी लाख के लिए पलाश और बेर के पेड़ मुफीद माने जाते हैं।

FAQ: लाख पालन योजना (Lac Cultivation) से जुड़े आपके सवाल

Q: कटघोरा वनमंडल का 2026 के लिए क्या टारगेट है?

A: 2026 सीजन में 1000 किसानों को पलाश, बेर और कुसुम के पेड़ों पर लाख की खेती (Lac Cultivation) से जोड़ने का टारगेट रखा गया है ।

Q: इस योजना से किसानों को कितनी कमाई हो सकती है?

A: वन विभाग के अनुमान के मुताबिक, सही तरीके से खेती करने पर एक पेड़ से करीब 3000 से 5000 रुपये तक की कमाई (Income) हो सकती है ।

Q: लाख का इस्तेमाल किन चीजों में होता है?

A: इसका कमर्शियल इस्तेमाल वार्निश, कॉस्मेटिक्स, दवाओं की कोटिंग, पॉलिश और यहां तक कि फूड इंडस्ट्री में भी किया जाता है ।

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