IPS Vikas Kumar: CG: नाराज आईपीएस? पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी ट्रैफिक ने सात दिन बाद भी ज्वाईन नहीं किया, कोई समझाया भी नहीं...
IPS Vikas Kumar: राज्यपाल रामेन डेका पांच दिन के भीतर दो बार ट्रैफिक जाम का शिकार हो गए। मगर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का आलम यह है कि 2020 बैच के जिस आईपीएस को डीसीपी ट्रैफिक बनाया गया है, उन्होंने अभी ज्वाईन नहीं किया है।
IPS Vikas Kumar: रायपुर। 23 जनवरी को रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ। इससे पूर्व संध्या 22 जनवरी की रात राज्य सरकार ने कमिश्नरेट में अफसरों की पोस्टिंग की। 2020 बैच के पांच आईपीएस अधिकारियों को कमिश्नरेट में पोस्ट किया गया। इनमें तीन को डीसीपी बनाया गया और दो अफसरों को यातायात और साईबर क्राइम का दायित्व सौंपा गया।
इन पांच में से चार अधिकारियों ने कमिश्नरेट में ज्वाईनिंग दे दी। मगर रायपुर में रहते हुए भी डीसीपी ट्रैफिक विकास कुमार ने अभी तक ज्वाईनिंग नहीं दी है। वे एसआईबी में एआईजी हैं और रोज अपने ऑफिस जा रहे हैं। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि विकास कुमार को पोस्टिंग को लेकर कुछ असंतोष है। पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा व्यक्त कर चुके हैं।
पोस्टिंग आदेश निकलने के सात दिन बाद भी डीसीपी ट्रैफिक ने ज्वाईन नहीं किया है। मगर कमाल की बात यह है कि किसी पुलिस अधिकारी ने उन्हें समझाने का प्रयास नहीं किया कि नया-नया कैरियर है, इससे उन्हें नुकसान हो जाएगा। ये तो सरकार के आदेश का सीधे-सीधे अवहेलना है।
हालांकि, विकास कुमार के साथ कवर्धा जिले में एडिशनल एसपी रहने के दौरान एक बार नाइंसाफी हो चुकी है। उन्हें एक ऐसे मामले में सस्पेंड कर दिया गया, जिसके लिए सीधे तौर पर वे जिम्मेदार नहीं थे। बावजूद इसके उन्हें बलि का बकरा बना दिया गया था।
उधर, रायपुर के खराब ट्रैफिक का शिकार राज्यपाल जैसे सूबे के सबसे बड़े व्यक्ति को भी होना पड़ रहा है। राज्यपाल रामेन डेका आज दुर्ग के दौरे पर थे। कार्यक्रम के बाद राज्यपाल दुर्ग से रवाना हुए मगर पता चला टाटीबंध के पास ट्रैफिक जाम है। हाईवे पर एक राखड़ लदा ट्रक पलट गया था। दुर्ग पुलिस को जब तक ट्रक पलटने की सूचना मिलती, तब तक राज्यपाल रायपुर के लिए रवाना हो चुके थे। इस पर पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फुल गए।
रायपुर पुलिस से संपर्क किया गया मगर राज्यपाल के काफिले को मौके तक पहुंचते तक ट्रक को हटाना संभव नहीं था। ऐसे में, पुलिस ने सेफ हाउस का इस्तेमाल किया। राज्यपाल की सुरक्षा को देखते दुर्ग पुलिस ने कुम्हारी के आगे पावर ग्रिड कारपोरेशन के गेस्ट हाउस को सेफ हाउस बनाया था।
कंट्रोल रुम ने तुरंत पायलट गाड़ी को फोन लगाकर राज्यपाल के काफिले का सेफ हाउस तरफ मोड़ने का निर्देश दिया। फिर राज्यपाल की गाड़ी में सवार एडडीसी को फोन लगाकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी गई। राज्यपाल कुम्हारी स्थित पावर ग्रिड के गेस्ट हाउस में करीब 20 मिनट रुके। इसके बाद सूचना आई कि ट्रक को हटा लिया गया है।
डेढ़ घंटा जाम से प्रभावित हुए राज्यपाल
आज की घटना से पहले 25 जनवरी को राज्यपाल रामेन डेका को एक कार्यक्रम के सिलसिले में दुर्ग जाना था। उस दिन टाटीबंध में बड़ा जाम लगा था। राजभवन ने अधिकारियों ने पुलिस को काफी फोन-फान किया। तब भी ट्रैफिक को क्लियर होने में काफी टाईम लग गया। इस वजह से राज्यपाल राजभवन से दुर्ग के लिए निकल नहीं पाए। वे करीब डेढ़ घंटे तक राजभवन में जाम हटने का इंतजार करते रहे।
क्या होता है सेफ हाउस?
राज्यपाल और मुख्यमंत्री स्तर के वीवीआईपी जब सड़क मार्ग से कहीं निकलते हैं तो हर 20 किलोमीटर की दूरी पर सेफ हाउस बनवाया जाता है। इसका मकसद यह होता है कि रास्ते में वीवीआईपी की कोई सुरक्षा या स्वास्थ्य का मसला आया तो उन्हें तुंरत सेफ हाउस में रुकवा दिया जाए। सेफ हाउस रोड किनाने कोई सरकारी गेस्ट हाउस या कार्यालय हो सकता है।
पांच दिन में तीसरी बार दुर्ग संभाग में
राज्यपाल रामेन डेका पांच दिन में आज तीसरी बार दुर्ग संभाग के दौरे पर थे। दो कार्यक्रम उनका दुर्ग में रहा और एक खैरागढ़ में। दुर्ग होते हुए वे खैरागढ़ गए थे।