Employee News: कर्मचारी-अधिकारी संविदा प्रथा समाप्त करने करेंगे उग्र आंदोलन, फेडरेशन का बड़ा निर्णय, आधार बेस्ड अटेंडेंस को समाप्त करने शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव

Employee News: आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी कोर कमेटी को सौंपी गई

Update: 2026-02-12 06:52 GMT

Employee News: रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की प्रांतीय बैठक रायपुर में आयोजित की गई। बैठक में फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 29 से 31 दिसंबर तक आयोजित कलम बंद हड़ताल की समीक्षा की गई। फेडरेशन के आंदोलन के परिणामस्वरूप 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत होने पर प्रदेश के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्रांत अध्यक्षों द्वारा शुभकामनाएं दी गईं।

बैठक में प्रदेश के कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश में व्याप्त संविदा प्रथा को समाप्त करने के लिए सर्वसम्मति से उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही आधार बेस्ड अटेंडेंस प्रणाली में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों से शासन को अवगत कराते हुए इस व्यवस्था को समाप्त करने हेतु अंतिम पुनर्विचार के लिए ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।

बैठक में शासन द्वारा महंगाई भत्ता देय तिथि से स्वीकृत नहीं किए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा डीए एरियर्स का भुगतान देय तिथि से किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा भी की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में प्रदेश के शासकीय सेवकों को भी देय तिथि से महंगाई भत्ता स्वीकृत किए जाने हेतु शासन से पत्राचार करने का निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप निर्णय नहीं लिया जाता है, तो न्यायालय की शरण लेने का विकल्प खुला रखने का सुझाव भी सदस्यों द्वारा दिया गया।

बैठक में कर्मचारी नेताओं ने सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति दिए जाने की वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। फेडरेशन का कहना है कि इस प्रकार की नियुक्तियों से विभागों में कार्यरत नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है तथा योग्य कर्मचारियों के कैरियर उन्नयन के अवसर बाधित हो रहे हैं।साथ ही,लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को पदोन्नति की प्रतीक्षा रहती है, किंतु सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुनः संविदा पर नियुक्त किए जाने से रिक्त पदों पर पदोन्नति नहीं हो पाती। इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष का वातावरण बन रहा है।इसके अतिरिक्त, संघ ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव से पक्षपात और भ्रष्टाचार की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। यदि नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट, प्रतिस्पर्धात्मक और नियमबद्ध न हो, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा आधार बेस्ड अटेंडेंस व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जाता है, तो सभी प्रांत अध्यक्षगण रायपुर में बैठक आयोजित कर आगामी आंदोलन को लेकर अंतिम निर्णय लेंगे।बैठक में सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की भर्ती हेतु विशेष अभियान चलने हेतु पत्राचार करने का निर्णय लिया गया। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया है कि लगभग सभी विभागों में केवल 60 प्रतिशत कर्मचारियों के बल पर ही विभाग चल रहे हैं। राज्य बनने के बाद जनसंख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है, लेकिन अधिकांश विभागों के ढांचे (सेटअप) में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। इसके कारण शासकीय सेवकों को देर रात तक कार्यालय में रुककर मानसिक एवं शारीरिक दबाव के साथ काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।इसके अलावा 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में आगामी सत्र के दौरान उग्र प्रदर्शन किए जाने का सुझाव भी बैठक में रखा गया।

फेडरेशन की प्रांतीय बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी कोर कमेटी को सौंपी गई। कोर कमेटी शीघ्र ही बैठक आयोजित कर परिस्थितियों के अनुरूप उचित निर्णय लेगी।

बैठक में कमल वर्मा,ओंकार सिंह, चंद्रशेखर तिवारी,संजय सिंह, अजीत दुबे,पंकज पांडेय, मनीष सिंह ठाकुर, आर एन ध्रुव,आलोक नागपुरे,जय कुमार साहू,मनोज साहू, आलोक मिश्रा,संतोष कुमार वर्मा, डॉ दिलीप झा,पूकराम कुर्रे, लिखेश वर्मा,ललित बिजौरा, पवन सिंह, एस आर नेताम, सुरेश ढीढी, पीताम्बर पटेल सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।


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