CS की कमेटी पर हाई कोर्ट ने उठाये सवाल, अरपा, महानदी, शिवनाथ सहित छत्तीसगढ़ की 11 नदियाें पर हो रहे ये काम...

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर की अरपा, शिवनाथ, महानदी सहित प्रदेश के 11 नदियों की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। नदियों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर हो रहे काम का, चीफ सिकरेट्री विकासशील खुद ही मानिटरिंग कर रहे हैं। राज्य शासन ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के समक्ष कुछ इस तरह का जवाब पेश किया है।

Update: 2026-03-17 09:34 GMT

फोटो सोर्स- NPG News

बिलासपुर। 17 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर की अरपा, शिवनाथ, महानदी सहित प्रदेश के 11 नदियों की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। नदियों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर हो रहे काम का, चीफ सिकरेट्री विकासशील खुद ही मानिटरिंग कर रहे हैं। राज्य शासन ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के समक्ष कुछ इस तरह का जवाब पेश किया है। डिवीजन बेंच ने राज्य शासन द्वारा बनाई गई कमेटी में विभिन्न विभागों के सिरकेट्री को शामिल करने पर सवाल उठाया है। डिवीजन बेंच ने कहा,इनकी जगह विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार ने कहा, कमेटी में विशेषज्ञों को शामिल करने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

अरपा सहित प्रदेश के नदियों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में शपथ पत्र पेश कर बताया, नदियों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर किए जा रहे कार्यों का छत्तीसगढ़ शासन के चीफ सिकरेट्री विकासशील खुद ही मानिटरिंग कर रहे हैं।

15 दिनों के भीतर इस तरह नजर आएंगे बदलाव

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच को बताया,सभी जिलों के कलेक्टर्स से कहा गया है, आने वाले 15 दिनों के भीतर नदियों के उद्गम स्थल का सीमांकन कर डिस्प्ले बोर्ड लगाएं। उद्गम स्थल के भू-अभिलेख और जियो-टैग तस्वीरें शासन को भेजनी होगी।

इन्होंने दायर की है याचिका

अरपा के उद्गम और प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अधिवक्ता अरविंद कुमार शुक्ला सहित अन्य ने वर्ष 2019 और 2020 में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद प्रदेश के अन्य नदियों के संरक्षण को लेकर चर्चा हुई,इसके बाद जनहित याचिका में प्रदेशभर की नदियों को शामिल किया गया। जनवरी के दूसरे पखवाड़े में पीआईएल की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने चीफ सिकरेट्री की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठन करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। डिवीजन बेंच के निर्देश के मद्देनजर हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में वित्त, जल संसाधन और वन विभाग सहित 7 विभागों के सचिव को शामिल किया गया है। डिवीजन बेंच ने कहा, विभिन्न विभागों के सचिव के अलावा समिति में विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।

प्रदेश की 11 नदियां जिनकी बदलेगी सूरत

अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर नदी के उद्गम को संरक्षित करने के अलावा संवारने का काम किया जाएगा। नदियों के पुनरुद्धार के लिए विभाग स्तर पर विशेषज्ञों का एक समर्पित सेल बनाया जाएगा। नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए साइंटिफिक सर्वे कराकर डीपीआर तैयार किया जाएगा।

ट्रीटमेंट के बाद ही गिरेगा पानी

राज्य सरकार ने कोर्ट को दी जानकारी में बताया है, शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा। उद्‌गम स्थलों को संरक्षित करने के अलावा इसे आस्था और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रोजेक्ट में विभाग अपने बजट के अलावा डीएमएफ, मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि भी खर्च कर सकेंगे।

हाई पावर कमेटी में ये हैं शामिल

अध्यक्ष चीफ सिकरेट्री छत्तीसगढ़ शासन, वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खनिज संसाधन विभाग के सचिव सदस्य होंगे। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एमके. वर्मा को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

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