DA Hike: DA पर युद्ध का असर, केंद्र सरकार अब तक नहीं कर पाई डीए का अनाउंस, रिटायरमेंट एज बढ़ाने की अटकलें तेज...

DA Hike News: अमेरिका,इजरायल और ईरानी के बीच चल रहे भीषण जंग का असर केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ते दिखाई दे रहा है। युद्ध के चलते महंगाई भी बढ़ने लगी है। बढ़ती महंगाई और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर मंडराते विश्व युद्ध के बादल के बीच केंद्र सरकार अब तक केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए का अनाउंस नहीं कर पाई है। यह दूसरी मर्तबे है जब इस तरह की स्थिति बनते दिखाई दे रही है।

Update: 2026-04-06 15:34 GMT

DA Hike News: रायपुर। अमेरिका,इजरायल और ईरानी के बीच चल रहे भीषण जंग का असर केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ते दिखाई दे रहा है। युद्ध के चलते महंगाई भी बढ़ने लगी है। बढ़ती महंगाई और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर मंडराते विश्व युद्ध के बादल के बीच केंद्र सरकार अब तक केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए का अनाउंस नहीं कर पाई है। यह दूसरी मर्तबे है जब इस तरह की स्थिति बनते दिखाई दे रही है।

विश्व युद्ध की आहट और मौजूदा युद्ध ने विश्व को एक मुहाने पर ला खड़ा किया है, जहां बढ़ती महंगाई और इसका सरकारी खजाने पर बेतहाशा असर पड़ते दिखाई दे रहा है। आमतौर पर केंद्र सरकार द्वारा साल में दो बार डीए की घोषणा की जाती है। मार्च में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए का अनाउंस सरकार करती है और अप्रैल के महीने में सरकारी खजाने से राशि कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जमा होना शुरू हो जाता है। अप्रैल एक पहला सप्ताह तकरीबन खत्म होने को है, केंद्र सरकार की ओर से अब तक घोषणा नहीं हो पाई है। इसे लेकर अब कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों में भी चर्चा होने लगी है, अटकलें भी लगाई जा रही है, डीए पर कहीं युद्ध का असर तो नहीं पड़ रहा है।

अगर ऐसा होता है तो यह इतिहास में दूसरी मर्तबे होगा जब डीए की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा नहीं हो पा रही है। इसके पहले विश्वव्यापी संकट कोविड-19 के दौर में हुआ था जब संकटकाल के दौर में केंद्र सरकार ने घोषणा नहीं की थी। कमोबेश मौजूदा दौर में भी इसी तरह की स्थिति बनते दिखाई दे रही है।

ये है प्रमुख कारण

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रहे विवाद के बीच गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध गति से नहीं हो पा रही है। देशवासियों और केंद्र सरकार के लिए राहत वाली बात ये, ईरान सरकार ने भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खोल दिया है। यही वजह है कि गैस और तेल की आपूर्ति हो रही है। गैस व तेल कंपनियों पर अतिरिक्त भार ना पड़े इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सब्सीडी देने का निर्णय लिया है। यह सब आम लोगों को समय पर गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से करने के कारण सरकार को निर्णय लेना पड़ा है। जाहिरतौर पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

रिटायरमेंट एज बढ़ाने की अटकलें तेज

विश्वव्यापी संकट और युद्ध के हालात के बीच डीए की घोषणा ना होने के बीच में एक बार फिर केंद्रीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज को लेकर चर्चा छिड़ गई है। रिटायरमेंट एज में दो साल की बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। बता दें, यह कोई नई चर्चा नहीं है, पर मौजूदा दौर में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, अटकलों को बल मिलने लगा है। अटकलें लगाई जा रही है, संकट के दौर में केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज में दो साल की बढ़ाेतरी ना करे। कर्मचारी संगठनों के बीच भी इस बात की चर्चा छिड़ गई है। रिटायरमेंट एज दो साल बढ़ाने का यह प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री स्व डॉ मनमोहन के कार्यकाल के दौर का है। समय-समय पर डा मनमोहन सरकार के दौर के प्रस्ताव को लेकर अटकलें लगाई जा रही है। वर्तमान दौर में जब महंगाई में बढ़ाेतरी हो रही है और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार पड़ने लगा है, रिटायरमेंट एज को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा छिड़ने लगी है। यह घोषणा सरकार को राहत देने वाली भी हो सकती है।

डा रमन सिंह सरकार ने इसे पहनाया था अमलीजामा

केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार और देश के अन्य प्रांतों की सरकार अमल में नहीं ला पाई थी। तब विधानसभा चुनाव का दौर था, डॉ रमन सिंह की सरकार ने विधानसभा चुनावी दौर में केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर अमल करते हुए राजकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज को दो साल बढ़ाने का फैसला लिया था और इसे अमलीजामा भी पहनाया।

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