CM Vishnudeo Sai: नई फसलों की ओर बढ़ रहा किसानों का रुझान, खेती के तरीके और किसानों की सोच को बदलने का माध्यम बन रही विष्णु देव साय सरकार की योजनाएं...
CM Vishnudeo Sai: राज्य शासन की इस योजना से किसान अब परंपरागत धान आधारित खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। इससे न केवल आय के नए स्रोत बन रहे हैं....
CM Vishnudeo Sai: रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषक उन्नति योजना 2.0 किसानों के लिए केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह खेती के तरीके और सोच को बदलने का माध्यम बन रही है। राज्य शासन की इस योजना से किसान अब परंपरागत धान आधारित खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। इससे न केवल आय के नए स्रोत बन रहे हैं, बल्कि खेती अधिक संतुलित और टिकाऊ होती जा रही है।
जिला बेमेतरा के ग्राम उमरावनगर के प्रगतिशील किसान हेमंत कुमार राजपूत के लिए कृषक उन्नति योजना एक वरदान साबित हुई है। शासन से प्राप्त 2.32 लाख रुपये की अनुदान राशि का उन्होंने योजनाबद्ध और पारदर्शी उपयोग किया। इस राशि से उन्होंने सबसे पहले अपने अधूरे मकान का निर्माण पूरा कराया, जिससे परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिला।
कच्चे मकान की असुरक्षा से निकलकर पक्के घर में रहना उनके लिए आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा का कारण बना। किसान हेमंत सिंह राजपूत ने अनुदान राशि का उपयोग खेतों में पम्प स्थापना के लिए भी किया। इससे वर्षों पुरानी सिंचाई समस्या का समाधान हुआ और अब समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पा रहा है। बेहतर सिंचाई के कारण फसलों की गुणवत्ता सुधरी, उत्पादन बढ़ा और लागत में कमी आई। कम समय और कम श्रम में अधिक खेती संभव होने से उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। आज वे आत्मनिर्भर किसान के रूप में अपने गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
मजबूत हुई किसानों की आर्थिक स्थिति
राज्य शासन द्वारा लागू समर्थन मूल्य नीति और कृषक उन्नति योजना किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव ला रही है। धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक की जा रही है। पारदर्शी खरीदी प्रक्रिया, डिजिटल टोकन प्रणाली और बेहतर उपार्जन केंद्र व्यवस्थाओं से प्रदेश के किसान संतुष्ट नजर आ रहे हैं। राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी किसान गोपाल प्रसाद ने धान उपार्जन केंद्र मनकी में 71 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि शासन की योजनाओं से समय पर खाद बीज उपलब्ध हुआ और 18 एकड़ भूमि से उत्कृष्ट उत्पादन मिला। पिछले वर्ष धान बिक्री से मिली राशि से उन्होंने कृषि भूमि का विस्तार किया था, जबकि इस वर्ष की आय से नया मकान बनाने की योजना है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों से किसानों की आय और जीवन स्तर दोनों में सुधार आया है।
फसल विविधीकरण से खेती अधिक लाभकारी
राजनांदगांव के ग्राम खपरीकला निवासी किसान देवदास वर्मा ने 146 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि धान के बाद रबी मौसम में चना, तिवड़ा, गेहूं और बटरी मटर जैसी फसलें लेकर वे फसल चक्र अपना रहे हैं। समय पर ऋण, खाद बीज और तकनीकी सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और आय के नए रास्ते खुले हैं। कृषक उन्नति योजना 2.0 के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का और लघु धान्य फसलें लेने पर किसानों को प्रति एकड़ 11 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
खरीफ 2025 में अन्य फसलों पर 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता का प्रावधान है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। कृषक उन्नति योजना 2.0, समर्थन मूल्य और डिजिटल व्यवस्था के संयुक्त प्रभाव से किसान अब केवल उपज बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भविष्य की खेती की योजना भी बना रहे हैं। इससे किसानों की आय बढ़ रही है, जीवन स्तर सुधर रहा है और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
रबी मौसम में 1800 किसान 1200 एकड़ में नहीं लेंगे धान का फसल
सारंगढ़ बिलाईगढ़ कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के निर्देश पर कृषि उप संचालक आशुतोष श्रीवास्तव और अधीनस्थ मैदानी अधिकारी कर्मचारी ने जिले के तीनों ब्लाकों के किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसलों को लगाने के लिए प्रेरित किया, जिससे प्रेरित होकर लगभग 1800 किसानों ने 1200 एकड़ में गेहूं, मक्का, चना, मटर, मूंग, उड़द, मसूर सरसों, मूंगफली सूरजमुखी, तिवरा, सब्जी भाजी, पाम तेल व अन्य लघु धान्य फसल की है।
जिले में बढ़ती जल समस्या को दृष्टिगत रखते हुए कृषकों ने इस वर्ष फसल विविधीकरण एवं फसल चक्र के वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाते हुए सराहनीय पहल की है। कृषकों ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को प्राथमिकता दी है । यह नवाचार कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के सतत समन्वय से सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो सका है।
किसानों में उत्साह
कृषि उपसंचालक श्रीवास्तव ने कहा कि शासन ने कृषकों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए हैं। तकनीकी मार्गदर्शन, फसल बीमा का प्रावधान एवं उत्पाद के विपणन की समुचित व्यवस्था की है। बीज निगम में बिक्री के लिए पंजीयन एवं सहकारी समितियों के माध्यम से फसल विक्रय की सुविधा प्रदान करने से किसानों का उत्साह बढ़ा है। गेहूं की खेती के साथ साथ कृषकों ने सरसों, चना, गेहूं, तिल, लाखड़ी एवं साग-सब्जियों की खेती अपनाई है। इसके अतिरिक्त जो किसान पूर्व में अपने खेतों को खाली छोड़ देते थे उन्होंने भी इस वर्ष दलहन एवं तिलहन फसलों के अंतर्गत क्षेत्र विस्तार कर उत्पादन में सहभागिता निभाई है।
बीज अंकुरण संतोषजनक
जिले के प्रगतिशील किसानों ने बताया कि शासन से मिले बीजों का अंकुरण संतोषजनक है। फसलों से अच्छे उत्पादन की पूर्ण आशा है। फसल बीमा की सुरक्षा एवं सुनिश्चित आर्थिक स्थिरता एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है। बरमकेला विकासखंड के 975 किसानों के द्वारा लगभग 502 एकड़ खेत में धान की बजाय अन्य दलहन फसल की खेती की है।
जल संरक्षण के साथ आय में भी सहायक
जिले के सारंगढ़ विकासखंड , बरमकेला विकासखंड और बिलाईगढ़ विकासखंड के कृषकों का मानना है कि यह पहल जल संरक्षण के साथ आय संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने आने वाले वर्षों में भी इन्हीं फसलों को अपनाकर सतत एवं टिकाऊ कृषि पद्धति को आगे बढ़ाने की बात कही।
उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि सारंगढ़ ब्लॉक में 649 किसानों के द्वारा लगभग 437 एकड़ जमीन में दूसरी फसल धान के बदले गेहूं , मक्का, चना, मटर , मूंग की खेती किए हैं, वही बरमकेला विकासखंड में 501 एकड़ से अधिक जमीन में 975 किसानों के द्वारा लघु धान्य की खेती की है। बिलाईगढ़ ब्लॉक में लगभग 196 किसानों के द्वारा गेहूं, मक्का चना, मटर मूंग उड़द आदि फसलों की खेती किया गया है जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति में इजाफा होगा और आय में वृद्धि होगी।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा, रबी में गेहूं की खेती से किसानों की बढ़ी आमदनी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभाग द्वारा किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम लागत में अधिक लाभ सुनिश्चित हो सके।
इसी कड़ी में जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सोगड़ा निवासी सीमांत कृषक कीना राम ने रबी मौसम में गेहूं की खेती कर उल्लेखनीय लाभ प्राप्त किया है। कृषि विभाग मनोरा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्हें एनएफएसएनएम योजना के तहत एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया।
कृषक कीना राम ने खेत की अच्छी तैयारी कर पर्याप्त मात्रा में गोबर खाद का उपयोग किया। साथ ही समय-समय पर सिंचाई एवं खरपतवार प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया, जिसके परिणामस्वरूप गेहूं की फसल में किसी प्रकार की गंभीर कीट-रोग समस्या नहीं आई और फसल की स्थिति अत्यंत संतोषजनक रही। इससे बेहतर उत्पादन की प्रबल संभावना बनी है।
किसान कीना राम ने बताया कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पूर्व में वे केवल खरीफ में धान की खेती करते थे और रबी में खेत खाली छोड़ देते थे, जिससे गेहूं जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी। रबी में गेहूं की खेती शुरू करने से अब न केवल अतिरिक्त आय हो रही है, बल्कि चावल के साथ-साथ अपने उपयोग के लिए गेहूं और आटा भी उपलब्ध हो रहा है।
रबी फसल के प्रमुख लाभ
धान के बाद गेहूं की खेती से अतिरिक्त आमदनी, खाली समय और संसाधनों का सदुपयोग, बेहतर गुणवत्ता का अनाज, तथा रबी में पड़ती भूमि का क्षेत्रफल समाप्त होना जैसे कई लाभ सामने आए हैं।
कृषक कीना राम ने अन्य किसानों से अपील की है कि वे खरीफ के साथ-साथ रबी मौसम में भी गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाएं, ताकि कम समय और कम लागत में अधिक आमदनी के साथ आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। उन्होंने रबी फसल की खेती हेतु मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए कृषि विभाग और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।