CG स्कूल न्यूज़ : CG के नामी स्कूल ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की मान्यता निकली फर्जी...!
CG School News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर के नामी स्कूल ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल के दो ब्रांच व्यापार विहार और मिशन रोड की मान्यता फर्जी निकली.
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बिलासपुर.14 मार्च 2026| बिलासपुर के नामी स्कूल ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल के दो ब्रांच व्यापार विहार और मिशन रोड की मान्यता फर्जी निकली. सीजी बोर्ड की पांचवी -आठवीं परीक्षा में शामिल नहीं होंगे.
CBSE के नाम पर शिक्षा का व्यवसायीकरण और फर्जीवाड़ा आम हो गया है, जहाँ कई निजी स्कूल बिना मान्यता के सीबीएसई सम्बद्ध का बोर्ड लगाकर अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं और मोटी फीस वसूल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर में ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल व्यापार विहार और ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल मिशन रोड की यह धांधली उस समय उजागर हुई , जब स्कूल मैनेजमेंट ने पालको को सीजी बोर्ड के 16 मार्च से होने वाले पांचवी और आठवीं बोर्ड की परीक्षा का विकल्प मांगा,इससे पालको में भ्रम की स्थिति हो गई।
बच्चे जब साल भर सीबीएसई पैटर्न पर तैयारी कर रहे हैं तो सीजी बोर्ड एग्जाम में क्यों शामिल होंगे।मामला स्कूल की मान्यता का निकला, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल मिशन रोड और व्यापार विहार इन विद्यालयों की संबद्धता छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा दी गई है,जहाँ कक्षा आठवीं तक का स्कूल संचालित है।
एक मान्यता पर चल रहा दो स्कूल
जानकारी यह भी मिली है कि एक ही मान्यता पर दो स्कूल चलाया जा रहा है, शिक्षा के नाम का फर्जीवाड़ा सालों से जारी है, लेकिन इसका खुलासा सरकारी और प्राइवेट की स्कूलों के पांचवी और आठवीं बोर्ड की परीक्षा में बच्चों को अनिवार्य शामिल किये जाने राज्य शासन के निर्देश से हुआ।
इन स्कूलों में कक्षा पांचवी और आठवीं में पढ़ने वाले छात्र जिनकी अनुमानित संख्या ढाई सौ से 300 तक हो सकती है. वे विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण बोर्ड एग्जाम में शामिल नहीं हो सकेंगे।
अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों ने पहले ही स्कूल में आयोजित परीक्षा दे दी है। इसके बावजूद अब स्कूल प्रबंधन यह कहकर दोबारा परीक्षा में बैठने के लिए कह रहा है।
क्या कहना है पालकों का
पालकों का कहना है हमने तो अपने बच्चों का एडमिशन सीबीएसई पैटर्न पर संचालित स्कूल में कराया था, फिर बोर्ड परीक्षा की बात क्यों की जा रही है? अचानक लिए गए इस फैसले से अभिभावकों और छात्रों में भारी असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है।
अभिभावकों ने साफ तौर पर कहा है कि 16 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षा में वे अपने बच्चों को शामिल नहीं करेंगे, क्योंकि बच्चों ने पहले ही परीक्षा दे दी है।
उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही या गड़बड़ी का खामियाजा मासूम छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए। 5वी - 8वी बोर्ड परीक्षा के लिए इन विद्यालयों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए बच्चों की जानकारी नहीं दी है. न हीं इन स्कूलों में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तक चलाई जा रही है, और न ही पालको को इसकी कोई जानकारी.
शाला स्तर पर सीबीएसई के पैटर्न पर पहले ही परीक्षा ले ली है। कलेक्टर बिलासपुर को हुई शिकायत के बाद डीईओ बिलासपुर ने आनन फानन में जांच दल भेजा, जिसमे स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से मान्यता की शर्तो विपरीत संचालन पाया गया.
मान्यता समाप्त करने की अनुसंशा
पाचवी आठवीं बोर्ड परीक्षा के एग्जाम में बच्चों को शामिल करने के संबंध में शाला प्रबंधन में कोई रुचि नहीं ली है, इसलिए विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई है, जिससे इन स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया?
बताया जाता है कि ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की धांधली मामले में मंत्रालय से लेकर के अनेको नेताओं के फ़ोन घनघना रहे हैं, मिली जानकारी के अनुसार ब्रिलिएंट स्कूल प्रबंधन ने डीईओ के सामने माफी नामा भरकर परीक्षा में शामिल होने के लिए वैकल्पिक अवसर मांगा है।
पांचवी आठवीं बोर्ड परीक्षा में किसी विद्यार्थी को फेल करने का नियम नहीं है और जून जुलाई माह में पूरक परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसमें ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल व्यापार विहार एवं मिशन रोड बिलासपुर के 300 बच्चों को शामिल करने की अनुमति देने की बात कही जा रही है.
एक सवाल यह भी
सवाल यह भी खड़ा होता है कि जब बरसों से इन स्कूलो का संचालन हो रहा है तो शिक्षा विभाग किस गहरी नींद में सोया हुआ था? शासन से इस सत्र से पांचवी आठवीं बोर्ड परीक्षा के संबंध में प्राइवेट स्कूलों के अनिवार्य शामिल होने का निर्देश जारी नहीं होता तो इन स्कूलों की धांधली इसी प्रकार चलती रहती है। स्थानीय बोर्ड द्वारा मान्यता लेकर सीबीएसई के नाम पर स्कूल चलाना सीधे तौर पर बच्चों और अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी का मामला है।
सवाल यह भी है कि ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल द्वारा कई सालों सीबीएसई नाम पर एडमिशन की धांधली कर रहा है जबकि वह राज्य शासन द्वारा मान्यता प्राप्त है। ऐसे में प्रबंधन पर कार्यवाही किए जाने की बजाय लीपापोती के क्या मायने है?
एक और स्कूल में फ़र्ज़ीवाडा
इसी प्रकार के अन्य मामले में नारायण टेक्नोक्रेट्स नेहरू नगर में भी बिना मान्यता के सत्र भर सीबीएसई के नाम पर शाला का संचालन किया गया एवं पोल खुल जाने के भय से रातोरात सीजी मान्यता प्राप्त कर विद्यार्थियों को सीजी बोर्ड की परीक्षा में शामिल किया कराया जा रहा है।
शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग के अभाव में न जाने ऐसे कितने ही विद्यालय बिलासपुर में खुलेआम अपनी शिक्षक की दुकान चला रहे हैं, मान्यता और निरीक्षण के नाम पर शिक्षा अधिकारियों की जेबे भरकर आने वाली भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। सरकार चाहे किसी की भी हो ऐसे संस्थानों का बेधड़क संचालन यह साबित करता है कि शिक्षा माफिया और उनका व्यवसाय छत्तीसगढ़ की शिक्षा को कितना खोखला बना रहा है।