Chhattisgarh High Court: दो पंचायत सचिवों को हाई कोर्ट से मिली राहत, राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में लगाया था जुर्माना

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा दो पंचायत सचिवों पर लगाए गए ₹25 हजार के जुर्माने को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि, जुर्माना लगाने से पहले संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का अवसर दिया जाना अनिवार्य है।

Update: 2025-01-03 04:00 GMT

Bilaspur High Court- NPG News

Chhattisgarh High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा दो पंचायत सचिवों पर लगाए गए ₹25 हजार के जुर्माने को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि, जुर्माना लगाने से पहले संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का अवसर दिया जाना अनिवार्य है।

मामला जशपुर जिले के ग्राम पंचायत गर्जियाबाथान के पंचायत सचिव जोगेंद्र प्रसाद यादव और ग्राम पंचायत केराकछार के पंचायत सचिव दिनेश नाग से संबंधित है। ग्राम पंचायत गर्जियाबाथान के सचिव जोगेंद्र प्रसाद यादव के खिलाफ प्रतिवादी आकाश बैरागही ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत 1 मार्च 2019 से 8 नवंबर 2021 तक वितरित चेकों के रजिस्टर की जानकारी मांगी थी। जब जानकारी समय पर नहीं दी गई, तो प्रथम अपील दायर की गई।

प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने 10 जनवरी 2022 को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, लेकिन जानकारी समय पर नहीं दी जा सकी। इसके बाद प्रतिवादी ने राज्य सूचना आयोग में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, 18 जनवरी 2023 को जानकारी प्रदान कर दी गई और आवेदक ने इसकी पावती देते हुए यह भी कहा कि, वे पंचायत सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते। इसके बावजूद राज्य सूचना आयोग ने जोगेंद्र प्रसाद यादव पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया।

दूसरी ओर ग्राम पंचायत केराकछार के सचिव दिनेश नाग के खिलाफ भी आकाश बैरागही ने लेजर बुक से संबंधित जानकारी मांगी थी। निर्देश के बावजूद समय पर जानकारी न मिलने पर सूचना आयोग में अपील की गई। आयोग ने दिनेश नाग पर भी ₹25,000 का जुर्माना लगाया। दोनों मामलों में पंचायत सचिवों ने हाई कोर्ट में अपील की। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि आवेदक ने खुद पावती देकर कार्रवाई न करने की बात कही थी। याचिकाकर्ताओं का मानना था कि शिकायत आयोग द्वारा खारिज कर दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने या विभागीय कार्रवाई शुरू करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने सूचना आयोग के आदेश को रद्द करते हुए दोनों पंचायत सचिवों की याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

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