CG बनाम CBSE संबद्धता: CG के इस जिले में शुरू हुई संबद्धता को लेकर जांच, संकुल समन्वयकों को मिली जिम्मेदारी, इतने दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट
CG School Education News: CG बनाम CBSE संबद्धता को लेकर छत्तीसगढ़ में बवाल की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार द्वारा पांचवीं और आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा लेने के फरमान के बाद उन स्कूल प्रबंधकों की पोल खुल गई है जो सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर फर्जी तरीके से सीबीएसई सिलेबस में मोटी फीस लेकर बच्चों को एडमिशन दे रहे थे।
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बिलासपुर।25 मार्च 2026| CG बनाम CBSE संबद्धता को लेकर छत्तीसगढ़ में बवाल की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार द्वारा पांचवीं और आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा लेने के फरमान के बाद उन स्कूल प्रबंधकों की पोल खुल गई है जो सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर फर्जी तरीके से सीबीएसई सिलेबस में मोटी फीस लेकर बच्चों को एडमिशन दे रहे थे। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अब ऐसे स्कूलों की खोजबीन शुरू हो गई है। संकुल समन्वयकों को अपने प्रभार वाले प्राइवेट स्कूलों के दस्तोवजों की पड़ताल करने व संबद्धता को लेकर रिपोर्ट पेश करनी होगी।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में निजी विद्यालयों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में 5वी 8 वी बोर्ड परीक्षा में सभी सरकारी एवं सीजी पैटर्न में संचालित प्राइवेट स्कूलों को अनिवार्य शामिल करने के निर्देश के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कई विद्यालय बिना पूर्ण मान्यता एवं वैध सम्बद्धता के ही संचालित हो रहे हैं।
प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने एशिया के सबसे बड़े ब्लाक बिल्हा के बीईओ ने निजी शालाओं की मान्यता रिपोर्ट, विस्तृत निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन सहित सात दिनों के भीतर संकुल समन्वयकों से मांगी है। ब्लाक में 450 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कई स्कूल कक्षा 1 से 8 एवं 9 से 12 तक की कक्षाएं तो संचालित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास आवश्यक विभागीय मान्यता या उसका नवीनीकरण अद्यतन नहीं है। ऐसे मामलों में शिक्षा विभाग द्वारा विस्तृत जांच शुरू की गई है। ऐसे विद्यालयों का खुलासा भी जरूरी है जो स्वयं को सीबीएसई CBSE से संबद्ध बताकर अभिभावकों से धोखाधड़ी कर रहे हैं, हकीकत ये, उनके पास केवल विभागीय अनुमति ही उपलब्ध है। ऐसे स्कूलों में न तो NCERT का निर्धारित पाठ्यक्रम पूर्ण रूप से लागू है और न ही CBSE की वैध सम्बद्धता ही साफ हो पा रहा है।
सीजी बोर्ड की मान्यता और निजी प्रकाशनों की किताबों से पढ़ाई
राज्य शासन के अंतर्गत संचालित स्कूलों में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन कई संस्थान मनमाने तरीके से निजी प्रकाशनों की पुस्तकें चला रहे हैं। यह मान्यता का सीधेतौर पर उल्लंघन है। नवंबर में पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष ने 1784 सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची जारी कर जिसमें लिखा है, इन स्कूलों ने नि:शुल्क किताबें नहीं लीं है। बदले में महंगी किताबें बेची गई है। इनमें बिलासपुर जिले के 157 प्राइवेट स्कूल सीजी स्कूल बोर्ड की पुस्तकें नहीं लिए हैं। ये स्कूल कैसे परीक्षा में शामिल हुए? स्कूलों ने सीजी बोर्ड की पुस्तक ही नहीं ली है, पूरे सत्र पढ़ाई बाहरी प्रकाशनों के पुस्तकों से की गई है, तो परीक्षा बच्चे बोर्ड की पुस्तकों से कैसे दे दिला रहे है,इसका कोई जवाब नहीं है।
फीस को लेकर बड़ा घालमेल
शुल्क वसूली के मामले में भी अनियमितताओं की शिकायतें होती रही हैं। कई स्कूलों में फीस रेगुलेशन कमेटी का गठन नहीं किया गया है, जबकि फीस में वृद्धि के लिए जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बावजूद अभिभावकों से निर्धारित मदों के अतिरिक्त अन्य शुल्क भी वसूले जाने की बात सामने आई है। आरटीई एक्ट 2009 के तहत प्रवेशित बच्चों की स्थिति भी जांच के दायरे में है। आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित छात्रों को समान सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
एक गड़बड़ी ऐसी भी आई सामने
सबसे गंभीर पहलू बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सामने आया है। जानकारी मिली है कि कुछ विद्यालयों द्वारा कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को नियमानुसार परीक्षा में शामिल नहीं किया जा रहा है। वहीं, 10वीं और 12वीं के लिए छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से सम्बद्धता प्रमाण पत्र की वैधता की भी जांच की जा रही है।
मूलभूत सुविधाओं की भी जांच
निरीक्षण में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी जांची जा रही है, जिसमें भवन, शौचालय, पेयजल, प्रयोगशाला एवं पुस्तकालय जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। कई स्थानों पर इन सुविधाओं की कमी भी सामने आने की संभावना है।
जांच में अनियमितता मिली तो संबद्धता हो सकती है रद्द
शिक्षा विभाग के अनुसार यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नोटिस जारी करने से लेकर मान्यता निरस्तीकरण तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
जिले में चल रही इस जांच से आने वाले दिनों में कई निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली उजागर होने की संभावना है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वैसे ज़मीनी स्तर पर स्कूलों के भौतिक सत्यापन और निरीक्षण की प्राथमिक जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की होती है।