छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को 3 प्रतिशत डीआर प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश की मिली मंजूरी,जानिए MP से अनुमति क्यों?

छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को 3 प्रतिशत डीआर प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश की मिली मंजूरी,जानिए MP से अनुमति क्यों?
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CG Pensioners News: छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में काम करने के बाद रिटायर हो चुके और पेंशन का लाभ रहे पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को तीन प्रतिशत डीआर प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी दे दी है। जानिए मध्य प्रदेश सरकार से अनुमति लेना क्यों जरुरी है।

रायपुर।25 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में काम करने के बाद रिटायर हो चुके और पेंशन का लाभ रहे पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को तीन प्रतिशत डीआर प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी दे दी है। जानिए मध्य प्रदेश सरकार से अनुमति लेना क्यों जरुरी है।

पेंशनरों के 3 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) देने के लिए मध्यप्रदेश शासन की सहमति के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर वहां की कैबिनेट की सहमति मिल गई है। इससे प्रदेश के सवा लाख से अधिक पेंशनरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।

प्रदेश में शासकीय कर्मियों को महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान हो गया है। लेकिन मध्यप्रदेश की सहमति की बाध्यता की वजह से पेंशनरों को डीआर देने का मामला अटक गया था। राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) के तहत पेंशनरों को डीआर देने से पहले मध्यप्रदेश सरकार से मंजूरी लेने की बाध्यता है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने भेजा था प्रस्ताव

राज्य सरकार ने 9 फरवरी को मध्यप्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा था। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने कहा, इससे राज्य के पेंशनरों की 3 प्रतिशत महंगाई राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक-दो दिनों में पेंशनरों के लिए डीआर का आदेश जारी करेगी।

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वर्ष 2000 में मप्र-छग के बंटवारे की शर्त थी कि जो भी वित्तीय भार छत्तीसगढ़ पर आएगा, उसमें हर एक रुपए का 26.63% पैसा छग काे देना होगा। शेष 73.37% पैसे की भरपाई मप्र करेगा। पेंशन वितरण में भी यह लागू रहा।बंटवारे की शर्त थी, पेंशन के हर एक रुपए पर 73.37 पैसे मप्र देगा, लेकिन पेंशन बांटते वक्त इसका ध्यान ही नहीं रखा।

बंटवारे के समय जितने भी पेंशनधारी छत्तीसगढ़ में रह गए और बाद में जो रिटायर हुए, उनकी पेंशन में मप्र अपना हिस्सा 73.37% देता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने दिसंबर 2025 में मप्र को डिमांड भेजी। मप्र सरकार के वित्त विभाग ने इसकी पड़ताल कराई तो डिमांड को सही पाया। अब यह परीक्षण हो रहा है कि यह मोटी रकम छग को कैसे दी जाए।

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