CG News: प्रशासन की अनदेखी पड़ी भारी: रानीडोगरी में ग्रामीणों के 'जुगाड़' वाले पुल से नदी में गिरा धान से लदा ट्रैक्टर
CG News: भानुप्रतापपुर (गावड़े पारा): सरकार और प्रशासन की वादाखिलाफी जब हद से पार हो जाती है, तो खामियाजा गरीब किसान को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया आज शुक्रवार को ग्राम रानीडोगरी के गावड़े पारा में सामने आया, जहाँ एक किसान की साल भर की कड़ी मेहनत नदी के तेज बहाव और प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ गई।
CG News: भानुप्रतापपुर (गावड़े पारा): सरकार और प्रशासन की वादाखिलाफी जब हद से पार हो जाती है, तो खामियाजा गरीब किसान को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया आज शुक्रवार को ग्राम रानीडोगरी के गावड़े पारा में सामने आया, जहाँ एक किसान की साल भर की कड़ी मेहनत नदी के तेज बहाव और प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ गई।
हादसे ने छीनी किसान की 'मुस्कान'
मिली जानकारी के अनुसार, गावड़े पारा निवासी एक किसान अपनी साल भर की कमाई यानी धान की फसल को ट्रैक्टर में लादकर मंडी ले जा रहा था। इसी दौरान, ग्रामीणों द्वारा स्वयं के श्रमदान से बनाए गए अस्थायी पुल को पार करते समय ट्रैक्टर अनियंत्रित हो गया और सीधे नदी में जा गिरा। देखते ही देखते किसान की पूरी फसल नदी के पानी में समा गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक रूप से किसान पूरी तरह टूट गया है।
वर्षों की मांग, पर नतीजा सिफर
गौरतलब है कि रानीडोगरी के गावड़े पारा के ग्रामीण वर्षों से यहाँ एक पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब शासन-प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगती, तो ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर और आपसी सहयोग से एक कामचलाऊ पुल का निर्माण किया था ताकि आवाजाही बनी रहे। आज की घटना ने साबित कर दिया कि ग्रामीणों का यह 'जुगाड़' प्रशासन की लापरवाही के सामने नाकाफी है।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
घटना के बाद से ही ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि: वे सालों से पुल के लिए आवेदन दे रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिलता है। किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने जा रहा था, अब उसके पास परिवार पालने के लिए कुछ नहीं बचा। यदि समय रहते पुल बन गया होता, तो आज यह दुर्घटना नहीं होती।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
स्थानीय लोगों ने अब सरकार से पीड़ित किसान के लिए उचित मुआवजे और रानीडोगरी में अविलंब पक्के पुल के निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अब भी उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।