CG Land Diversion: NPG.NEWS की खबर पर हड़बड़ाया राजस्व विभाग, जमीनों के डायवर्सन पर मीडिया में दे रहा अब ये सफाई...

CG Land Diversion: छत्तीसगढ के नंबर-वन न्यूज वेबसाइट एनपीजी न्यूज ने कल राजस्व विभाग के इस झोल का खुलासा किया था कि किस तरह जमीनों का डायवर्सन का अधिकार एसडीएम से वापिस लेने के बाद भी उसका क्रियान्वयन नहीं किया गया। इसके कारण डेढ़ महीने से लोग डायवर्सन के लिए भटक रहे हैं। इस खबर के बाद अफसरों से जवाब तलब किया गया। असल में, राजस्व विभाग ने राजपत्र में नोटिफिकेशन प्रकाशित करने के बाद यूटर्न मार दिया था। एनपीजी की खबर के बाद अब मीडिया में ये सफाई दी जा रही है।

Update: 2026-01-29 08:10 GMT

CG Land Diversion: रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए पिछले महीने जमीनों के डायवर्सन की अनुमति के लफड़े को समाप्त कर दिया था। मगर राजस्व विभाग द्वारा राजपत्र में नोटिफिकेशन प्रकाशित करने के बाद भी इसका क्रियान्वयन नहीं किया गया। नोटिफिकेशन जारी होते ही एसडीएम का डायवर्सन का अधिकार स्वयमेव समाप्त हो गया। इससे लोग परेशान हो रहे हैं।

बता दें, जमीन-जायदाद से जुड़े विभिन्न सुधारों की कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बडा फैसला लेते हुए पिछले महीने जमीनों के डायवर्सन की अनुमति का सिस्टम समाप्त कर दिया था। आम आदमी को परेशानी से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया था, ताकि लोगों को जटिलताओं से मुक्ति मिले। इसके पीछे एक मंशा और थी, राजस्व विभाग के भ्रष्टाचारों को रोकना।

दूसरे कई राज्यों में यह नियम पहले से लागू है। छत्तीसगढ़ में पुराने जमाने का रुल आज भी चल रहा था। जमीनों के डायवर्सन का अधिकार एसडीएम को दिया गया था। इसके लिए लोगों को लंबे समय तक एसडीएम ऑफिस का चक्कर काटना पड़ता था। भेंटपूजा के बाद भी लोगों के जल्दी काम नहीं हो पाते थे।

13 दिसंबर को नोटिफिकेशन

दिसंबर 2025 में राजस्व विभाग ने आदेश में लिखा, जमीनों के डायवर्सन का सक्षम अधिकारी की अब अनुमति की जरूरत नही होगी। 13 दिसंबर को इस नोटिफिकेशन को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया। राजस्व के मामले में इसे बड़ा सुधार माना गया। क्योंकि, लोग अपनी जमीनों का डायवर्सन खुद कर सकते थे।

साफ्टवेयर नहीं बना

राजपत्र में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने के बाद आदेश प्रभावशील माना जाता है। इस कारण एसडीएम का डायवर्सन अधिकार खतम हो गया। उधर, राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ऑनलाइन डायवर्सन के लिए कोई साफ्टवेयर रेडी नहीं किया या कोई और झोल था...इस चक्कर में आम आदमी फंस गया। प्रदेश के एसडीएम कार्यालयों में हर महीने बड़ी संख्या में जमीनों के डायवर्सन के लिए आवेदन लगते हैं। एसडीएम ऑफिस को चूकि अब पावर नहीं है, इसलिए वे अर्जी ले नहीं रहे। उधर, साफ्टवेयर अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।

लापरवाही पर सवाल

राजस्व विभाग के अधिकारियों की इस लापरवाही पर अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रश्न यह है कि जब साफ्टवेयर बना नहीं था तो एसडीएम का अधिकार क्यों खतम किया गया। या ऐसा तो नहीं कि आदेश लागू होने के बाद किसी प्रेशर में आकर राजस्व विभाग अपने ही आदेश का क्रियान्वयन रोक दिया। असल में, राजस्व विभाग की लॉबी नहीं चाहती थी कि डायवर्सन का अधिकार समाप्त हो जाए। क्योंकि, सरकार पहले ही नामंतरण का अधिकार समाप्त कर चुकी है।

मीडिया में सफाई

एनपीजी न्यूज में यह खबर प्रकाशित होते ही बताते हैं सरकार में उपर बैठे लोगों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को तलब कर पूछा कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ? इसके बाद राजस्व विभाग का सिस्टम हरकत में आया और अब मीडिया में सफाई दी जा रही कि साफ्टवेयर का ट्रायल चल रहा है। जल्द ही वेबसाइट और ऐप्प का ट्रायल पूरा हो जाएगा। इसके बाद ऑनलाइन डायवर्सन सिस्टम लागू हो जाएगा। अफसरों को इसका जवाब देना चाहिए कि बिना सिस्टम तैयार किए डायवर्सन का नियम बदला क्यों गया?

जारी अधिसूचना में लिखा था

THE RULE-8/76/2025-REVENUE. इत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) की धारा 172 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार, एतद्वारा, अधिसूषित करती है कि निम्नलिखित भूमियों के व्यपवर्तन हेतु सक्षम प्राधिकारी की अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं होगी...

1. नगर निगम एवं नगरपालिका क्षेत्रों।

2. नगर निगम तथा नगरपालिका की बाह्य सीमाओं से 5 कि.मी. के क्षेत्रों।

3. नगर पंचायत क्षेत्रों।

4. नगर पंचायत की चाय सीमाओं ने 02 कि.मी. के क्षेत्रों।

5. ग्रामीण क्षेत्रों, और सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित रीति से उक्त भूमियों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।



 


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