ब्रेकिंग: IPS अरुण देव गौतम बनेंगे छत्तीसगढ़ के 12वें पूर्णकालिक DGP, पढ़िये सरकार जल्दी में क्यों?
IPS Arun Dev Gautam: छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक के लिए आईपीएस अरुण देव के नाम पर मुहर लगाने का फैसला कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट की यूपीएससी को नोटिस के बाद सरकार ने यह निर्णय किया है। चूंकि शीर्ष अदालत की नोटिस का टाइम निकल गया है, लिहाजा कल कोर्ट खुलने के पहले सरकार आदेश जारी कर सकती है।
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रायपुर।5 अप्रैल 2026| सरकार ने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक के लिए आईपीएस अरुण देव गौतम के नाम पर मुहर लगाने का फैसला कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट की यूपीएससी को नोटिस के बाद सरकार ने यह निर्णय किया है। चूंकि शीर्ष अदालत की नोटिस का टाइम निकल गया है, लिहाजा कल कोर्ट खुलने के पहले सरकार आदेश जारी कर सकती है। हालांकि DGP की दौड़ में IPS हिमांशु गुप्ता का नाम भी प्रमुख है. मगर नक्सल मुद्दे पर बड़ी कामयाबी को देखकर प्रभाारी DGP अरुण देव की जगह पर अगर हिमांशु गुप्ता को DGP बनाया जाए, इसको लेकर सरकार खुद उलझन मेंं है, कुुल मिलाकर अरुण देव का पलड़ा भारी है इसलिए संभावना उनकी भारी है.
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर पूछा था कि अब तक राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। आयोग ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए जवाब तलब किया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना की कापी आयोग को नहीं भेजी है।
बता दें, UPSC ने 13 मई 2025 को ही DGP के लिए दो आईपीएस अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेज दिया था। नियमानुसार, सरकार को इस पैनल में से किसी एक अधिकारी को पूर्णकालिक डीजीपी के पद पर नियुक्त करना था। आयोग ने पूछा है कि 3 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? यदि विलंब हुआ है, तो उसका ठोस कारण बताया जाए।
छत्तीसगढ़ सरकार ने यूपीएससी के पैनल के आधार पर अरुण देव गौतम को डीजीपी तो नियुक्त किया, लेकिन उन्हें 'पूर्णकालिक' प्रभार देने के बजाय 'प्रभारी' डीजीपी बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 'प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार' मामले में स्पष्ट कहा था कि किसी भी राज्य में प्रभारी डीजीपी की परंपरा नहीं चलेगी।
5 फरवरी 2026 को 'टी धंगोपल राव बनाम यूपीएससी' मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चार कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि नियुक्ति में देरी होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अफ़सरों की जवाबदेही तय की जाएगी।
आज जारी हो सकता है आदेश
बता दें छत्तीसगढ़ के डीजीपी अशोक जुनेजा चार फरवरी 2025 को रिटायर हुए थे। उसके बाद राज्य सरकार ने अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी के पद नियुक्ति दी. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई से पहले माना जा रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार आज अरुण देव गौतम की नियुक्ति का आदेश जारी कर सकती है। क्योंकि, कोर्ट की मियाद पूरी हो गई है और कोई भरोसा नही कल इस पर सुनवाई हो जाए।
पैनल में दो नाम
यूपीएससी ने कई क्वेरियों के बाद छत्तीसगढ़ सरकार को DGP के लिए दो आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। इनमें 92 बैच के आईपीएस अफसर अरुण देव गौतम और 94 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता का नाम शामिल था। हालाँकि, आमतौर से यूपीएससी तीन नामों का पैनल राज्यों को भेजता है। मगर विकल्प के अभाव में संघ लोक सेवा आयोग ने दो ही नामों का पैनल भेजा। पैनल से सबसे सीनियर आईपीएस पवनदेव और 94 बैच के जीपी सिंह का नाम पैनल में शामिल नही किया।
जानिए कौन है आईपीएस अरुण देव गौतम
छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अरुण देव उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले है। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को कानपुर के पास स्थित उनके गांव अभयपुर में हुआ है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से की। फिर दसवीं व बारहवीं उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से पूरी की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आर्टस लेकर बीए किया। राजनीति शास्त्र में एमए किया। मां के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की।
प्रोफेशनल कैरियर
अरुण देव गौतम यूपीएससी निकालकर 1992 बैच के आईपीएस बने। 12 अक्टूबर 1992 को उन्होंने आईपीएस की सर्विस ज्वाइन की। उन्हें पहले मध्यप्रदेश कैडर एलॉट हुआ था। प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर उनकी जबलपुर में पोस्टिंग हुई। फिर वे बिलासपुर जिले में सीएसपी बने। बिलासपुर के बाद एसडीओपी कवर्धा बने। कवर्धा के बाद एडिशनल एसपी भोपाल बने। मध्य प्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट भी रहे। एसपी के रूप में पहला जिला उन्हें भोपाल का मिला।
वर्ष 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने पर अरुण देव गौतम ने छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया। छत्तीसगढ़ में वे कोरिया,रायगढ़, जशपुर,राजनंदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जिले के एसपी रहे।
डीआईजी बनने के बाद वे पुलिस हैडक्वाटर, सीआईडी, वित्त और योजना, प्रशासन और मुख्यमंत्री सुरक्षा के महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ रहे। चुनौती पूर्ण जिलों में अरुण देव गौतम को भेजा जाता था। वर्ष 2009 में राजनांदगांव में नक्सली हमले में 29 पुलिसकर्मियों व पुलिस अधीक्षक के शहीद होने के बाद अरुण देव गौतम को वहां का एसपी बन कर भेजा गया। जहां उन्होंने नक्सलियों से जमकर लोहा लिया।
आईजी के पद पर प्रमोशन होने के बाद छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के प्रभार में रहे। फिर बिलासपुर रेंज के आईजी बने। अरुण देव बिलासपुर जिले के एसपी भी रह चुके थे। झीरम नक्सली हमले में कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं की मौत के बाद अरुण देव गौतम को बस्तर आईजी बना कर भेजा गया। 25 मई 2013 को झीरम कांड हुआ था। इसके कुछ ही माह बाद नवंबर–दिसंबर को विधानसभा चुनाव हुए। तब सफलतापूर्वक चुनाव करवाने में अरुण देव गौतम की भूमिका रही और वोटिंग प्रतिशत में भी काफी इजाफा हुआ।
वे रेलवे, प्रशिक्षण, भर्ती और यातायात शाखाओं के प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक रहें। पिछले कुछ सालों से वे छत्तीसगढ़ के गृह सचिव के अलावा जेल व परिवहन विभाग का भी दायित्व सम्हाल रहे हैं। इसके अलावा उन्हें नगर सेना, अग्निशमन सेवाओं का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
पुरस्कार
अरुण देव गौतम को संयुक्त राष्ट्र पदक के अलावा सराहनी सेवाओं के लिए वर्ष 2010 में भारतीय पुलिस पदक और 2018 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2002 में संघर्षग्रस्त कोसोवा में सेवा देने के लिए अरुण देव गौतम को संयुक्त राष्ट्र पदक भी मिला है।