कर्मचारियों की खबर: मुख्य कार्यपालन अधिकार के प्रभार में कलेक्टर नहीं कर सकते बदलाव, हाई कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को किया रद्द

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने जनपद पंचायत के सीईओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, राज्य शासन के सरकुलर में दी गई व्यवस्था के अनुसार मुख्य कार्यपालन अधिकारी के प्रभार में कलेक्टर बदलाव नहीं कर सकते, इसके लिए पहले शासन से अनुमति लेनी होगी। याचिकाकर्ता सीईओ की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को रद्द कर दिया है।

Update: 2026-04-05 08:52 GMT

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

बिलासपुर।5 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने जनपद पंचायत के सीईओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, राज्य शासन के सरकुलर में दी गई व्यवस्था के अनुसार मुख्य कार्यपालन अधिकारी के प्रभार में कलेक्टर बदलाव नहीं कर सकते, इसके लिए पहले शासन से अनुमति लेनी होगी। याचिकाकर्ता सीईओ की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को रद्द कर दिया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर निवासी शुभा दामोदर मिश्रा को 18 जून 2025 को सचिव, आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, गौरेला, जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के पद पर पदस्थ किया था। जून 2025 से जनपद पंचायत, गौरेला में सीईओ के पद कार्य कर रहीं थी। 11 मार्च 2026 को कलेक्टर, जिला-जीपीएम ने एक आदेश जारी कर याचिकाकर्ता शुभा मिश्रा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के प्रभार से हटाते हुए कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, गौरेला में पदस्थ कर दिया।

कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए उसने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कहा, याचिकाकर्ता को जून 2025 में सचिव छ.ग. शासन, आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला के पद पर पदस्थ किया था।

अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने शासन के सरकुलर का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने 11 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव, छ.ग. शासन, आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा जारी सर्कुलर के पैरा कमांक 03 का हवाला देते हुए कहा, इसमें साफ लिखा है, किसी भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जनपद पंचायत जिन्हें शासन द्वारा उक्त पद पर पदस्थ किया गया है, उन्हें उक्त प्रभार से हटाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जनपद पंचायत को यदि उनके प्रभार से हटाया जाना है, तो ऐसी स्थिति में राज्य शासन के अनुमति, अनुमोदन लेना जरुरी है। याचिकाकर्ता के मामले में कलेक्टर, जिला-गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही ने शासन की स्वीकृति,अनुमोदन के बिना याचिकाकर्ता को सीईओ जनपद पंचायत के प्रभार से हटा दिया है। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कलेक्टर के आदेश को रद्द कर दिया है।

Tags:    

Similar News