बड़ी खबर: पति की बीमारी से मौत का दोष सांप पर मढ़ महिला ने लिया 4 लाख मुआवजा, FIR दर्ज
CG Crime News: तखतपुर तहसील के अंतर्गत एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सिस्टम की खामियों और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाया है।
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बिलासपुर।18 फरवरी 2026: तखतपुर तहसील के अंतर्गत एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सिस्टम की खामियों और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाया है। पूरा मामला छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के ग्राम चना डोंगरी का है। एक महिला ने लकवाग्रस्त पति की मौत को सांप काटना बताते हुए राज्य शासन से मिलने वाली चार लाख रुपये का मुआवजा हड़प लिया है। जांच दल की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जालसाज महिला व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।
उर्वशी श्रीवास ने तहसीलदार तखतपुर के कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर दावा किया था कि उनके पति पुरुषोत्तम श्रीवास की मृत्यु 'सर्पदंश' (सांप के काटने) से हुई थी। इस आधार पर उन्होंने शासन से 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्राप्त कर ली। मिली शिकायत के आधार पर जब पूरे मामले की पड़ताल की गई,
जब इस अनोखे जालसाजी की जांच की गई, तो परत-दर-परत फर्जीवाड़ा सामने आने लगा। कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आदेश दिया था। कलेक्टर के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था। जांच दल में तहसीलदार, थाना प्रभारी और चिकित्सा अधिकारी को शामिल किया गया था। जांच में फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। आवेदिका उर्वशी श्रीवास ने किसी शोभाराम कौशिक के नाम का इस्तेमाल किया था, जिसने फांसी लगाकर आत्महत्या क र ली थी। सरकारी दस्तावेजों में उर्वशी के पति पुरुषोत्तम श्रीवास का मृतक के रूप में नाम कहीं दर्ज ही नहीं है।
शासकीय दस्तावेज में तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर
जांच में चौंकानी वाली बात सामने ये आई, मुआवजा प्रकरण में तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर किया गया हहै। तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने हस्ताक्षर को अपना मानने से इंकार कर दिया है। फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी नाम के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाने का मामला सामने आया है।
परिजनों के बयान चौंकाने वाला
जांच दल ने जब परिजनों से पूछताछ की तब मृतक पुरुषोत्तम के ससुर व साले ने जो बात बताई वह उर्वशी के दावों को सफेद झूठ साबित कर दिया। मृतक के ससुर व साले ने जांच दल को बताया कि पुरुषोत्तम को सांप ने उसकी मृत्यु से तीन महीने पहले काटा था। पुरुषोत्त को लकवा मार दिया था और लकवाग्रस्त रहते घर पर ही उसकी मृत्यु हुई है। शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया था।
उर्वशी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर तखतपुर तहसीलदार ने उर्वशी श्रीवास के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने उर्वशी श्रीवास एवं अन्य के विरुद्ध धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) और 34 (समान मंशा) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
NPG एक्सप्लेन
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में ऐसा रेकेट काम कर रहा है जिसे पढ़कर और सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जी हां। प्राकृतिक मौत को दुर्घटना बताने का खेल चल रहा है। प्रदेश के शहरी इलाकों के अलावा दूरस्थ वनांचलों में रेकेट सुनियोजित तरीके से काम को अंजाम दे रहे हैं। हर एक काम के लिए लोगों की तैनाती और जिम्मेदारी भी। जिस काम के जो विशेषज्ञ हैं उनको वहीं जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। NPG.NEWS के पास उपलब्ध दस्तावेजों में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आमतौर पर लोग इलाज कराने जाते हैं। साथ में परिजन या जान पहचान वाले। रेकेट का काम कुछ अलग तरह से होता है। ये इलाज कराने नहीं इलाज कराने आने वाले और मौत के बाद पीएम कराने आने वालों पर इनकी नजरें रहती है। मृतक के परिजनों से संपर्क साधना, सरकार की तरफ से मिलने वाली राशि को बताना और लालच देना। लालच के फेर में जब परिजन अपना ईमान बेचने को तैयार हो जाते हैं तब इनका असली खेल शुरू हो जाता है।
पहला टारगेट पीएम वाला स्टाफ और चिकित्सक
रेकेट का पहला टारगेट मेडिकल स्टाफ होता है। वह भी पीएम करने वाला स्टाफ। इसमें चिकित्सक को भी अपने टारगेट में रखते हैं। फर्जीवाड़ा का यही सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। शुरुआत यहीं से होता है और अंजाम तक पहुंच जाता है। नेचरल डेथ को असमान्य बनाने का खेल। सांप काटने से मौत, पागल कुत्ता के काटने से मौत। घर की दीवार गिरी और दबने से मौत हो गई। खेत गया था, तेज हवा चली, पेड़ गिरा और मौत हो गई। इससे भी थोड़ा आगे बिच्छू के काटने से मौत हो गई। कुछ इस तरह का पीएम रिपोर्ट हासिल करने के बाद आपदा एवं प्रबंधन विभाग में क्षतिपूर्ति के लिए प्रकरण जमा करा दिया जाता है। कलेक्टोरेट के इस महत्वपूर्ण विभाग से परीक्षण के लिए राजस्व विभाग में प्रकरण भेजा जाता है। और फिर यहीं से शुरू होता है सरकारी खजाने को लुटने का खेल।