Bilaspur High Court: वन्यजीवों की करंट से मौत: राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में पेश की जानकारी, अभियान को लेकर दी ये जानकारी

Bilaspur High Court: वन्यजीवों की करंट से हो रही मौत को स्वत: संज्ञान में लेते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है....

Update: 2026-01-24 11:11 GMT

Bilaspur High Court: बिलासपुर। वन्यजीवों की करंट से हो रही मौत को स्वत: संज्ञान में लेते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने वन्यजीवों की करंट से मौत को रोकने किए जा रहे उपाय को लेकर शपथ पत्र के सथ जानकारी पेश की है। राज्य सरकार के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने पीआईएल की सुनवाई के लिए 6 अप्रैल 2026 की तिथि तय कर दी है।

जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपना रिपोर्ट पेश किया। रिपोर्ट पर संतोष जताते हुए डिवीजन बेंच ने पीआईएल की अगली सुनवाई के लिए तिथि तय कर दी है।

ये है राज्य सरकार का रिपोर्ट

दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रदेश के जंगलों में बड़े पैमाने पर वन्यजीवों को करंट से बचाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। 5726 किलोमीटर जंगल क्षेत्र में पैदल एंटी-स्नेयर वॉक किया गया। इस दौरान जंगल में कई जगहों से जिंदा करंट तार, अवैध फंदे, इलेक्ट्रिक हुकिंग तार, देसी हथियार और वन्यजीव अंग जब्त किए गए।

शिकार के मामले में की गई कार्रवाई

खैरागढ़ में तेंदुए की करंट से मौत और शिकार के मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। लापरवाही बरतने के आरोप में बीट गार्ड को निलंबित किया गया है। सूरजपुर में टाइगर की मौत के बाद स्निफर डॉग की मदद से आरोपियों को पकड़ा गया। बलरामपुर में 70 मीटर से ज्यादा तार की जब्ती बनाई गई है। बस्तर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ के साथ संयुक्त अभियान चलाया गया। बिलासपुर सर्किल में भी सीएसईबी के मैदानी और तकनीकी अमलों के साथ संयुक्त निरीक्षण और हाई वोल्टेज लाइनों की जांच शुरू की गई है। राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मैदानी अमलों की जवाबदेही तय कर दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नियमित नाइट पेट्रोलिंग, लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई और सूचना देने वालों को इनाम देने की व्यवस्था लागू की गई है, सूचना देने वालों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।

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