Bilaspur High Court: ये तो गजब हो गया: वन अफसरों को भनक तक नहीं लगी और साढ़े पांच हजार पेड़ जंगल से हो गए गायब! पढ़िए क्या है मामला
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अफसरों को जंगल में लगे पेड़ों और विचरण कर रहे वन्यप्राणियों की फिक्र ही नहीं है। तभी तो जंगल साफ हो गया और अफसरों को कानो-कान भनक तक नहीं लग पाई। जनहित याचिका दायर होने के बाद जब हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया तब अफसरों ने बताया कि साढ़े पांच हजार पेड़ गायब है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने वन विभाग से रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अफसरों को जंगल में लगे पेड़ों और विचरण कर रहे वन्यप्राणियों की फिक्र ही नहीं है। तभी तो जंगल साफ हो गया और अफसरों को कानो-कान भनक तक नहीं लग पाई। जनहित याचिका दायर होने के बाद जब हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया तब अफसरों ने बताया कि साढ़े पांच हजार पेड़ गायब है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने वन विभाग से रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। राजेश रंगारी ने अधिवक्ता समर्थ मरहास के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गोदावरी इस्पात को दिए गए माइनिंग लीज को रद्द करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। पीआईएल पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
पूरा प्रकरण भानुप्रतापपुर ईस्ट फारेस्ट डिवीजन के रिजर्व फारेस्ट का है। रिजर्व फारेस्ट एरिया से वन विभाग के मैदानी अमले और अधिकारियों की जानकारी के बगैर साढ़े पांच हजार पेड़ गायब कर दिए गए हैं। रिजर्व फारेस्ट एरिया का आधा जंगल वन माफियाओं ने साफ कर दिया है। अचरज की बात ये मैदानी अमले से लेकर आला अधिकारियों को कानों-कान भनक तक नहीं लग पाई और आधा जंगल साफ हो गया। रिजर्व फारेस्ट एरिया से लगे जंगल की जमीन को गोदावरी इस्पात को माइनिंग लीज पर आवंटित किया गया है। याचिकाकर्ता ने गोदावरी इस्पात को जारी माइनिंग लीज को रद्द करने की मांग जनहित याचिका में की है। जनहित याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने वन विभाग के अधिकारियों को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। पीआईएल की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने दो सप्ताह की तिथि तय कर दी है।
यहां दिया गया है माइनिंग लीज
भानुप्रतापपुर ईस्ट फारेस्ट डिवीजन के रिजर्व फारेस्ट क्रमांक 608 के ग्राम कच्छे में गोदावरी इस्पात को माइनिंग लीज दी गई थी। पहले 100 हेक्टेयर और बाद में 32 हेक्टेयर एरिया और विस्तारित कर दिया है। वन विभाग ने जांच कर बताया कि रिजर्व फारेस्ट एरिया में कुल 11 हजार 600 पेड़ लगे हुए हैं, जिनका डायमीटर 20 सेमी से अधिक है। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई शुरू की। छह हजार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने के बाद बजट खत्म हो गया। बजट खत्म होने के बाद विभाग ने वर्ष 2015 में राज्य शासन से मार्गदर्शन मंगाया। तीन साल बाद वर्ष 2018 में बजट आया। बजट के बाद जब विभाग के अधिकारी पेड़ों की कटाई कराने रिजर्व फारेस्ट एरिया पहुंचे तो पूरा जंगल साफ हो गया था। साढ़े पांच हजार पेड़ों की जगह ठूंठ ही नजर आ रहे थे।
RTI से मांगी जानकारी
जंगल की कटाई को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रंगारी ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी। डीएफओ ने विभाग के मातहत अधिकारियों को पत्र लिखकर साढ़े पांच हजार पेड़ों की कटाई को लेकर जांच कराने का निर्देश दिया। वर्ष 2023 में रिपोर्ट पेश की गई और बताया कि रिजर्व फारेस्ट एरिया में छोटे पेड़ भी अब बड़े हो गए हैं।
वन विभाग का अजीबो-गरीब जवाब, कंपनी के वाहनों के चक्के के नीचे दब गए पेड़
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रंगारी ने अधिवक्ता समर्थ मरहास के जरिए जनहित याचिका दायर कर गोदावरी इस्पात को दिए गए माइनिंग लीज को निरस्त करने की मांग की है। याचिका की सुनवाई के दाैरान वन विभाग के अफसरों ने डिवीजन बेंच को बताया कि माइनिंग लीज वाले इलाके में कोई पेड़ नहीं है। जो बचे थे वह कंपनी के भारी वाहनों के चलने और वाहनों के चक्के के नीचे आने से दब गए हैं। डिवीजन बेंच ने वन विभाग को दोबारा जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। पीआईएल की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने दो सप्ताह की तिथि तय कर दी है।