Bilaspur High Court: RTE: स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव तलब, गाइड लाइन बनाने में हो रही देर पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, शपथ पत्र के साथ देना होगा जवाब
Bilaspur High Court: शिक्षा के अधिकार अधिनियम में बरती जा रही गड़बड़ी, प्ले स्कूलों की मनमानी व नियम बनाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने और व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया। कोर्ट ने गाइड लाइन बनाने में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई।
School Shiksha Vibhag Ke Sachiv Talab: बिलासपुर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम में बरती जा रही गड़बड़ी, प्ले स्कूलों की मनमानी व नियम बनाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने और व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया। याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 11 मार्च की तिथि तय कर दी है। गाइड लाइन बनाने में हो रहे विलंब को लेकर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश भी दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि हमें विश्वास है कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव स्वयं उपस्थित होंगे। वे जिलों के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के कामकाज की निगरानी करेंगे और उन्हें तैयार किए जाने वाले दिशा-निर्देशों के संबंध में नया हलफनामा दाखिल करना होगा। सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने 12 दिसंबर 2025 के डिवीजन बेंच के आदेश के अनुपालन में, अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया। शपथ पत्र में बताया है, सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 35 (2) के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया में है। अधिनियम, 2009 की धारा 35 की उपधारा 2 के प्रावधान के तहत, अधिनियम, 2009 की धारा 35 की उपधारा 2 के आदेश तथा इस न्यायालय के 12 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन हेतु उचित चरण में तत्परतापूर्वक दिशा-निर्देशों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
प्ले स्कूलों के लिए बना रहे नियामक दिशा निर्देश
इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की एक बैठक 05 जनवरी 2026 को रायपुर में आयोजित की गई थी और उन्होंने एनसीपीसीआर के प्ले स्कूलों के लिए नियामक दिशा निर्देशों, नई शिक्षा नीति, 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुरूप दिशा निर्देश तैयार करने का संकल्प लिया है। 05 जनवरी 2026 को आयोजित बैठक के कार्यवृत्त की एक प्रति संलग्न है।
शिकायतों का हो रहा निराकरण
दुर्ग जिले के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 12 जनवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है कि आरटीई पोर्टल पर प्राप्त कुल 183 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है और इस संबंध में एक सारणीबद्ध चार्ट तैयार किया गया है। दुर्ग जिले के लिए सारणीबद्ध चार्ट सहित 12 जनवरी 2026 के पत्र की प्रति संलग्न है।
रायपुर जिले के संबंध में आरटीई पोर्टल पर लगभग 157 शिकायतें प्राप्त हुईं और रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 06 जनवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है कि सभी शिकायतों का समाधान कर दिया गया है और 06 जनवरी 2026 के पत्र के साथ एक सारणीबद्ध चार्ट भी प्रदान किया गया है।
बिलासपुर जिले के संबंध में आरटीई पोर्टल पर लगभग 100 शिकायतें प्राप्त हुईं और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है कि 99 शिकायतों का समाधान हो चुका है, शेष एक शिकायत का समाधान होना बाकी है। आरटीई सर्वर में तकनीकी समस्याओं के कारण समस्या का समाधान नहीं हो सका। 13 जनवरी 2026 के पत्र के साथ एक सारणीबद्ध चार्ट भी संलग्न है। बिलासपुर जिले के लिए सारणीबद्ध चार्ट सहित दिनांक 13-01-2026 के पत्र की प्रति दस्तावेज़ संलग्न है। शपथ पत्र में जानकारी दी है कि राज्य सरकार ने कोर्ट के 12 दिसंबर 2025 के आदेश का पर्याप्त अनुपालन किया है। दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर जिलों में लंबित लगभग सभी शिकायतों का समाधान कर दिया गया है।
राज्य न्यायालय के 12 दिसबर 2025 के आदेश, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21ए, भारत के संविधान के अनुच्छेद 45, छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के प्रावधान, तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 35 के अनुसार दिशा-निर्देश तैयार करने के अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध है।
उपरोक्त उद्धृत हलफनामे के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि जिन दिशा-निर्देशों को तैयार किया जाना है, उनका अध्ययन संबंधित समिति द्वारा किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवर्षि ने कहा: शिकायतों का नहीं हुआ निराकरण
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने डिवीजन बेंच के समक्ष दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि आरटीई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों में से केवल उन्हीं शिकायतों का निपटारा किया गया है, जबकि जहां तक संबंधित सक्षम प्राधिकारी के संज्ञान में लाई गई व्यक्तिगत शिकायतों का संबंध है, वे अभी भी अनसुलझी हैं। अधिवक्ता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देशित किया कि उक्त आवेदनों पर भी विचार करें और उनका शीघ्रता से समाधान करवाएं।
अधिवक्ता तारेंद्र कुमार झा ने हस्तक्षेप याचिका दायर की है, जिसे रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इसमें यह उल्लेख किया गया है कि मध्यावधि में छात्रों के प्रवेश प्रमाण पत्रों और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के बिना ही रद्द कर दिए गए हैं। हस्तक्षेप याचिका से शिक्षा विभाग में चल रही कार्यवाही से स्पष्ट होता है कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है।
हस्तक्षेपकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष उपस्थित होने और विभाग को नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया।