Bilaspur High Court: हाई कोर्ट में आया अपनी तरह का अलग मामला, तलाक की डिक्री रद्द कराने दम्पति पहुंचे हाई कोर्ट, डीविजन बेंच का आया ऐसा फैसला

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाई कोर्ट में अपनी तरह का एक अलग ही मामला सामने आया। आमतौर पर फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पति या फिर पत्नी याचिका दायर करती हैं जिसमें फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की डिक्री देने से मना कर दिया जाता है। यहां मामला एकदम अलग और अहलदाहै। पढ़िए तलाक के बाद दम्पत्ति क्यो पहुंचे हाई कोर्ट। कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला।

Update: 2026-02-23 14:23 GMT

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बिलासपुर। 23 फरवरी 2026/ बिलासपुर हाई कोर्ट में अपनी तरह का एक अलग ही मामला सामने आया। आमतौर पर फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पति या फिर पत्नी याचिका दायर करती हैं जिसमें फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की डिक्री देने से मना कर दिया जाता है। यहां मामला एकदम अलग और अहलदाहै।

फैमिली कोर्ट द्वारा दिये गए तलाक की डिक्री को रद्द करने की मांग को लेकर पति पत्नी हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने याचिका को रद्द करते हुए कहा कि कानूनीतौर पर अब यह संभव नहीं है। आपसी सहमति के आधार पर तलाक की मंजूरी देते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पारित डिक्री को खारिज नहीं किया जा सकता।

तलाक के बाद रिश्तों में आई नरमी और आपसी समझदारी के चलते पति-पत्नी ने एक बार फिर साथ रहने का निर्णय लिया और इसी अमलीजामा पहनाने के लिए आपसी रजामंदी के बाद पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। दायर याचिका में बताया कि हम दाेनों के रिश्ते अब सामान्य हो गए हैं। हमने अपनी शादी की सालगिरह भी साथ-साथ मनाया है। साथ घुमने फिरने गए और होटल भी बुक कराया। रिश्तों में आई नरमी और साथ रहने का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक की डिक्री को रद्द करने की मांग की।

हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

याचिका की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने कहा कि तलाक पति-पत्नी के आपसी सहमति से हुआ है। लिहाजा अब अपील की कोई गुंजाइश नहीं है। बेंच ने यह भी कहा, कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों और प्रक्रियाओं से चलता है। बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।

पढ़िए क्या है मामला

बिलासपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाली महिला की शादी मोपका निवासी युवक से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच रिश्ते में कड़वाहट आई और साथ-साथ रहने के बजाय अलग रहने का निर्णय लिया। इसके बाद परिवार न्यायालय में तलाक के लिए अर्जी लगाई। आपसी सहमति के आधार पर परिवार न्यायालय ने तलाक की डिक्री पारित कर दी।

तलाक के बाद रिश्ते सुधरे

तलाक लेने के दो महीने बाद 11 मार्च से 15 मार्च 2025 तक मथुरा की यात्रा की।।पति पत्नी ने साथ-साथ रहने के कई कारण गिनाए, तलाक के बाद साथ बिताए पलों की तस्वीरें पेश की, साथ-साथ ट्रेन में यात्रा की टिकट के अलावा सालगिराह मनाने की तस्वीरें भी पेश की।

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