हाई कोर्ट ने खारिज की पति की याचिका: दूसरी शादी के आरोप के बाद भी पत्नी का भरण-पोषण अधिकार रहेगा कायम....
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कहा है, पत्नी पर दूसरी शादी या चूड़ी प्रथा से विवाह का आरोप लगाकर भरण-पोषण देने से पति इंकार नहीं कर सकता।
सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news
बिलासपुर।21 फरवरी 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, पत्नी पर दूसरी शादी या चूड़ी प्रथा से विवाह का आरोप लगाकर पति भरण-पोषण देने से इंकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने साफ कहा, जब तक इस तरह के आरोप ठोस सबूतों से साबित नहीं हो जाता, तब तक पत्नी का भरण-पोषण का अधिकार सुरक्षित रहेगा। फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए हाई कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने पत्नी को भरण-पोषण का आदेश याचिकाकर्ता पति को दिया है।
क्या है मामला?
जशपुर जिले में रहने वाले युवक की शादी उसी जिले की युवती के साथ 2009 में हुई थी। उनकी तीन बेटियां हैं। बेटी होने के बाद से पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। पति ने पत्नी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बाद में उसने किसी दूसरी महिला को पत्नी बनाकर रख लिया और शादीशुदा पत्नी को घर से बेदखल कर दिया।
पत्नी ने फैमिली कोर्ट में दायर की थी याचिका
पति द्वारा घर से निकालने के बाद परेशान महिला ने फैमिली कोर्ट में परिवाद पेश कर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भरण-पोषण दिलाने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी को भरण पोषण के लिए पति को आदेश दिया।
फैमिली कोर्ट के फैसले को पति ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
फैमिली कोर्ट फैसले को चुनौतीदेते हुए पति ने हाई कोर्ट में अपील पेश की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, उसकी पत्नी ने अपनी इच्छा से घर छोड़ा है। इसके बाद उसने बिहार में एक व्यक्ति के साथ चूड़ी प्रथा के जरिये विवाह कर लिया है। इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है।
हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा है कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी विवाह के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ही भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। लिहाजा फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। याचिका को खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले के अनुरूप गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है।