पंचायत विभाग में नियुक्ति: हाई कोर्ट ने इस यूनिवर्सिटी के आवेदकों की नियुक्ति पर लगाई अंतरिम रोक, UGC सहित आधा दर्जन विभाग को जारी किया नोटिस
Bilaspur High Court: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों पर हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के इस यूनिवर्सिटी के उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी है। पढ़िए क्या है मामला।
इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
बिलासपुर।21 फरवरी 2026| हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों पर ISBM यूनिवर्सिटी से PGDRD पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट करने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।
याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने ISBM यूनिवर्सिटी से PGDRD पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट करने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।
जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। हाई कोर्ट के कहा है कि आगामी सुनवाई तक उन उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं जिनके पास संबंधित यूनिवर्सिटी की यह डिग्री है।
क्या है मामला?
प्रियांशु दानी और अन्य सात अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है, आईएसबीएम यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जा रहा डिप्लोमा कोर्स निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता है। बताया कि इस संबंध में शिकायतों के बाद 16 सितंबर 2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति ने 9 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया है, आईएसबीएम यूनिवर्सिटी का पीजीडीआरडी पाठ्यक्रम अवैध है।
जांच रिपोर्ट में ये सब
रिपोर्ट के अनुसार यह प्रोग्राम यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस नंबर 57 के तहत संचालित किया जा रहा है, जो वास्तव में कॉमर्स और मैनेजमेंट फैकल्टी के डिप्लोमा कोर्स से संबंधित है, रूरल डेवलपमेंट से नहीं।
नियुक्तियों पर रोक लगाने याचिकाकर्ताओं की है मांग
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों में ISBM यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा डिग्री करने वालों की नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की गई है।
विभाग ने पाठ्यक्रम को माना है अमान्य
याचिकाकर्ताओं ने कहा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त से भी इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था। वहां भी समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पाठ्यक्रम को अमान्य माना गया है। याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार और अन्य का जवाब आने तक नियुक्तियों पर रोक लगाई जाए।
हाई कोर्ट ने इनको नोटिस जारी कर मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब पेश करने के लिए कोर्ट ने तीन का समय दिया है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में करने का निर्णय लिया है।