बिलासपुर नसबंदी कांड में आया फैसला; जिला कोर्ट ने सर्जन डॉ आरके गुप्ता को 2 साल की सजा और 25 हजार लगाया जुर्माना

Bilaspur High Court News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शाम होते होते नसबंदी के बाद पीड़ितों की हालत बिगड़ने से हड़कम्प मच गया, सिम्स, जिला अस्पताल और आपोलो में 100 से अधिक महिलाओ को भर्ती कराना पड़ा, जिनमे से 15 महिलाओ की मौत हो गई।

Update: 2026-03-17 15:55 GMT

Bilaspur High Court News: बिलासपुर। 11 साल 4 माह बाद बिलासपुर का चर्चित नसबंदी कांड में हुई 15 मौतों के मामले में जिला अदालत का फैसला आ गया है। एडीजे शैलेश कुमार ने सर्जन डॉ आरके गुप्ता को 3 घण्टे में 83 ऑपरेशन करने के मामले में 2 साल की सजा और 25 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।

उस समय चर्चा में रहे सिप्रोसिन में चूहामार दवाई मामले में साक्ष्य के अभाव ने कविता और महावर फार्मा के 5 आरोपियों को दोषमुक्ति का आदेश दिया है।

गत नवम्बर 2014 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शाम होते होते नसबंदी के बाद पीड़ितों की हालत बिगड़ने से हड़कम्प मच गया, सिम्स, जिला अस्पताल और आपोलो में 100 से अधिक महिलाओ को भर्ती कराना पड़ा, जिनमे से 15 महिलाओ की मौत हो गई। इस सरकारी नसबंदी में किसी की माँ, तो किसी के बेटी- बहुओं की मौत की खबरें आई, उसके बाद कभी ऑपरेशन में लापरवाही के कारण सेप्टीसीमिया होने तो कभी महिलाओ को ऑपरेशन के बाद दी गई दवा सिप्रोसिन में चूहामार ( जिंक फास्फाइड) मिले होने को लेकर बयानबाजी हुई।

मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने जिला हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जन डॉ आरके गुप्ता दवा सप्लाई के मामले में महावर फार्मा के संचालक रमेश महावर, सुमित महावर और कविता फार्मासिटिक्ल के राकेश खरे, राजेश और मनीष खरे के खिलाफ कार्रवाई कर चालान कोर्ट में प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायधीश फर्स्ट एडीजे शैलेश कुमार ने धारा 304 (ए)

गैरइरादतन हत्या के मामले में आरोपी सर्जन डॉ आरके गुप्ता को 2 साल के कैद और 25 हजार रुपये के जुर्माने, धारा 337 के तहत 6 माह और 500 रुपये के जुर्माने व धारा 379 के तहत 1 माह की सजा से दंडित करने का आदेश दिया। वहीं साक्ष्य के अभाव में महावर फार्मा के संचालक रमेश महावर, सुमित महावर और कविता फार्मासिटिक्ल के राकेश खरे, राजेश और मनीष खरे को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।

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