आवारा कुत्तों का खौफ: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाई कोर्ट में होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रख लिया है सुरक्षित

Bilaspur High Court: सड़कों पर आवारा मवेशियों के समुचित प्रबंधन और इसके चलते हो रही दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दाैरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का इंतजार है, जिसमें शीर्ष अदालत ने आवारा कुत्तों के खौफ को लेकर स्वत: संज्ञान वाली याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में सुनवाई होगी।

Update: 2026-03-24 08:46 GMT

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बिलासपुर।24 मार्च 2026| सड़कों पर आवारा मवेशियों के समुचित प्रबंधन और इसके चलते हो रही दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दाैरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का इंतजार है, जिसमें शीर्ष अदालत ने आवारा कुत्तों के खौफ को लेकर स्वत: संज्ञान वाली याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। आवारा पशुओं के समुचित प्रबंधन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने मई महीने में तय की है।

NHAI ने दिया था ये सुझाव

छत्तीसगढ़ की सड़कों पर बढ़ते आवारा मवेशियों को लेकर संजय रजक और राजेश चिंकारा ने अलग-अलग जनहित याचिका पेश की है। हाई कोर्ट ने सड़कों पर पशुओं के कारण हो रही दुर्घटनाएं और वाहनों द्वारा मवेशियों के कुचले जाने को लेकर भी संज्ञान लिया है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान NHAI के वकील ने यह सुझाव दिया था, पशुओं पर एक टेग लगाकर उनके मालिक और इस बारे में पूरी जानकारी का उल्लेख किया जा सकता है। इसके बाद स्थानीय निकायों ने इस दिशा में काम करने की बात कही थी।

हाई कोर्ट ने जताई थी नाराजगी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने दी थी हिदायत

इससे पूर्व सुनवाई में हादसों पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अफसरों से कहा था, आप लोग योजनाएं और ड्राफ्ट बनाते हैं, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू कौन कर रहा है? सड़कें अंधेरे में डूबी हैं, हादसे बढ़ रहे हैं और सिर्फ रिपोर्ट भरकर खानापूर्ति की जा रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए, क्योंकि योजनाओं की घोषणा तब तक बेकार है जब तक सड़क पर हादसे नहीं रुकते।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

विभिन्न याचिकाओं और संशोधन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों और स्टेकहोल्डर्स को एक सप्ताह में लिखित जवाब जमा करने को कहा है। मुख्य विवाद यह है, आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए या उन्हें नसबंदी (एबीसी रूल्स 2023) के बाद वापस छोड़ने के बीच संतुलन बनाने का है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी रहेगी , स्कूल, अस्पतालों, और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। मामले में अंतिम फैसला आने तक, नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार सार्वजनिक संस्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह हिदायत

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों से नागरिकों की सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन पर जोर दिया है। अगस्त 2025 के उस आदेश में संशोधन की मांग की गई है, जिसमें पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर में रखने की बात कही गई थी। कोर्ट ने पहले आक्रामक और बीमार कुत्तों को शेल्टर में रखने का निर्देश दिया था। एनएचएआई को राजमार्गों से आवारा जानवरों को हटाने और सड़कों की फेंसिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। पशु कल्याण बोर्ड को एनजीओ के पशु आश्रय या नसबंदी केंद्रों के आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।

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