Raipur Police Commissioner: पुलिस कमिश्नर के एरिया में कोई चेंज नहीं, आज देर रात या कल दोपहर तक जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन, पुलिस कमिश्नर की पोस्टिंग भी
Raipur Police Commissioner: रायपुर पुलिस कमिश्नर के एरिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। जिस रूप में 31 दिसंबर के कैबिनेट में इसका ड्राफ्ट पारित हुआ था, उसी स्वरूप में इसे लागू किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक को लेकर आज लोगों की बड़ी उत्सुकता थी मगर वहां इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।
Raipur Police Commissioner: रायपुर। बीते शुक्रवार को रायपुर पुलिस कमिश्नर का नोटिफिकेशन जारी होने से ऐन पहले गृह मंत्री विजय शर्मा ने गृह विभाग के अधिकारियों को फोन कर नोटिफिकेशन रुकवा दिया था। इसके बाद सरकार ने भी कहा था कि फिलहाल नोटिफिकेशन न जारी किया जाए, इसमें कुछ बदलाव किया जाएगा। मगर 24 घंटे के भीतर परदे के पीछे शह-मात का खेल चला और आखिरकार ये तय हुआ कि रायपुर पुलिस कमिश्नर सिस्टम उसी स्वरूप में लागू किया जाएगा, जिसे 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में पारित किया गया था।
दरअसल, आज कैबिनेट में इसके एरिया का विस्तार कर पूरे रायपुर जिले को शामिल करने की चर्चा थी। मगर कल देर शाम तक जब कैबिनेट के एजेंडा में इसे शामिल नहीं किया गया तो लोगों के कान ख़ड़े हुए। फिर ऐसा समझा गया कि गृह मंत्री दिल्ली में हैं, इसलिए उसे एजेंडा में शामिल नहीं किया गया होगा। हो सकता है बिना एजेंडा के इस पर चर्चा होकर एरिया में बदलाव करने का फैसला हो जाए। मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं।
एनपीजी न्यूज को अभी-अभी पता चला है रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा, मगर उसके एरिया में कोई चेंज नहीं होगा। याने नवा रायपुर, माना एयरपोर्ट, उरला, सिलतरा के आाउटर एरिया इसमें शामिल नहीं होंगे। उसे रायपुर ग्रामीण में ही रखा जाएगा।
आज रात या कल सुबह नोटिफिकेशन
सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्री विजय शर्मा के फोन आने के बाद गृह मंत्रालय ने ऐन वक्त पर नोटिफिकेशन को राजपत्र में प्रकाशित होने से रोक दिया था। सरकार के निर्देश पर उसे अब फिर से प्रकाशित करने के लिए भेज दिया गया है। आज रात तक या कल सुबह नोटिफिकेश्न जारी हो जाएगा।
कल पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति
नोटिफिकेशन के बाद कल पुलिस कमिश्नर और ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर समेत सभी नियुक्तियांं का आदेश जारी हो जाएगा। हालांकि, नोटिफिकेशन अगर पहले जारी हो जाता तो पुलिस कमिश्नर की जगह ओएसडी की नियुक्ति की जाती। मगर अब टाईम नहीं है, इसलिए सीधे अब पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति की जाएगी।
रामगोपाल गर्ग और लाल उमेद
एनपीजी न्यूज ने दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग को फर्स्ट पुलिस कमिश्नर और रायपुर के एसएसपी लाल उमेद सिंह को ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बनाने की खबर सबसे पहले प्रकाशित किया था। रामगोपाल गर्ग पुलिस कमिश्नर की दौड़ में आज भी आगे चल रहे हैं। लाल उमेद सिंह का भी कंटीन्यू करना लगभग तय माना जा रहा है। कल इन दोनों अधिकारियों का आदेश निकल जाएगा। कल इसलिए कि अगले दिन 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होना है।
रायपुर में बैठेंगे अब 7 IPS
इस समय रायपुर में आईजी और एसएसपी को मिलाकर दो आईपीएस लॉ एंड आर्डर संभाल रहे हैं। मगर पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अब आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। इसी तरह राज्य पुलिस सेवा के भी करीब दर्जन भर अफसरों को अपराधों पर अंकुश लगाने पोस्ट किया जाएगा।
ऐसा होगा सेटअप
1. पुलिस कमिशनर-इसे सामान्य बोलचाल में सीपी कहा जाता है।
2. संयुक्त आयुक्त-ज्वाइंट सीपी
3. अपर आयुक्त-एडिशनल सीपी
4. डिप्टी कमिशनर-डीसीपी
5. सहायक आयुक्त-एसीपी
अंग्रेजी शासन काल से पुलिस कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर सिस्टम अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। आजादी के पहले कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे देश के तीन महानगरों में लॉ एंड आर्डर को कंट्रोल करने के लिए अंग्रेजों ने वहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रभावशील कर रखा था। आजादी के बाद देश को यह वीरासत में मिली। चूकि बड़े महानगरों में अपराध बड़े स्तर पर होते हैं, इसलिए पुलिस को पावर देना जरूरी समझा गया। लिहाजा, अंग्रेजों की व्यवस्था आजाद भारत में भी बड़े शहरों में लागू रही। बल्कि पुलिस अधिनियम 1861 के तहत लागू पुलिस कमिश्नर सिस्टम को और राज्यों में भी प्रभावशील किया गया।
कमिश्नर को दंडाधिकारी पावर
वर्तमान सिस्टम में राज्य पुलिस के पास कोई अधिकार नहीं होते। उसे छोटी-छोटी कार्रवाइयों के लिए कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार, नायब तहसीलदारों का मुंह ताकना पड़ता है। दरअसल, भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के धारा 4 में जिले के कलेक्टरों को जिला दंडाधिकारी का अधिकार दिया गया है। इसके जरिये पुलिस उसके नियंत्रण में होती है। बिना डीएम के आदेश के पुलिस कुछ नहीं कर सकती। सिवाए एफआईआर करने के। इसके अलावा पुलिस अधिनियम 1861 में कलेक्टरों को सीआरपीसी के तहत कई अधिकार दिए गए हैं। पुलिस को अगर लाठी चार्ज करना होगा तो बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के वह नहीं कर सकती। कोई जुलूस, धरना की इजाजत भी कलेक्टर देते हैं। प्रतिबंधात्मक धाराओं में जमानत देने का अधिकार भी जिला मजिस्ट्रेट में समाहित होता है। कलेक्टर के नीचे एडीएम, एसडीएम या तहसीलदार इन धाराओं में जमानत देते हैं।
तत्काल फैसला लेने का अधिकार
महानगरों या बड़े शहरों में अपराध भी उच्च स्तर का होता है। उसके लिए पुलिस के पास न बड़ी टीम चाहिए बल्कि अपराधियों से निबटने के लिए अधिकार की भी जरूरत पड़ती है। धरना, प्रदर्शन के दौरान कई बार भीड़े उत्तेजित या हिंसक हो जाती है। पुलिस के पास कोई अधिकार होते नहीं, इसलिए उसे कलेक्टर से कार्रवाई से पहले इजाजत मांगनी पड़ती है। पुलिस कमिश्नर लागू हो जाने के बाद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि पुलिस विषम परिस्थितियों में तत्काल फैसला ले सकती है। हालांकि, इससे पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।