Raipur Police Commissioner: कुछ देर में नोटिफिकेशन...पुलिस कमिश्नर को शस्त्र लाइसेंस और एक्साइज के नहीं मिलेंगे पाॅवर, पढ़िये क्या होंगे अधिकार
Raipur Police Commissioner: अब से कुछ देर में रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने का नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। पुलिस कमिश्नर को शस्त्र लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं मिलेगा। इसी तरह आबकारी के पावर भी नहीं होंगे। पढ़िये पुलिस कमिश्नर के पास कौन-कौन से होंगे अधिकार।
Raipur Police Commissioner: रायपुर। रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर लागू होने के लिए जारी होने वाली अधिसूचना को विधि विभाग से हरी झंडी मिल गई है। गृह विभाग से ओके होने के आज शाम तक नोटिफिकेशन जारी हो जाएगी।
रायपुर के लागू होने वाली पुलिस कमिश्नरी प्रणाली में कमिश्नर को 16 महत्वपूर्ण अधिकारों से लैस किया जाएगा। आमतौर पर देश के जिन राज्यों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हैं वहां ये अधिकार कमिश्नर को दिए जाते हैं। धरना प्रदर्शन की अनुमति देना, एनएसए के अधिकार अब कमिश्नर के पास सुरक्षित रहेंगे। पर इसमें शस्त्र और आबकारी लायसेंस के अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास नहीं होंगे।
पढ़िए क्या-क्या अधिकार रहेंगे पुलिस कमिश्नर के पास।
1. कैदी अधिनियम, 1900 : कैदियों को पैरोल पर रिहा करने का अधिकार कमिश्नर को मिलने वाला है। जेल में बंद कैदियों को बीमारी या फिर पारिवारिक कारणों की वजह से अल्प समय के लिए पैरोल पर रिहा करने का अधिकार रहेगा।
2. छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, 2007ः धरना प्रदर्शन, जुलूस निकालने, सभा के लिए अनुमति देने के अलावा धारा 144 लागू करने का अधिकार।
3. विष अधिनियम, 1919: अवैध रूप से जहर का रखने या फिर चोरी-छिपे बेचे जाने की शिकायत मिलने पर तलाशी वारंट जारी करने का अधिकार अब कमिश्नर के पास सुरक्षित रहेगा। पहले ये अधिकार कलेक्टर के पास रहता था।
4. जेल अधिनियम, 1894: जेल की सुरक्षा से लेकर जेल के भीतर की अव्यवस्था व अमानवीय व्यवहार जैसी शिकायतों पर सीधी कार्रवाई कर सकेंगे।
5. अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, 1956: देह व्यापार से जुड़े मामलों की जांच का अधिकार कमिश्नर के पास रहेगा। छापामार कार्रवाई का आदेश जारी करने से लेकर जांच का आदेश भी जारी कर सकेंगे।
6. गैरकानूनी गतिविधि, 1967: गैर कानूनी संगठन से जुड़ी किसी स्थल को केंद्र सरकार द्वारा गैरकानूनी घोषित करने की स्थिति में संबंधित स्थल की जमीन, मकान,सामान का प्रबंधन का अधिकार कमिश्नर का रहेगा।
7. राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990: जिला बदर की कार्रवाई का अधिकार अब कमिश्नर के पास रहेगा। असामाजिक तत्वों या अपराधियों के जिला बदर की कार्रवाई अब कमिश्नर करेंगे।
8. मोटर वाहन अधिनियम, 1988: यातायात व्यवस्था को लेकर सीधेतौर पर मानिटरिंग और निगरानी का अधिकार रहेगा। पुलिस कमिश्नर यह तय करेंगे कि कौन सा वाहन कहां चलेगा, पार्किंग कहां होगी, वाहनों की रफ्तार कितनी होगी। भारी वाहनों की एंट्री को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार भी रहेगा।
9. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), 1980: देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा, प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति पर बिना मुकदमा चलाए कुछ समय के लिए जेल में निरद्ध करने का आदेश जारी कर सकेंगे।
10. पुलिस में असंतोष फैलाने का अधिनियम, 1922: पुलिस को अपना काम करने से रोकने की स्थिति में अब सीधे कार्रवाई कर सकेंगे। कलेक्टर से अनुमति लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
11. ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923: जासूसी की आशंका होने पर संवेदनशील इलाकों की जानकारी जुटाने, तलाशी लेने और गोपनीय दस्तावेजों की पड़ताल का आदेश कमिश्नर देंगे।
12. देशद्रोही सभा रोकथाम अधिनियम, 1911: सरकार के खिलाफ आयोजित की जाने वाली सभा जिसमें हिंसा फैलाने की आशंका हो, सभा से पहले ही इस पर रोक लगाने का आदेश जारी कर सकेंगे।
13. सिनेमा अधिनियम, 1952: सिनेमा हॉल खोलने और अशांति की शिकायत पर शो को बीच में रोकने का रहेगा अधिकार।
14. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960: पशुओं पर अत्याचार की सूचना या शिकायत मिलने पर सीधे कार्रवाई कर सकेंगे।
15. पेट्रोलियम अधिनियम, 1934: पेट्रोलियम पदार्थों से जुड़े लाइसेंस, भंडारण,परिवहन व नियंत्रण के अलावा हादसा होने की स्थिति में जांच का आदेश जारी कर सकेंगे।
16. विस्फोटक अधिनियम, 1884: विस्फोटकों के निर्माण के अलावा भंडारण, परिवहन और उपयोग की अनुमति देने का अधिकार।