आईआईटीयन आईपीएस....जिसने लंदन व जापान में एक करोड़ पैकेज के बैंकर की नौकरी छोडी, और अब महिला बैंकर के मामले में हुआ एफआईआर
रायपुर, 3 नवंबर 2021। आज हम आपको एक एसे आईआईटियन आईपीएस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपनी योग्यता के बल पर लंदन व जापान में एक करोड़ के पैकेज में बैंकर की नौकरी की। फिर भारत आ कर दो बार यूपीएससी निकाल कर आईपीएस के लिये सलेक्ट हुए। पर अब एक महिला बैंकर के आत्महत्या के प्रकरण में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के केस में आरोपी बन कर फरार चल रहे हैं। हम बात कर रहे हैं लखनऊ एसएसएफ में एसपी की पोस्ट पर तैनात 2012 बैच के आईपीएस आशीष तिवारी की।
यूपी के अयोध्या में पीएनबी की मुख्य शाखा ख़्वासपुरा में तैनात असिस्टेंट मैनेजर श्रद्धा गुप्ता (30) ने आत्महत्या कर ली। उनका शव कमरे में फांसी के फंदे पर लटका मिला। मकान मालिक की सूचना पर पहुंची पुलिस को उसके कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जिसमे अपनी मौत का जिम्मेदार अयोध्या के पूर्व एसएसपी आशीष तिवारी समेत तीन लोगों को बताया है। बता दें कि मृतका श्रद्धा गुप्ता मूल रूप से लखनऊ के राजाजीपुरम की रहने वाली है। और वह करीब छह साल से अयोध्या में तैनात थी।
इन्हें ठहराया अपनी मौत का जिम्मेदार
वहीं, मौके पर पुलिस को पापा-मम्मी को संबोधित अंग्रेजी में लिखा एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। जिसमें उसने आशीष तिवारी (एसएसएफ हेड लखनऊ) विवेक गुप्ता व अनिल रावत (पुलिस फैजाबाद) को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। इनमें आशीष तिवारी पूर्व में अयोध्या जनपद के एसएसपी रहे हैं। जानकारी के मुताबिक श्रद्धा 2015 में पीएनबी की शाखा में बतौर क्लर्क ज्वाइन किया था। प्रमोशन के बाद श्रद्धा को बछड़ा सुलतानपुर स्थित बैंक की मुख्य की शाखा में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर भेजा गया था। उसने बैंक के सामने विष्णु एंड कंपनी बिल्डिंग में किराए पर कमरा ले रखा था। श्रद्धा यहां शुरू से ही अकेली रहती थी।
सुसाइड नोट को भेजा गया फोरेंसिक विभाग
एसएसपी अयोध्या शैलेष पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि सुसाइड नोट को जांच के लिए फोरेंसिक विभाग भेज दिया गया है। जांच के बाद व परिवारीजनों से पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक दूध वाले ने श्रद्धा के कमरे का दरवाजा खटखटाया। कोई भी आवाज न आने पर उसने मकान मालिक को सूचित किया। मकान मालिक ने भी काफी देर तक प्रयास किया जब दरवाजा नहीं खोला गया तो साइड की खिड़की से झांका तो देखा कि श्रद्धा दुपट्टे के सहारे फंदे पर लटकी हुई थी। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी।
क्या लिखा था सोसाईड नोट में
पापा-मम्मी मेरे सुसाइड की वजह विवेक गुप्ता, आशीष तिवारी (एसएसएफ हेड) और अनिल रावत (पुलिस फैजाबाद) ये तीन हैं। आई एम सॉरी... श्रद्धा ।
आशीष तिवारी 2007 में कैंपस सलेक्शन के दौरान लंदन की लेहमैन ब्रदर्स कंपनी में सलेक्ट हुए, जहां उन्होंने डेढ़ साल काम किया। इसके बाद उन्होंने जापान के नोमुरा बैंक में डेढ़ साल जॉब की। दोनों बैंकों में एक्सपर्ट एनालिस्ट पैनल में उनका सलेक्शन हुआ था।
इंडिया लौटकर की सिविल सर्विस की तैयारी
2010 में आशीष ने वापस इंडिया आकर सिविल सर्विस की तैयारी की और 2011 में आईआरएस इनकम टैक्स में उनका सिलेक्शन हुआ। इसमें उन्हें 330 वीं रैंक मिली। इसके बाद 2012 में उनका आईपीएस में सलेक्शन हुआ। इसमें उन्होंने 219वीं रैंक हासिल की। 2013 में उनका आईपीएस ट्रेनिंग के दौरान एक बार फिर आईपीएस में सलेक्शन हुआ और उन्हें 247वीं रैंक मिली।