51 मिनट चली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने केस वाराणसी कोर्ट को किया रिफर...

Update: 2022-05-20 14:38 GMT

नई दिल्ली 20 मई 2022। ज्ञानव्यापी मस्जिद पर सुनवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी जिला अदालत को सौप दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिला जज 8 हफ्ते में सुनवाई पूरी करेंगे। इस दौरान व्यवस्थाएं बनाने के लिये पूर्व में जारी किए गए अंतरिम आदेश भी लागू रहेंगे। वाराणसी के कलेक्टर को मस्जिद में वजू की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए हैं।

ज्ञानव्यापी मस्जिद में हिन्दू देवी देवताओं के अंश होने पर पूजा अर्चना की अनुमति देने के लिये वराणसी सिविल कोर्ट में वाद दायर किया गया था। जिस पर कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट गया था।

सुप्रीम कोर्ट में 17 मई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि शिवलिंग वाले हिस्से को सरंक्षित किया जाए। मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने से न रोका जाए व 20 मुस्लिमों को नमाज पढ़ने वाले आदेश पर भी कोर्ट ने रोक लगाई थी।

आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चन्द्रचूर्ण, जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जस्टिस सूर्यकांत की बेंच में सुनवाई हुई। हिन्दू पक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि प्रापर्टी का धार्मिक चरित्र देखना होगा। उसके लिये कमीशन की रिपोर्ट देखनी होगी। जो ट्रायल कोर्ट को देखने दिया जाए। जिस पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कमीशन की नियुक्ति से लेकर अब तक के जारी किए गए सारे आदेश गैरकानूनी हैं लिहाजा उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति आयोग की नियुक्ति पर थी।।उनका कहना था कि हिन्दू पक्ष एसी जगह को सील करवाने में कामयाब हो रहे हैं जिसका इस्तेमाल मुस्लिम पक्ष 500 सालों से करता आया है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि 15 अगस्त 1947 की स्थिति में ज्ञानव्यापी मस्जिद में कोई विवाद नही था लिहाजा लोवर कोर्ट का फैसला सही है।

मुस्लिम पक्षक वकील ने कहा कि इस मामले का असर दूरगामी हो सकता है। जब तक आवेदन पर फैसला नही होगा कि जमीन पर क्या होगा? आपको देखना होगा कि इस मामले का इस्तेमाल देश के 4-5 मस्जिदों के लिए हो रहा है, इससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। जिस पर अदालत ने जमीन पर शांति बनाए रखने म लिए आदेश में किसी बदलाव का सुझाव मांगा। जिस पर मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के सर्वे करने को सही ठहराने के आदेश को गलत बताते हुए 1991 का एक्ट देखने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम देश मे एकता बनाये रखने के लिए सँयुक्त मिशन पर हैं। हमारा आदेश कुछ हद तक शांति व्यवस्था बनाये रखने का है। जटिल समाजिक समस्याएं सुलझाने के लिए किसी इंसान का सुझाया हल परफेक्ट नही हो सकता। लिहाजा इस मामले को वाराणसी के जिला जज सुने हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हम ट्रायल जज के ऊपर सवाल नही उठा रहे हैं पर इस तरह के मामलों में अनुभवी व्यक्ति बेहतर होते हैं और जिला जज के पास कम से कम 25 वर्ष का अनुभव होता है।

मुस्लिम पक्ष के द्वारा अदालत से मांग की गई कि दूसरा पक्ष को निर्देश जारी किए जाए कि जानबूझ कर चीजें प्रेस में लीक न करे। रिपोर्ट लीक होने पर अदालत ने नाराजगी जताई साथ ही भविष्य में इस पर रोक लगाने की चेतावनी दी।

मुस्लिम पक्ष ने बताया कि फिलहाल नमाज की अनुमति तो है जो इलाका वजू के लिए इस्तेमाल होता था वह पूरा एरिया सील कर दिया गया है और सभी तरफ पुलिस व लोहे के गेट हैं। यथास्थिति बदल दी गयी हैं। इस पर अदालत ने वराणसी के कलेक्टर को वजू की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही वराणसी जिला कोर्ट को मामला सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया। अगले 8 हफ़्तों तक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार वराणसी की जिला अदालत 23 मई को शिवलिंग की पूजा की अनुमति की याचिका पर सुनवाई करेगा।

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