Chief Election Commissioner TN Seshan: जानिए देश के एक ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त को, जिन्होंने चुनाव आयोग को बेहद शक्तिशाली बना दिया...

Chief Election commissioner TN seshan: टीएन शेषन देश के दसवें चुनाव आयुक्त थे। अपने 6 सालों के कार्यकाल में उन्होंने चुनाव आयोग को काफी शक्तिशाली बनाया और कई सुधार कार्य किए।

Update: 2024-05-07 16:20 GMT

Chief Election Commissioner TN seshan

Chief Election Commissioner TN seshan: टीएन शेषन देश के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उनका कार्यकाल 10 दिसंबर 1990 से 12 दिसंबर 1996 तक रहा। इन 6 वर्षों के कार्यकाल में चुनाव आयोग को देश में टीएस शेषन ने इतना सशक्त व ताकतवर बना दिया कि शेषन देश में चुनाव आयोग के चेहरा बन गए। उनके समय चुनाव आयोग में कई बदलाव हुए और देश को एक नया चुनाव आयोग व सख्त चुनाव आयुक्त देखने को मिला। पहले जनता में धारणा बन गई थी कि चुनाव सरकार ही करवाती है। पर शेषन के कार्यकाल में लोगो को चुनाव आयोग की महत्ता व शक्ति का पता चला। आइए पहले जानते है टीएन शेषन है कौन?

जानिए कौन हैं टीएन शेषन?

टीएन शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था। उनका पूरा नाम तिरुनेलै नारायण अय्यर शेषन था। टीएन शेषन तमिलनाडु कैडर के 1955 बैच के आईएएस ऑफिसर थे। वे विभिन्न पदों पर रहने के बाद 27 मार्च 1989 से 23 दिसंबर 1989 तक भारत के 18 वें कैबिनेट सचिव रहे थे। 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहें। वे भारत के पहले ऐसे चुनाव आयुक्त रहें जिन्होने 6 साल का कार्यकाल पूरा किया।

जानिए चुनाव आयोग को पारदर्शी बना कैसे बनाया इतना पावरफुल:–

टीएन शेषन ने चुनाव आयुक्त रहते चुनाव आयोग में कई बदलाव किया। जिसमें उन्होंने चुनाव खर्च की सीमा तय करने के साथ ही प्रत्याशियों को जांच के लिए लेखा-जोखा देने का प्रावधान भी लागू किया। धर्म के नाम पर चुनाव लड़ने पर शेषन ने प्रतिबंध लगाया। साथ ही चुनाव के दौरान शराब बाटने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। आज हम वोटिंग से पहले शराब दुकानों को बंद करने का जो आदेश देखते हैं वह शेषन के समय ही शुरू हुआ।

पूर्व में चुनाव में पहचान पत्रों की व्यवस्था नहीं थी। भारत में मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत टीएन शेषन ने अपने कार्यकाल में शुरू करवाई। उन्होंने अपने कार्यकाल में बोगस वोटिंग पर भी विराम लगा दिया। शेषन ने वोटो की खरीद– फरोख्त पर सख्त कार्यवाही की। बूथ कैप्चरिंग रोकने व स्थानीय बाहुबलियों के चुनाव में प्रभाव को रोकने के लिए पोलिंग बूथों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती की। चुनाव में अर्धसैनिक बलों की तैनाती चुनाव सुधारों की दिशा में शेषन का महत्वपूर्ण कदम था।

चुनाव खर्च की सीमा तय करना शेषन का ही कदम था। शेषन ने चुनावी प्रक्रिया में 100 से अधिक गड़बड़ियों को पहचान कर सुधार किया। चुनाव आयोग के द्वारा निष्पक्ष होकर चुनाव करवाने और गड़बड़ी करने वाले अफसरों व कर्मियों पर कार्यवाही करने के अलावा गड़बड़ी करने वाले राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों को बैन करने की परिपाटी भी शेषन ने ही शुरू की।

इन कदमों के चलते चुनाव आयोग काफी शक्तिशाली बना। टीएन शेषन को 1996 में मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित भी किया है। 1997 में राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा पर केआर नारायणन से हार गए। 10 नवंबर 2019 को टीएन शेषन का निधन हो गया।

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