ब्रेकिंग : पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन….अस्पताल में पिछले कई दिनों से थे भर्ती….89 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Update: 2021-08-21 10:52 GMT

लखनऊ 21 अगस्त 2021। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नहीं रहे। अब से कुछ देर पहले उन्होंने लखनऊ के SGPGI अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। भाजपा में हिंदुत्व का बड़ा चेहरा रहे कल्याण सिंह की अयोध्या राम मंदिर की वजह से अलग पहचान रही।वे दो बार यूपी के सीएम रहे और राज्यपाल भी रहे. वे ऐसे नेता थे जिन्होंने बीजेपी को हाशिए से फलक तक पहुंचाने का काम किया.

अयोध्या राममंदिर को लेकर शुरू से ही जुड़े रहे कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में ही बाबरी मस्जिद विध्वंस किया गया था। कल्याण सिंह पिछले कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, मल्टी आर्गन फेल्योर होने की वजह से उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। क्रिटिकल केयर मेडिसिन, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और एंडॉक्रिनलॉजी के वरिष्ठ डॉक्टर कल्याण सिंह की तबीयत पर लगातार नजर बनाए हुए थे, हालांकि कल्याण सिंह की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम यानी की वेंटिलेटर और डायलिसिस पर रखा गया था।

 

कल्याण सिंह के बारे में जानिये

कल्याण सिंह का जन्म 6 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था! कल्याण सिंह के 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कई बार अतरौली के विधानसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे और साथ ही साथ ये उत्तर प्रदेश में लोक सभा सांसद और राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। पहली बार कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्ष 1991 में बने और दूसरी बार यह वर्ष 1997 में मुख्यमंत्री बने थे। ये प्रदेश के प्रमुख राजनैतिक चेहरों में एक इसलिए माने जाते हैं, क्यूंकि इनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही बाबरी मस्जिद की घटना घटी थी। वो जून 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया।वो 1993 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अत्रौली और कासगंज से विधायक निर्वाचित हुये। चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरा लेकिन मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी ने गठबन्धन सरकार बनायी। विधान सभा में कल्याण सिंह विपक्ष के नेता बने थे।वो सितम्बर 1997 से नवम्बर 1999 तक पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।21 अक्टूबर 1997 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के सम्पर्क में थे और उन्होंने तुरन्त शीघ्रता से नयी पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का घटन किया और 21 विधायकों का समर्थन दिलाया। इसके लिए उन्होंने नरेश अग्रवाल को ऊर्जा विभाग का कार्यभार सौंपा। दिसम्बर 1999 में कल्याण सिंह ने पार्टी छोड़ दी और जनवरी 2004 में पुनः भाजपा से जुड़े। 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलन्दशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 में उन्होंने पुनः भाजपा को छोड़ दिया और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये।

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