Land For Job Case: लैंड फॉर जॉब केस: लालू परिवार पर आरोप तय, कोर्ट ने कहा- 'रेलवे को अपनी जागीर की तरह इस्तेमाल किया
Land for Job Case: जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय करने का आदेश दिया है।
Land for Job Case: जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय करने का आदेश दिया है।
'एक अपराधी सिंडिकेट की तरह किया काम'
विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपना फैसला सुनाते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, "प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक 'क्रिमिनल सिंडिकेट' की तरह काम किया। उन्होंने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर (Personal Fiefdom) समझ लिया था, जहाँ सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल परिवार के लिए जमीन हड़पने के सौदे के रूप में किया गया।"
बरी करने की याचिका खारिज
अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार द्वारा दायर की गई 'डिस्चार्ज याचिका' (बरी करने की मांग) को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों से एक बड़ी साजिश का पता चलता है, जिसमें रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले पटना और अन्य जगहों पर बेशकीमती जमीनें यादव परिवार के सदस्यों के नाम करवाई गईं।
मामले की मुख्य बातें
आरोप तय: कुल 98 जीवित आरोपियों में से 46 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, जबकि सबूतों के अभाव में 52 को बरी कर दिया गया है।
सजा का प्रावधान: लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और परिवार पर धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश (IPC) की धाराओं के तहत मामला चलेगा।
अगली तारीख: औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए अदालत ने 23 जनवरी (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 29 जनवरी) की तारीख तय की है।
क्या है घोटाला?
यह मामला 2004-2009 का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि बिना किसी विज्ञापन के रेलवे में नियुक्तियां की गईं और बदले में उम्मीदवारों से औने-पौने दामों पर जमीन लिखवाई गई। "सार्वजनिक रोजगार को निजी संपत्ति बनाने के लिए सौदेबाजी का हथियार बनाया गया।" — कोर्ट की टिप्पणी