IAS Nilesh Deore Vivad : चार्टर प्लेन, सियासत और जाति का पेच : कौन हैं IAS निलेश देवरे, जिनके सफर पर बिहार विधानसभा में मचा है बवाल?

IAS Nilesh Deore Vivad : बिहार के आईएएस अफसर निलेश रामचंद्र देवरे की एक चार्टर प्लेन यात्रा ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है. विपक्ष का आरोप है कि एक सरकारी अधिकारी अपने परिवार के साथ लाखों के निजी विमान में कैसे सफर कर सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री के खाली लौट रहे विमान का उपयोग कर उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया. अब यह प्रशासनिक मुद्दा दलित बनाम पिछड़ा की सियासी जंग में तब्दील हो गया है.

Update: 2026-02-18 11:23 GMT

IAS Nilesh Deore Vivad : चार्टर प्लेन, सियासत और जाति का पेच : कौन हैं IAS निलेश देवरे, जिनके सफर पर बिहार विधानसभा में मचा है बवाल?

IAS Nilesh Deore Charter Plane Controversy : पटना : बिहार की राजनीति में इन दिनों एक चार्टर प्लेन की उड़ान ने जबरदस्त सियासी तूफान मचाया हुआ है. मामला 2011 बैच के आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देवरे से जुड़ा है. विवाद की जड़ पिछले साल जुलाई की एक हवाई यात्रा है, जिसने अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ी जंग का रूप ले लिया है. स्थति ऐसी है कि प्रशासनिक नैतिकता से शुरू हुआ यह मामला अब जातिगत राजनीति पर जा पहुंचा है.

क्या है पूरा विवाद

पूरे विवाद की शुरुआत विधानसभा सत्र के दौरान हुई, जब जहानाबाद से राजद विधायक राहुल शर्मा ने एक सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि जून-जुलाई 2025 में आईएएस निलेश देवरे ने अपने परिवार के साथ दिल्ली से पटना तक की यात्रा एक निजी चार्टर प्लेन एयर फाल्कन 2000 से की थी. विपक्ष का सीधा सवाल है कि एक सरकारी अफसर के पास चार्टर प्लेन बुक करने के लिए लाखों रुपये कहां से आए. विधायक राहुल शर्मा ने तो यहां तक कह दिया कि बिहार जैसे गरीब राज्य में अगर कोई अफसर टेम्पो के बजाय चार्टर प्लेन में घूम रहा है, तो इसकी जांच और उनके कार्यकाल का ऑडिट होना चाहिए.

सरकार का बचाव : खाली आ रहा था जहाज

जब सदन में हंगामा बढ़ा, तो नीतीश सरकार के कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी बचाव में उतरे. उन्होंने दलील दी कि जिस विमान की बात हो रही है, उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वे खुद भी सवार थे. अशोक चौधरी ने कहा, वह विमान मुख्यमंत्री के लिए गया था और जब वापस पटना लौट रहा था, तो सीटें खाली थीं. ऐसे में अगर विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी अपने परिवार के साथ उसमें बैठकर आ गए, तो इसमें सरकारी धन का दुरुपयोग कैसा, यह तो खाली आती हुई सीट का सदुपयोग है.

विवाद में जाति की एंट्री

इस बहस ने तब नया मोड़ ले लिया जब मंत्री अशोक चौधरी ने इसे दलित अस्मिता से जोड़ दिया. उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि क्या दलित और पिछड़ों को हवाई जहाज में बैठने का हक नहीं है, उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि निलेश देवरे एक दलित समाज से आने वाले काबिल अफसर हैं, इसलिए विपक्ष उन्हें निशाना बना रहा है. मंत्री ने यह भी दावा किया कि जब देवरे स्वास्थ्य विभाग में थे, तब उन्होंने सप्लाई से जुड़े 15 भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई की थी, जो आरजेडी से जुड़े थे, इसीलिए अब उनसे बदला लिया जा रहा है.

कौन हैं निलेश रामचंद्र देवरे

आईएएस अफसर निलेश रामचंद्र देवरे मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं. उनका सफर काफी प्रेरणादायक रहा है.

डॉक्टर से अफसर : प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे एक एमबीबीएस डॉक्टर थे. सिस्टम को जमीनी स्तर पर बदलने की चाहत उन्हें यूपीएससी की ओर ले आई.

अनुभवी प्रशासक : बिहार कैडर के इस अफसर ने मधुबनी, सारण, बांका और पश्चिम चंपारण जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया है. उनकी छवि एक सख्त और नियम कायदे से चलने वाले अधिकारी की रही है.

बड़ी जिम्मेदारी : वर्तमान में वे पर्यटन विभाग के सचिव हैं. साथ ही उनके पास नागरिक विमानन विभाग के विशेष सचिव और बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम के एमडी का भी अतिरिक्त प्रभार है.

केंद्रीय अनुभव : वे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.


ठेकेदारों के खर्च पर विदेश की सैर, बिहार के दो IAS अधिकारियों पर गिरी थी गाज

बिहार कैडर के दो आईएएस अधिकारियों, योगेश कुमार सागर 2017 बैच और अभिलाषा कुमारी शर्मा 2014 बैच की मुश्किलें बढ़ गई थी. ED की एक रिपोर्ट के बाद इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थें.कि इन अधिकारियों और उनके परिवारों ने यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की महंगी हवाई यात्राएं की थीं, जिसका पूरा खर्च एक बड़े सरकारी ठेकेदार ऋशु श्री ने उठाया था. जांच में यह बात सामने आई थी कि ठेकेदार ने इन अधिकारियों के लिए न केवल हवाई टिकट बुक किए, बल्कि उनके विदेश में रुकने और अन्य सुख-सुविधाओं पर भी लाखों रुपये पानी की तरह बहाए थे.

मामला सामने आने के बाद बिहार के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया था. शुरुआती जांच के मुताबिक, यह सीधे तौर पर लेन-देन का मामला लग रहा था, जिसमें सरकारी योजनाओं में ठेकेदार को फायदा पहुँचाने के बदले अधिकारियों को विदेश की सैर कराई गई थी.

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