कार कंपनियों को बड़ा झटका! चीन में 'Flush' डोर हैंडल पर लगी रोक, जानें क्या है वजह

China Bans Car Flush Door Handles News: चीन ने सुरक्षा कारणों से कारों में छिपे रहने वाले 'Flush Door Handles' पर प्रतिबंध लगा दिया है। एक्सीडेंट के समय इलेक्ट्रिक सिस्टम फेल होने पर ये हैंडल जाम हो जाते हैं, जिससे रेस्क्यू में देरी होती है। अब 1 जनवरी 2027 से चीन में मैकेनिकल डोर हैंडल अनिवार्य होंगे, जिसका बड़ा असर ग्लोबल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ेगा।

Update: 2026-02-04 18:12 GMT

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China Bans Car Flush Door Handles: आजकल की नई कारों और खासकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आपने देखा होगा कि डोर हैंडल बॉडी के अंदर छिपे रहते हैं और छूने पर बाहर आते हैं। इन्हें 'Flush Door Handles' कहते हैं, जो कार को अच्छा लुक देते हैं। यह फीचर पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रिय हुआ है और ज्यादातर प्रीमियम कारों में देखने को मिलता है। कार कंपनियां इसे मॉडर्न डिजाइन का हिस्सा मानती हैं। लेकिन अब इस पर रोक लगने जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े कार बाजार चीन ने सुरक्षा को देखते हुए इन डोर हैंडल्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। चीन के इस फैसले से कार बनाने वाली कंपनियों को अब अपने डिजाइन में बदलाव करने होंगे।

चीन ने यह फैसला क्यों लिया

चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MIIT) ने नए नियम बनाए हैं। इनके मुताबिक अब चीन में बिकने वाली हर कार में साधारण डोर हैंडल होना जरूरी होगा। सरकार का कहना है कि एक्सीडेंट के समय ये इलेक्ट्रिक डोर हैंडल बड़ी परेशानी बन जाते हैं। कई मामलों में देखा गया कि लोग कार के अंदर फंसे रह गए। रेस्क्यू टीम को भी दरवाजा खोलने में दिक्कत हुई।

जब कार का एक्सीडेंट होता है और किसी कारणवश इलेक्ट्रिक सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाता है, तो ये हैंडल अंदर ही फंसे रह जाते हैं। क्योंकि ये हैंडल पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिज्म पर निर्भर होते हैं, इसलिए बैटरी या वायरिंग खराब होते ही ये काम करना बंद कर देते हैं और बाहर नहीं आते। ऐसी स्थिति में कार एक बंद चैंबर जैसी हो जाती है जिसे बाहर से खोलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इससे न तो अंदर बैठे लोग बाहर निकल पाते हैं और न ही बाहर से कोई दरवाजा खोल पाता है। आग लगने की स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे हालात में हर सेकंड कीमती होता है। चीन में Xiaomi SU7 जैसी कारों के साथ हुई कुछ दुर्घटनाओं ने इस खतरे को सामने ला दिया था।

कब से लागू होगा यह नियम

सरकार ने कार कंपनियों को इस बदलाव के लिए समय दिया है। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। जिन कारों के डिजाइन पहले से मंजूर हो चुके हैं, उन्हें जनवरी 2029 तक का समय मिला है। इससे कंपनियों को अपनी मौजूदा कारों में बदलाव करने का मौका मिलेगा। नई कारों के लिए पहले से ही नए नियमों का पालन करना होगा। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में कारों में फिर से पुराने तरह के हैंडल दिखने लगेंगे।

चीन का यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा कार बाजार है। हर साल करोड़ों गाड़ियां वहां बिकती हैं। वहां जो बदलाव होता है, उसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है।

किस तरह के हैंडल पर होगा बैन

नए नियम में मुख्य रूप से दो तरह के कार डोर हैंडल्स पर रोक लगाई गई है। पहले वो डोर हैंडल्स हैं जिन्हें दबाने पर एक हिस्सा ऊपर उठता है और दूसरे हिस्से को पकड़कर दरवाजा खोलना पड़ता है, जैसा कि Tesla Model Y में देखा जाता है। दूसरे वो डोर हैंडल्स हैं जो सेंसर की मदद से चलते हैं और चाबी पास लाने या हाथ लगाने पर ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए अपने आप बाहर की तरफ निकलते हैं, जैसे Kia EV9 या कई अन्य महंगी लग्जरी कारों में मिलते हैं। ये दोनों तरह के हैंडल दिखने में अच्छे लगते हैं लेकिन इमरजेंसी में काम नहीं आते। इसीलिए सरकार ने इन पर रोक लगाने का फैसला किया है।

अब कंपनियों को ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिसमें बाहर से हाथ डालकर दरवाजा खोलने के लिए कम से कम 2.4 इंच लंबी और 0.8 इंच चौड़ी जगह हो। यह जगह इतनी होनी चाहिए कि कोई भी आसानी से हैंडल पकड़ सके। साथ ही कार के अंदर भी साइन लगाना जरूरी होगा जो बताएं कि मुश्किल में दरवाजा कैसे खोलना है।

भारत और दूसरे देशों पर क्या असर होगा

यह कानून अभी सिर्फ चीन के लिए है, लेकिन इसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। Mercedes, BMW और Hyundai जैसी बड़ी कंपनियां अपनी कारों का बड़ा हिस्सा चीन में बेचती हैं। ये कंपनियां एक ही मॉडल कई देशों में बेचती हैं। इसलिए डिजाइन में बदलाव सभी जगह दिखेगा। अलग-अलग देशों के लिए अलग डिजाइन बनाना कंपनियों के लिए महंगा होगा। इसलिए हो सकता है कि कंपनियां सभी जगह के लिए साधारण डोर हैंडल्स का इस्तेमाल करने लगें।

भारत में भी कई कारों में अब यह फीचर आने लगा है। कुछ भारतीय कंपनियां भी अपनी नई गाड़ियों में यह डिजाइन दे रही हैं। आगे चलकर भारतीय नियामक भी सुरक्षा को देखते हुए ऐसे कदम उठा सकते हैं।

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