भाजपा में बढ़ा अजय चंद्राकर का कद, अरुण साव को भी वेटेज, बस्तर से लता उसेंडी नेशनल बॉडी में, पढ़ें किस फॉर्मूले के तहत की गई कार्यकारिणी में नियुक्तियां…
रायपुर, 07 अक्टूबर 2021। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने रहेंगे। उनके साथ जिन्हें शामिल किया गया है, उससे छत्तीसगढ़ भाजपा में बदलाव की चर्चा है। डॉ. सरोज पांडेय को कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। इससे पहले वे राष्ट्रीय महासचिव और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जगतप्रकाश नडडा ने कार्यकारिणी जारी की तो सरोज को जगह नहीं मिल पाई थी।
पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक अजय चंद्राकर व पूर्व मंत्री लता उसेंडी को भी कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। अजय अभी प्रदेश कार्यकारिणी में प्रवक्ता और लता उपाध्यक्ष हैं। इनके अलावा बिलासपुर सांसद अरूण साव को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। अजय कुर्मी समाज और साव साहू समाज से आते हैं।
दरअसल बस्तर में पिछले महीने हुई भाजपा की चिंतन बैठक में सोशल इंजीनियरिंग पर भी मंथन किया गया था। इसमें ओबीसी वर्ग में बड़ी संख्या वाले कुर्मी और साहू वोटरों के साथ उन वर्गों को भी साधने पर बात हुई, जिनकी संख्या सीमित क्षेत्र में होने के बावजूद निर्णायक भूमिका में हैं। इसी कड़ी में ओबीसी वर्ग से दो नेताओं को राष्ट्रीय कार्यसमिति में लिया गया है।
एक दिन पहले ही यानी बुधवार को पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भेंट की थी। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी उनसे मिलकर आए थे। ऐसा कहा जा रहा है कि नेताओं से रायशुमारी कर ही नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों के बाद अब अगली कार्यसमिति की बैठकों में भाजपा आगे की रणनीति के संबंध में संकेत दे सकती है।
नेतृत्व परिवर्तन में क्या इतना ही?
इन नियुक्तियों के बाद यह भी बात शुरू हो गई है कि नियुक्तियों में इतना ही है या अभी और कुछ बाकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि काफी समय से भाजपा में बदलाव की सुगबुगाहट चल रही है। समय-समय पर इस बात की भी चर्चा होती रही कि प्रदेश अध्यक्ष को बदला जा सकता है और ओबीसी वर्ग के किसी नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसमें भी चंद्राकर और साव के नाम की चर्चा होती रही है। अब चंद्राकर और साव दोनों राष्ट्रीय कार्यसमिति में लिए गए हैं। ऐसे में जानकार मानते हैं इस चर्चा पर विराम लग जाएगा। हालांकि संघ से जुड़े नेताओं का कहना है कि अब चुनाव से पहले संभवतः कुछ देखने को मिले।