छत्तीसगढ़ की जेलों में एक साल के भीतर 33 कैदियाें की मौत, नाराज हाई कोर्ट ने डीजी जेल से शपथ पत्र के साथ मांगी जानकारी...

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ की जेलों में एक साल के भीतर 33 कैदियों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल महानिदेशक DG जेल से हलफनामा मांगा है।

बिलासपुर। 8 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ की जेलों में एक साल के भीतर 33 कैदियों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल महानिदेशक DG जेल से हलफनामा मांगा है। अधिकांश मौतें बीमारी या हृदय, गुर्दा खराब होने के कारण बताई गई हैं, लेकिन 22 मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट लंबित है। इस मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 अप्रैल की तिथि तय कर दी है। बता दें, NPG.NEWS ने जेल में हो रही मौत को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कैदियों की बढ़ती मौतों पर गंभीर चिंता जताई है। जेल महानिदेशक के हलफनामे में पोस्टमार्टम रिपोर्टों में देरी और आरोपों की गंभीरता का उल्लेख किया गया है। इसी बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी जेल में हुई मौतों और चिकित्सा सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है, जिससे राज्य में हिरासत की स्थितियों में हो रही मौत की जांच तेज हो गई है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने विभिन्न जेलों में कैदियों की मृत्यु दर में वृद्धि दर्शाने वाली रिपोर्टों को स्वतः संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने महानिदेशक (कारागार) को इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर केंद्रीय जेल में सबसे अधिक 10 मौतें दर्ज की गईं। दुर्ग केंद्रीय जेल में आठ मौतें हुईं, जबकि अंबिकापुर केंद्रीय जेल में पांच कैदियों की मौत हुई। जगदलपुर और गरियाबंद से भी दो-दो मौतें दर्ज की गईं।

धमतरी, बलरामपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़ और कांकेर से एक-एक कैदियों की मौत हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है, बीमार पड़ने पर इनमें से कई कैदियों को छत्तीसगढ़ चिकित्सा विज्ञान संस्था CIMS, बिलासपुर या डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल, रायपुर में भर्ती कराया गया था, लेकिन वे बच नहीं पाए।

कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी पर जताई नाराजगी

रिपोर्ट की गई 33 मौतों में से, जेल विभाग को अभी तक 22 कैदियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। दुर्ग जेल के एक मामले में, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक नहीं मिल पाई है। इसे लेकर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगा रिपोर्ट

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पिछले दो वर्षों में कैदियों की मृत्यु के संबंध में मुख्य सचिव और महानिदेशक (जेल) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कैदियों को उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सुविधाओं पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि राज्य के वकील, अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने समाचार रिपोर्ट को गलत बताया है।

NPG.NEWS की रिपोर्ट

जेल बना काल कोठरी: एक साल में 33 कैदियों ने तोड़ा दम, बिलासपुर सबसे आगे

जेलों में कैदियों को चिकित्सा सुविधा देने का नियम है। हर जेल में अस्पताल और डॉक्टरों की ड्यूटी भी रहती है, इसके बाद भी बीमार होकर कैदियों के दम तोड़ने का सिलसिला जारी है। खास बात यह है कि ज्यादातर कैदियों को विभिन्न जेलों से आंबेडकर अस्पताल रायपुर शिफ्ट किया गया था और यही इलाज के बीच मौत हो गई। सर्वाधिक दस कैदियों की मौत के साथ बिलासपुर केंद्रीय जेल टॉप पर है, जबकि दूसरे नंबर पर दुर्ग केंद्रीय जेल है, जहां एक साल में 8 कैदियों ने दम तोड़ा है। इसके अलावा अंबिकापुर केंद्रीय जेल में पांच कैदियों की जान चली गई है। जगदलपुर और गरियाबंद में दो- दो कैदियों तथा धमतरी, बलरामपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, कांकेर में एक- एक मौतों की सूचना जेल विभाग के पास है। इनमें सबसे हैरानी की बात यह है कि मृत कैदियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में बहुत देरी हो रही है। हाल यह है कि दुर्ग के एक कैदी की मौत 27 फरवरी 2025 को हुई थी, मगर उसकी पीएम रिपोर्ट जेल विभाग को अब तक नहीं मिली है। 33 में से 20 कैदियों की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट अस्पताल से जेल विभाग तक नहीं पहुंची है।

अब तक नहीं मिली दंडाधिकार जांच रिपोर्ट

जेल के कैदियों की मौतों के बाद संदिग्ध प्रकरणों की दंडाधिकारी जांच भी करवाई जा रही है, जिनमें से किसी की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। बिलासपुर जेल की बात करें तो यहां विचाराधीन महिला कैदी सुमित्रा तिवारी, सिद्धार्थ सिदार, सोनाऊराम यादव, इमरान कुरैशी, दशरथ, भांकर जांगड़े, भारदा प्रसाद, छेदू उर्फ मथुरा, राजेंद्र डहरिया और दिनेश यादव ने दम तोड़ा है। इनमें से ज्यादातर की मौत का कारण मेडिकल ही बताया गया है, वहीं कुछ की पीएम रिपोर्ट और दंडाधिकारी जांच की रिपोर्ट जेल विभाग को नहीं मिली है। केंद्रीय जेल दुर्ग ेमें बंद बरातीराम लोधी, अनवर हुसैन, लक्ष्मण साहू, मनिराम, दिनेश देशमुख, संपत राम देवांगन, मुकुंद राव और विनय प्रताप की मौतों की रिपोर्ट जेल विभाग में दर्ज है। यह भी उल्लेखनीय है कि ज्यादातर कैदियों की मौत के पीछे किडनी खराब होने, हार्ट का रोग अथवा सभी महत्वपूर्ण अंगों के काम नहीं करने को कारण बताया गया है। अंबिकापुर केंद्रीय जेल में बंद दिला उर्फ दिलराम, होलसाय नागवंशी, मुगुल राम, जीत लाल और बुधराम पंडो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। खास बात यह है कि 33 कैदियों में से एक बिलासपुर केंद्रीय जेल के बंदी सोनाऊराम की जेल अस्पताल केंद्रीय जेल रायपुर में मौत हुई है। जबकि दो कैदियों कोरबा के अजय कुमार नगेशिया और रायगढ़ के लेदा उर्फ लेद्दाराम ने सिम्स अस्पताल बिलासपुर में दम तोड़ा है। बाकी सभी कैदी आंबेडकर अस्पताल रायपुर में भर्ती थी।

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