UGC BJP Leader Resign: BJP को बड़ा झटका! बुलंदशहर में 10 बूथ अध्यक्षों ने दिया इस्तीफा, UGC के नियमों पर बवाल
UGC Rules Protest: UGC New Rules को लेकर यूपी के बुलंदशहर में BJP के 10 बूथ अध्यक्षों ने सामूहिक इस्तीफा दिया। सवर्ण समाज में रोष, इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल।
बुलंदशहर | 29 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। खुर्जा क्षेत्र में भाजपा के 10 बूथ अध्यक्षों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे का कारण यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को बताया जा रहा है जिसे लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी सामने आ रही है।
खुर्जा क्षेत्र के 10 बूथ अध्यक्षों ने सौंपा इस्तीफा
खुर्जा के मुरारी नगर शक्ति केंद्र से जुड़े बूथ अध्यक्षों- विनय कुमार गुप्ता (बूथ 268), राजवीर सिंह (261), पुरुषोत्तम चौहान (269), चंद्रशेखर शर्मा (270), नीरज कुमार (202), प्रवीण राधव (271), मुकेश कुमार (272), शिवेंद्र चौहान (263) और सतेंद्र चौहान (274) ने 28 जनवरी 2026 को सामूहिक रूप से इस्तीफा पत्र सौंपा।
इस्तीफा पत्र में लिखा गया है कि सवर्ण समाज लंबे समय से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन यूजीसी के नए नियमों से समाज में भारी असंतोष है जिससे पार्टी की नीतियों और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
इस्तीफा पत्र में क्या लिखा गया
इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि यूजीसी के नए ड्राफ्ट से ऐसा संदेश जा रहा है मानो सवर्ण समाज को ऐतिहासिक रूप से अत्याचारी और शोषक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा हो। पदाधिकारियों का कहना है कि इस माहौल में उन्हें जमीनी स्तर पर जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि अगर यूजीसी नियमों को वापस नहीं लिया गया तो उन्हें न केवल बूथ अध्यक्ष पद से बल्कि पूरी बूथ समिति की जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जाए।
UGC के नए नियम क्यों बने विवाद की वजह
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को अधिसूचित किया था। इन नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए इक्विटी कमिटी, हेल्पलाइन, मॉनिटरिंग मैकेनिज्म और शिकायत निवारण प्रणाली को अनिवार्य किया गया है।
नियमों का फोकस मुख्य रूप से एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव की रोकथाम पर है। हालांकि, जनरल कैटेगरी और सवर्ण संगठनों का कहना है कि नियम एकतरफा हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
यूपी के कई जिलों में विरोध और इस्तीफों की झड़ी
बुलंदशहर की यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले पीलीभीत, सहारनपुर, फिरोजाबाद, बागपत, रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में भी भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे और विरोध प्रदर्शन सामने आ चुके हैं। कुछ संगठनों ने नियमों को लेकर अदालत में याचिका दायर करने की भी जानकारी दी है।
केंद्र सरकार का पक्ष क्या है
केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले ही स्पष्ट किया है कि यूजीसी के इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और सभी प्रावधान संविधान के दायरे में रहकर लागू किए जाएंगे।