महिला IAS के ट्रांसफर पर सवाल: कांग्रेस नेताओं के प्रेशर में बिना जॉइन किये महिला IAS का हो गया तबादला? ओपी ने ट्वीट कर जताया विरोध

Update: 2021-07-14 02:14 GMT

रायपुर 14 जुलाई 2021। लेडी IAS ने ज्वाइन भी नहीं किया था कि ट्रांसफर हो गया ! बिना ज्वाइन किये ट्रांसफर आर्डर जारी होने के बाद अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है…तो वहीं बीजेपी ने इस मामले पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। प्रकरण रायगढ़ का है, जहां 30 जून को 2019 बैच के ट्रेनी IAS अफसरों को फील्ड पोस्टिंग दी गयी थी। राज्य सरकार के 30 जून के जारी ट्रांसफर आर्डर में चौथे नंबर रेना जमील का नाम था, जिन्हें बस्तर सहायक कलेक्टर से सारंगढ़ का SDM बनाया गया था।

डायरेक्ट IAS की सारंगढ में पोस्टिंग कांग्रेसियों को रास नहीं आयी, लिहाजा अंदरखाने विरोध शुरू हो गया, कई दिनों तक गतिरोध को खत्म करने की कोशिश चलती रही, लेकिन स्थानी कांग्रेसी नेता किसी डायरेक्ट आईएएस को के तौर पर स्वीकारने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने अब रेना जमील को बिना ज्वाइन कराये ही SDM रायगढ़ से जांजगीर भेज दिया है। रैना जमील को अब सक्ती का एसडीएम बनाया गया है। हालांकि जानकारी ये आयी थी कि रेना जमील ज्वाइन करने के लिए सारंगढ़ पहुंच भी गयी थी, लेकिन उनकी ज्वाइनिंग हो नहीं पायी थी।

हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है, जब SDM के तौर पर हुई पोस्टिंग के बाद किसी IAS को बिना ज्वाइन के ही ट्रांसफर आर्डर लेना पड़ा था। हालांकि सारंगढ़ की तासीर कुछ ऐसी रही है कि यहां SDM के तौर पर डायरेक्ट IAS या तो ज्यादा वक्त तक रह नहीं पाते और रहते भी है तो कोई ना कोई विवाद से उन्हें जोड़ जरूर दिया जाता है।

महिला आईएएस के ट्रांसफर को लेकर पूर्व IAS व बीजेपी नेता ओपी चौधरी ने राज्य सरकार को घेरा है।

उन्होंने IAS एसोसिएशन से भी इस इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देने की मांग की है। ओपी चौधरी ने लिखा है

“छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता सब देख रही है। उम्मीद करता हूं की IAS एसोसिएशन की ओर से भी, कोई मजबूत प्रतिक्रिया सामने आएगी।राजनैतिक दबाव में लिये जा रहे, इस तरह के निर्णयों से प्रदेश भ्र्ष्ट अव्यवस्था (Corrupt Anarchy) की ओर बढ़ रहा है:

2019 बैच की आईएएस सुश्री रैना जमील को 30 जून 2021 को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने सारंगढ़ में SDM के रूप में पदस्थ किया। सरकार के आदेश के बाद भी कांग्रेसी नेताओं के दबाव में उनको चार्ज नहीं मिल पाया। सारंगढ़ पालिका चुनाव के कारण, कांग्रेसी नेता नहीं चाहते थे कि #SDM, कोई #IAS बने।इसलिये 12 दिनों मे ही उन्हे हटाकर सक्ती का SDM नियुक्त कर दिया गया है।“

सारंगढ़ में IAS क्यों नहीं ज्यादा दिन टिकते

सारंगढ़ में बतौर SDM कई IAS की पोस्टिंग हुई है, लेकिन 10-11 महीने से ज्यादा कोई टिक ही नहीं पाया या यूं कह लीजिये टिकने ही नहीं दिया गया। डायरेक्ट आईएएस रजत कुमार अगस्त 2008 में एसडीएम सारंगढ़ बने थे, लेकिन 6 महीने बाद ही उनकी रवानगी हो गयी, उसके बाद आईएएस सीआर प्रसन्ना ने ज्वाइन किया, लेकिन चार महीने बाद ही टिक पाये। यशवंत कुमार अगस्त 2009 में आये और 11 महीने रहे। रानू साहू 9 महीने एसडीएम रही। निलेश कुमार 2013 और चंद्रकांत वर्मा 2019 में यहां एसडीएम बने। हालांकि किसी भी डायरेक्ट आईएएस का कार्यकाल लंबा नहीं रहा।

किसी पर गाड़ियां चढ़ायी, तो किसी को बनाया बंधक

सारंगढ़ में माफियाराज और दबंगई इस कदर हावी है कि यहां स्थानीय नेताओं ने कई दफा डायरेक्ट आईएएस रहे SDM से दुर्व्यवहार भी गिया। मौजूदा रायपुर जिला पंचायत सीईओ मयंक चतुर्वेदी पर तो सारंगढ़ में एक कोल माफिया ने गाड़ी से कुचलने तक की हिमाकत कर दी थी। वहीं SDM रहते एक्सीडेंट के बाद पहुंचे । अतिक्रमण अभियान में पहुंचे एक अफसर से भी स्थानीय नेताओं ने दुर्व्यवहार किया था।

 

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