Chattisgarh Budget 2026: जब गोता लगाया छत्तीसगढ़ का बजट, जानिये किसके नाम दर्ज है सबसे अधिक बजट पेश करने का रिकार्ड? जानिये 25 साल में 25 बजट की कहानी

Chattisgarh Budget 2026: छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 7 हजार 294 करोड़ से शुरू हुआ बजट का सफर एक लाख 65 हजार 100 करोड़ पार कर चुका है। इस 25 साल के सफर में बजट में रोचक उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले।

Update: 2026-02-23 07:22 GMT

Photo Source: Chattisgarh Budget 2026 (NPG News)

Chattisgarh Budget 2026: रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण एक नवंबर 2000 को हुआ था। मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद निश्चित ही बजट की राशि बढ़ने से पूरे प्रदेश में विकास ने गति पकड़ी है। पहले बजट का पैसा भोपाल से आता था। दूरी और विशाल मध्यप्रदेश राज्य के कारण जिलों के खातों में बहुत कम रकम आ पाती थी और विभागीय मद भी पर्याप्त नहीं मिलता था। एक मौका ऐसा भी आया था जब कांग्रेस सरकार में बजट ने गोता लगा दिया और बजट का आंकड़ा ऊपर जाने के स्थान पर नीचे गिर गया था। वर्ष 2019-20 में जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल थे, तब बजट का आंकड़ा 1 लाख 20 हजार करोड़ था। इसके बाद वर्ष 2021-22 में अचानक से बजट का आंकड़ा गिर कर 97 हजार 106 करोड़ हो गया था।

25 गुना बढ़ा चुका छत्तीसगढ़ का बजट

छत्तीसगढ़ बनने के बाद राज्य का बजट लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2001-2002 की तुलना में बजट का आकार 25 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। निश्चित रूप से इससे विभागों का फंड बढ़ा है और विकास के नए प्लान बना कर अधोसंरचना को मजबूत करने काम भी तेजी से हुआ है। हर साल पांच से दस हजार करोड़ रुपये का इजाफा बजट में होता रहा है।

पहला बजट सिंहदेव ने पेश किया

राज्य बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार में वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने प्रदेश का पहला बजट 2001-2002 में 7 हजार 294 करोड़ रुपये का पेश किया था। जोगी सरकार के कार्यकाल के दौरान वित्त मंत्री सिंहदेव ही बजट पेश करते रहे और वे मितव्ययिता के लिए प्रसिद्ध थे। विभागों के खर्च का वे पूरा हिसाब लेते थे और फिजूलखर्ची पर पूरी तरह लगाम लगाते थे। वे खुद भी सादा जीवन जीते थे और एक सरकारी एंबेडसर कार में चलते थे, जिसमें एसी ही नहीं लगा था। उनके सरकारी बंगले में बिल्कुल भी तामझाम नहीं था।

25 साल में बजट पेश करने वाले चौधरी पांचवे मंत्री

छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में प्रदेश का बजट पेश करने वाले वर्तमान वित्त मंत्री ओपी चौधरी पांचवें नंबर पर हैं। इससे पहले 2001 में कांग्रेस सरकार में रामचंद्र सिंहदेव और 2003 में भाजपा सरकार में अमर अग्रवाल ने अपनी- अपनी पार्टी की सरकार का पहला बजट पेश किया था। इसके बाद वर्ष 2008 से 2018 तक भी भाजपा की सरकार रही और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह बजट प्रस्तुत करते रहे। डॉ. सिंह ने वित्त विभाग अपने पास रखा था। 2018 में कांग्रेस सरकार की वापसी होने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद ही बजट पेश करते रहे।

सिंहदेव का वित्तीय अनुशासन

छत्‍तीसगढ़ की पहली अजीत जोगी सरकार में डॉ. रामचंद्र सिंहदेव वित्‍त मंत्री थे। डॉ. सिंहदेव ने पहले बजट में वित्‍तीय अनुशासन को जो पाठ पढ़ाया वह आज तक जितने भी वित्‍त मंत्री हुए सभी ने याद रखा है। इसी वजह से अन्‍य राज्‍यों की तुलना में छत्‍तीसगढ़ की वित्‍तीय स्थित बेहतर है। प्रदेश के बजट का सफर 5600 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था जो अब पौने दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

5 मंत्री, 15 बजट

छत्‍तीसगढ़ के 25 वर्षों के इतिहास में अब तक पांच वित्‍त मंत्री हुए हैं। इनमें दो मुख्‍यमंत्री भी शामिल हैं, जिन्‍होंने वित्‍त विभाग की कमान अपने ही पास रखी थी। प्रदेश के दूसरे वित्‍त मंत्री बीजेपी के अमर अग्रवाल थे। अग्रवाल के कैबिनेट से इस्‍तीफा देने के बाद तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वित्‍त विभाग की कमान संभाली और वे 2018 तक वित्‍त मंत्री बने रहे।

3 मंत्री, 3-3 बजट

प्रदेश के पहले और दूसरे वित्‍त मंत्री केवल तीन-तीन ही बजट पेश कर पाए थे। 2003 में कांग्रेस की सरकार चली गई, उससे पहले डॉ. सिंहदेव ने 2001-02, 2002- 03 और 2003-04 के लिए बजट पेश किया था। 2003 में बीजेपी सत्ता में आई तब वित्त मंत्री अमर अग्रवाल ने 3 बार बजट पेश किया। बीजेपी के शासनकाल में अमर अग्रवाल को वित्त विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रदेश के दूसरे वित्त मंत्री अमर अग्रवार को बतौर वित्त मंत्री 3 साल बजट पेश करने का मौका मिला। अमर अग्रवाल को कम खर्चीले वित्त मंत्री के रूप में जाना जाता है। 2006 में अमर अग्रवाल ने वित्त विभाग की जिम्मेदारी छोड़ दी थी। 2004-05 में अमर अग्रवाल ने 10 हजार 555 करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जिसमें दो अनुपूरक बजट पेश किए गए। 2005-06 में अग्रवाल ने 11 हजार 242 करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट पेश किए गए। 2006-07 में उन्होंने 13 हजार 185 करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट शामिल थे। 2006 में अमर अग्रवाल ने वित्त विभाग की जिम्मेदारी छोड़ी और तत्कालीन सीएम रहे रमन सिंह ने वित्त विभाग की जिम्मेदारी ले ली। इसके बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी इस बार तीसरा बजट पेश करने जा रहे हैं।

रमन ने 12 बार पेश किया बजट

2007 में रमन सिंह ने अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। 2007 से लेकर 2018 तक रमन सिंह ने वित्त विभाग को अपने पास रखा और हर साल बतौर सीएम वे बजट पेश करते रहे। इस तरह रमन सिंह ने कुल 12 बार बजट पेश किया। 2018-19 में अंतिम बजट पूश किया। उनके कार्यकाल के दौरान बजट में मूल रुप से अधोसंरचना विकास पर फोकस रहा।

भूपेश ने पांच बार पेश किया बजट

बीजेपी का शासन खत्म होने के बाद कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ और 15 साल बाद पार्टी सत्ता में लौटी। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के तरह ही सीएम भूपेश बघेल ने भी वित्त अपने पास रखा। उन्होंने पांच साल बतौर वित्त मंत्री राज्य में बजट पेश किया।

विष्णुदेव दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री जो बजट पेश नहीं करेंगे

ऐसे में छत्तीसगढ़ के इतिहास में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो बजट पेश नहीं करेंगे। अब तक राज्य में चार मुख्यमंत्री हुए हैं, जिनमें रमन सिंह और भूपेश बघेल ने बजट पेश किया है। अजीत जोगी ने बजट पेश नहीं किया है, अब इस सूची में सीएम साय का नाम भी जुड़ जाएगा। कांग्रेस सरकार के जाने के बाद भाजपा सरकार ने मोर्चा संभाला। इस बार वित्त विभाग की जिम्मेदारी ओपी चौधरी को मिली। उन्होंने अपना पहला बजट 2024-25 के लिए पेश किया। वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में वे अपना दूसरा बजट पेश करेंगे।

छत्तीसगढ़ का बजट इस तरह बढ़ता रहा

वर्ष

बजट राशि

2001-02 

7 हजार 294 करोड़

2002-03

8 हजार 471 करोड़

2003-04 

9 हजार 978 करोड़

2004-05

10 हजार 555 करोड़

2005-06

11 हजार 242 करोड़

2006-07 

13 हजार 185 करोड़

2007-08 

16 हजार 473 करोड़

2008-09

19 हजार 392 करोड़

2009-10 

23 हजार 482 करोड़

2010-11

26 हजार 099 करोड़

2011-12

32 हजार 477 करोड़

2012-13

39 हजार 677 करोड़

2013-14 

44 हजार 169 करोड़

2014-15

54 हजार 710 करोड़

2015-16 

65 हजार 013 करोड़

2016-17

76 हजार 032 करोड़

2017-18 

88 हजार 599 करोड़

2018-19 

95 हजार 899 करोड़

2019-20

1 लाख 20 हजार करोड़

2021-22 

97 हजार 106 करोड़

2022-23 

1 लाख 04 हजार 603 करोड़

2023-24

1 लाख 21 हजार 501 करोड़

2024-25

1 लाख 47 हजार 446 करोड़

2025-26

1 लाख 65 हजार 100 करोड़



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