निर्भया केस: आरोपियों के वकील ने कहा- राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जज भगवान नहीं…क्या कल निर्भया के दोषियों को होगी फांसी..

Update: 2020-01-31 06:18 GMT

नईदिल्ली 31 जनवरी 2020। निर्भया केस के दोषियों के वकील एपी सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज और देश के राष्ट्रपति भगवान नहीं हैं, वो भी गलती कर सकते हैं.वकील एपी सिंह का यह बयान आरोपी अक्षय ठाकुर की क्यूरेटिव पेटिशन खारिज होने के बाद आया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक बेंच ने दोषियों की फांसी की सजा को रोकने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. निर्भया केस के दोषियों को एक फरवरी को फांसी पर लटकाया जाएगा।

दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने में 24 घंटे से भी कम का समय बचा है। ऐसे में सबके मन में एक ही सवाल है कि क्या निर्भया के दोषियों को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी की सजा दी जाएगी या नहीं क्योंकि सिर्फ एक दोषी मुकेश को छोड़कर सभी के पास अभी कानूनी और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का मौका बाकी है। तीनों दोषी राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने की स्थिति में राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। वहीं शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर निर्भया सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में दोषियों की याचिका पर शुक्रवार को जवाब देने को कहा। इस याचिका में 01 फरवरी को तय उनकी फांसी पर रोक की मांग की गई है।

बता दें कि चारों में से मुकेश ही ऐसा दोषी है, जिसके पास फांसी से बचने के सारे विकल्प समाप्त हो चुके हैं। बावजूद इसके चारों को एकसाथ फांसी लगने की उम्मीद अभी नहीं नजर आ रही और इसमें चारों दोषियों की फांसी में सबसे बड़ी अड़चन Delhi Prison Manual बना हुआ है।

क्या कहता है Delhi Prison Manual

दिल्ली जेल मैनुअल (Delhi Prison Manual) के मुताबिक, किसी अपराध में एक से अधिक दोषियों को फांसी दी जा रही हो तो किसी एक दोषी की भी याचिका लंबित रहने पर फांसी पर कानूनी तौर पर रोक रहती है। निर्भया मामले में चार दोषी हैं और चारों ही फांसी से बचने के लिए कानूनी तरीके अलग-अलग समय पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में एक साथ फांसी पर तब तक रोक रहेगी, जब तक चारों दोषी अपने सभी विकल्प इस्तेमाल नहीं कर लेते।

दोषी मुकेश के पास सभी विकल्प खत्म
अब तक एकमात्र मुकेश ही ऐसा व्यक्ति है जो सभी कानूनी विकल्प आजमा चुका है। उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी और राष्ट्रपति के इस निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उसकी अपील खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आर भानुमति के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मुकेश की अपील खारिज करते हुए कहा था कि ‘त्वरित विचार और दया याचिका ‘त्वरित’ रूप से खारिज कर देने का यह मतलब नहीं है कि राष्ट्रपति ने इस पर सोच-विचार नहीं किया।

दोषी अक्षय ठाकुर की क्यूरेटिव याचिका हो चुकी है खारिज
अक्षय ठाकुर की गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया। निर्भया के दोषियों में से एक अक्षय ने फांसी की सजा पर रोक की मांग की थी। अक्षय ठाकुर अभी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकता है और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने फांसी पर रोक की मांग कर सकता है।

दोषी विनय ने भी अभी तक राष्ट्रपति के समक्ष दाखिल नहीं की याचिका
विनय कुमार शर्मा की सुधारात्मक याचिका को शीर्ष अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। उसके पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है।

दोषी पवन गुप्ता ने अभी तक सुधारात्मक याचिका दाखिल नहीं की
चौथे दोषी पवन गुप्ता ने अभी सुधारात्मक याचिका दाखिल नहीं की है। उसके पास अभी यह विकल्प बचा है। इसके बाद वह राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी दाखिल कर सकता है।

इस मामले में थे छह आरोपी
निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में छह आरोपी शामिल थे। इनमें से एक नाबालिग था, इसलिए उसके मामले की सुनवाई किशोर अदालत के समक्ष हुई और वह सजा मिलने के बाद रिहा हो चुका है। वहीं अन्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। विनय सहित चार आरोपियों को अदालत ने दोषी माना और उन्हें मौत की सजा सुनाई। गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। छह आरोपियों ने 23 वर्षीय महिला के साथ चलती बस में मिलकर दुष्कर्म किया था और उसकी बुरी तरफ पिटाई की थी। बाद में छात्रा की मौत हो गई थी।

पवन जल्लाद पहुंचा तिहाड़ जेल
निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद हथियारबंद जवानों की कड़ी सुरक्षा में गुरुवार को दोपहर बाद तिहाड़ जेल पहुंचा। जल्लाद के पहुंचने की सूचना तिहाड़ जेल महानिदेशालय को दे दी गई। जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने जल्लाद के पहुंचने की सूचना मिलते ही महानिदेशालय परिसर में एक आपात बैठक बुलाई। बेहद गोपनीय यह बैठक लंबे समय तक चली। बैठक की अध्यक्षता खुद डीजी जेल ने की।

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