निलंबित शिक्षक को 22 महीने से नहीं दिया गया जीवन निर्वाह भत्ता.... पत्नी के आंसुओं पर भी नहीं पसीजा कार्यालय का दिल...शिक्षक नेता विवेक दुबे को मिली मामले की जानकारी तो अब मामला पहुंचा उच्च अधिकारियों के पास
पंचायत विभाग का हाल प्रदेश में किसी से छिपा नहीं है चाहे शिक्षाकर्मियों को एरियर्स देने का मामला हो या उनके एनपीएस राशि के भुगतान , हर जगह मामला पेंडिंग है लेकिन हद तो तब हो जा रही है जब किसी कर्मचारी का एक दो नहीं बल्कि लगभग 2 साल का वेतन कार्यालय द्वारा रोक दिया जा रहा है
रायपुर, 17 अक्टूबर 2021। पंचायत विभाग का हाल प्रदेश में किसी से छिपा नहीं है चाहे शिक्षाकर्मियों को एरियर्स देने का मामला हो या उनके एनपीएस राशि के भुगतान , हर जगह मामला पेंडिंग है लेकिन हद तो तब हो जा रही है जब किसी कर्मचारी का एक दो नहीं बल्कि लगभग 2 साल का वेतन कार्यालय द्वारा रोक दिया जा रहा है यही नहीं नियमानुसार जिस शिक्षक का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो जाना था उसका भी प्रस्ताव कार्यालय द्वारा प्रेषित नहीं किया गया जिससे कर्मचारी पंचायत विभाग में ही पदस्थ है और संविलियन से वंचित हो गया है । यह मामला है माध्यमिक शाला राधापुर विकासखंड सीतापुर के शिक्षक बरतराम नायक का , जिन्हें एक मामले में दोषी पाने पर जिला पंचायत कार्यालय द्वारा नवंबर 2017 में निलंबित किया गया था और उनकी पदस्थापना विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय मैनपाट में किया गया , निलंबन के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता थी जिसका स्पष्ट उल्लेख आदेश में भी किया गया है लेकिन इसके बावजूद विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय सीतापुर द्वारा जहां से उसे वेतन भुगतान होना था जनवरी 2019 से लेकर दिसंबर 2020 तक वेतन भुगतान नहीं किया गया इसके लिए संबंधित शिक्षक ने कई बार कार्यालय में लिखित तौर पर अपील की यही नहीं उसकी पत्नी ने भी आवेदन भेजकर वेतन भुगतान के लिए गुहार लगाई लेकिन कार्यालय में बैठे अधिकारी और कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा । थक हार कर जब शिक्षक के पास कोई रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने मामले की शिकायत सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे से की और जैसे ही मामला शिक्षक नेता विवेक दुबे के पास पहुंचा तो उन्होंने तुरंत इस मामले से जिला पंचायत सीईओ और अंबिकापुर कलेक्टर को अवगत कराया है साथ ही जिला पंचायत के शाखा प्रभारी से भी उनकी बात हुई है और इसके बाद जल्द ही वेतन भुगतान की बात कही जा रही है लेकिन बड़ा सवाल खड़ा यह होता है कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई और क्यों कर्मचारी को 22 माह तक वेतन नहीं मिला सबसे बड़ी बात इस पूरे मामले में दोषी कर्मचारी पर कोई कार्यवाही होगी या उसे अभयदान मिल जाएगा ।
नियमों की अनदेखी कर संविलियन से भी कर दिया गया वंचित
शासन द्वारा शिक्षा कर्मियों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया गया है और इसमें निलंबित कर्मचारियों के संबंध में भी स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी कर्मचारी को निलंबित किया गया है और उसकी विभागीय जांच हो रही है तो भी उसका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया जाना है और भविष्य में मामले की जांच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जाएगी वहीं मामले का प्रस्तुतकर्ता जिला पंचायत होगा किंतु इस निर्देश की भी अनदेखी करते हुए शिक्षक को संविलियन का लाभ नहीं दिया गया जो कि अपने आप में एक गंभीर मामला है ।
इस पूरे मामले को प्रकाश में लाने वाले सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे का कहना है कि
" शिक्षक बरतराम नायक को एक मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित किया गया था और नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वहन भत्ता की पात्रता है , एक कर्मचारी के वेतन पर केवल कर्मचारी नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार आश्रित होता है ऐसे में 22 माह तक वेतन न देना केवल कर्मचारी को ही नहीं बल्कि उसके परिवार को भी मौत के मुंह में सौंपना है जो कि एक गंभीर अपराध है , यही नहीं शिक्षा विभाग के आदेशों की अनदेखी करते हुए उसे संविलियन से भी वंचित कर दिया गया है मैंने पूरे मामले की जानकारी जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर को दी है और मुझे उम्मीद है की जल्द ही मामले का निराकरण हो जाएगा। "