Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्यायिक अधिकारियों को मिलेगी राहत: शीर्ष अदालत ने साफ कहा...

Supreme Court News: शीर्ष अदालत के इस फैसले से देशभर के जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों को राहत मिलेगी। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है, गलत या त्रुटिपूर्ण आदेश के आधार पर जिला न्यायपालिका के किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

Update: 2026-01-06 07:12 GMT

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Supreme Court News: दिल्ली। शीर्ष अदालत के इस फैसले से देशभर के जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों को राहत मिलेगी। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है, गलत या त्रुटिपूर्ण आदेश के आधार पर जिला न्यायपालिका के किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक ज्यूडिशियल अफसर की बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की कार्रवाई को लेकर सतर्कता बरतने की हिदायत हाई कोर्ट को दी है।

हाई कोर्ट के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए ज्यूडिशियल अफसर निर्भय सिंह ने अपने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी. पारदीवाला और जस्टिस केवी. विश्वनाथन की डिवीजन बेंच में हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ज्यूडिशियल अफसर की अपील को स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता ज्यूडिशियल अफसर को वर्ष 2014 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहते हुए सेवा से हटा दिया गया था। उन पर आबकारी अधिनियम के तहत जमानत याचिकाओं के निपटारे में 'दोहरा मापदंड' अपनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

शिकायत मिलने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की विभागीय जांच कराई थी। जांच में पुष्टि होने के बाद हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की थी। याचिकाकर्ता न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगा था कि मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत दर्ज मामलों में 50 बल्क लीटर से अधिक शराब की जब्ती हुई, कुछ मामलों में जमानत दी गई, इसी तरह के समान मामलों में बड़ी मात्रा में शराब जब्ती का हवाला देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि ज्यूडिशियल अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय अत्यािधक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि केवल इसलिए कि आदेश गलत या त्रुटिपूर्ण है,किसी अतिरिक्त ठोस सबूत के किसी न्यायिक अधिकारी को विभागीय कार्रवाई की पीड़ा से नहीं गुजरना चाहिए।

बेंच की महत्वपूर्ण टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने साफ कहा, इस तरह की कार्रवाई से जिला न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके चलते जमानत मामलों में ट्रायल कोर्ट के जज विवेकाधिकार का प्रयोग करने से हिचकने लगते हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के भय के कारण कई बार ट्रायल कोर्ट के जज योग्य मामलों में भी जमानत देने से बचते हैं, जिससे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिकाओं की सुनवाई को लेकर दबाव बढ़ने लगता है।

फर्जी शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ज्यूडिशियल अफसरों के खिलाफ झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ न्यायालयीन अवमानना सहित कड़ी कार्रवाई का निर्देश डिवीजन बेंच ने दिया है। बेंच ने यह भी कहा कि यदि ज्यूडिशियल अफसरों के खिलाफ शिकायत करने वाला बार का मेंबर हो तो, बार कौंसिल को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण को भेजा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा है, किसी ज्यूडिशियल अफसर के खिलाफ कदाचरण के आरोप सही पाए जाते हैं तो त्वरित व कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए,ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरतनी चाहिए।

न्यायपालिका के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार असहनीय

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, न्यायपालिका के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार असहनीय है। बेंच ने यह भी कहा कि गलत आदेश के आधार पर विभागीय कार्रवाई करना उचित नहीं है।

हाई कोर्ट के आदेश को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता ज्यूडिशियल अफसर के खिलाफ जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता के रिटायरमेंट आयु तक सेवा में निरंतर बनाए रखने का निर्देश दिया है। बेंच ने याचिकाकर्ता को पूर्ण वेतन, बकाया राशि तथा सभी परिणाम लाभ देने का निर्देश दिया है। बेंच ने सभी मौद्रिक लाभ आठ सप्ताह के भीतर छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने कहा है।

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