Supreme Court News: देश का सबसे बड़ा डिजिटल फ्राड! डिजिटल अरेस्ट स्कैम में गंवाया 22.92 करोड़ रुपये, सुप्रीम कोर्ट में मुआवजा के लिए दायर की याचिक
Supreme Court News: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में 22.92 करोड़ रुपये गंवाने वाले एक सीनियर सिटीजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
Supreme Court News: दिल्ली। देश के सबसे बड़े डिजिटल फ्राड का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में 22.92 करोड़ रुपये गंवाने वाले एक सीनियर सिटीजन ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रिवेंटिव गाइड लाइन के साथ ही मुआवजे की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने 82 साल के नरेश मल्होत्रा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, CBI और सात प्राइवेट बैंकों को नोटिस जारी किया है। यह संभवतः देश में अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत डिजिटल स्कैम है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले में रिट याचिका की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने बताया कि यह घटना तब हुई, जब याचिकाकर्ता के बच्चे विदेश में थे। सीनियर एडवोकेट ने कहा, यह शामिल बैंकों की 'घोर लापरवाही' का मामला है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बेंच को बताया कि यााचिकाकर्ता बैंकों के खिलाफ नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में जाने पर विचार कर रहा है।
सीनियर एडवोकेट ने कहा, इन बैंकों की भी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है। याचिकाकर्ता व्हीलचेयर पर आते हैं, उनकी उम्र लगभग 82 साल है। सीनियर एडवोकेट ने कहा, कहा कि जब इतना बड़ा ट्रांज़ैक्शन होता है तो बैंकों को भी सतर्कता दिखानी चाहिए। धोखेबाजों द्वारा इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट्स की पहचान करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया। याचिकाकर्ता ने कोटक महिंद्रा बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक, यस बैंक को पक्षकार बनाया है।
क्या है मामला
रिट याचिका में बताया कि वह एक सीनियर सिटीजन हैं और अकेले रहते हैं। उन्हें धोखेबाजों ने निशाना बनाया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण किया और व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कॉल के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए जाली आदेश शेयर किए। याचिकाकर्ता का दावा है कि गिरफ्तारी और संपत्ति ज़ब्त करने की लगातार धमकियों के तहत और जाली न्यायिक दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता पर भरोसा करते हुए उसे कई बैंक ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए अपनी पूरी ज़िंदगी की जमा-पूंजी धोखेबाजों को ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
याचिकाकर्ता ने भारत सरकार को डिजिटल-अरेस्ट घोटालों को रोकने और उन पर कार्रवाई करने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने और लागू करने का निर्देश देने के लिए मैंडमस की रिट की मांग की ताकि गृह मंत्रालय (MHA), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और साइबरक्राइम एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
डिजिटल फ्रॉड के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने लिया है स्वत: संज्ञान में
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल, डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की बार-बार होने वाली घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुए CBI को उन मामलों की जांच करने के लिए कहा था।