Supreme Court News: CLAT 2026 पेपर लीक: जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, पहली आवंटन सूची बुधवार 7 जनवरी को होगी जारी
Supreme Court News: 2026 कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट CLAT के प्रश्न पत्र लीक होने का आरोप लगाते हुए जां की मांग को लेकर याचिका दायर की है। दायर याचिका में यह भी बताया गया है कि पहली आवंटन सूची बुधवार 7 जनवरी को जारी हाेने वाली है।
Supreme Court News: दिल्ली। 2026 कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट CLAT के प्रश्न पत्र लीक होने का आरोप लगाते हुए जां की मांग को लेकर याचिका दायर की है। दायर याचिका में यह भी बताया गया है कि पहली आवंटन सूची बुधवार 7 जनवरी को जारी हाेने वाली है।
दायर याचिका में याचिकाकर्ताओं ने CLAT के प्रश्न पत्र और आंसर-की के कथित लीक मामले में कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की है। बता दें, परीक्षा 7 दिसंबर को हुई थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो नए सिरे से परीक्षा का आयोजन किया जाए। अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के CLAT उम्मीदवारों के एक समूह द्वारा दायर की गई याचिका में भेदभाव की आशंका जताई है। यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे वीडियो, इमेज आदि के कारण दायर की गई। शेयर वीडियो इमेज में परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र के लीक होने की आशंका जताई जा रही है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक प्रतियोगी परीक्षा के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना अनिवार्य है। CLAT 2026 के मामले में ऑनलाइन सामग्री के सर्कुलेशन का पैमाना बताता है कि परीक्षा की पवित्रता को अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश कुछ लोगों द्वारा की गई है। याचिका में इस बात की भी जानकारी दी है कि पहली आवंटन सूची 7 जनवरी को प्रकाशित होने वाली है। याचिका के अनुसार यदि पेपर लीक की स्वतंत्र जांच के बगैर ही काउंसलिंग आयोजित की जाती है और सीटें आवंटित की जाती हैं तो योग्य स्टूडेंट्स इससे वंचित हो जाएंगे।
याचिका के अनुसार 6 दिसंबर को परीक्षा से लगभग 15 घंटे पहले तिथि और टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें ऑनलाइन सर्कुलेट होने लगीं, जिनमें उन स्टूडेंट्स के बयान थे, जो अवैध रूप से पेपर प्राप्त करने में सक्षम थे और एक ऐसे व्यक्ति के संदेश थे, जो कुछ भुगतान के बदले पेपर देने की पेशकश कर रहा था। परीक्षा के बाद NLUs के कंसोर्टियम ने परीक्षा से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए एक शिकायत निवारण पोर्टल शुरू किया। हालांकि, कई स्टूडेंट्स ने पोर्टल के माध्यम से कथित लीक के बारे में चिंता जताई, लेकिन कोई जांच रिपोर्ट या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
याचिकाकर्ताओं ने तन्वी सरवाल बनाम CBSE और निधि कैम बनाम मध्य प्रदेश राज्य के फैसलों का अपनी याचिका में हवाला भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अखिल भारतीय प्री-मेडिकल 2015 को रद्द करते हुए दोबारा परीक्षा का निर्देश दिया था।