बड़ी खबर : गंदा पानी पीने से 12 लोगों की मौत, गांव में पसरा मातम
Haryana Water Contamination Tragedy : हरियाणा के पलवल जिले का चांयसा गांव इन दिनों दहशत और मातम के साये में है. पिछले 15 दिनों के भीतर यहां एक के बाद एक 12 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 5 मासूम बच्चे भी शामिल हैं.
बड़ी खबर : गंदा पानी पीने से 12 लोगों की मौत, गांव में पसरा मातम
Haryana Water Contamination Tragedy : पलवल : हरियाणा के पलवल जिले का चांयसा गांव इन दिनों दहशत और मातम के साये में है. पिछले 15 दिनों के भीतर यहां एक के बाद एक 12 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 5 मासूम बच्चे भी शामिल हैं. इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब पलवल से आई इस खबर ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है.
कैसे शुरू हुआ मौत का सिलसिला
गांव वालों के मुताबिक, बीमारी का पहला लक्षण 27 जनवरी को मिला था. लोगों को अचानक तेज बुखार, पेट दर्द, उल्टी और पीलिया जैसी शिकायतें होने लगीं. देखते ही देखते मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा. मरने वालों में 8 साल की बच्ची से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं. हुफैज 11 साल, सारिका 14 साल और दिलशाद 20 साल की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि असली आंकड़ा सरकारी संख्या से कहीं ज्यादा हो सकता है क्योंकि कई लोग अब भी निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर पर हैं.
जांच में क्या आया सामने?
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इन मौतों की मुख्य वजह हेपेटाइटिस और दूषित पानी का संक्रमण है. चीफ मेडिकल ऑफिसर सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि गांव में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की जा रही है.अब तक 1500 लोगों की जांच हुई है, जिनमें से कई लोगों में हेपेटाइटिस-B और C की पुष्टि हुई है.
सबसे चौंकाने वाली बात पानी के सैंपलों की रिपोर्ट में आई है. स्वास्थ्य विभाग ने जब घर-घर जाकर पानी के 107 नमूने लिए, तो उनमें से 23 फेल हो गए. जांच में पाया गया कि पानी के टैंकों में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद थे और पानी में क्लोरीन की मात्रा बिल्कुल शून्य थी. यानी गांव वाले जो पानी पी रहे थे, वह सीधा जहर का काम कर रहा था.
प्रशासन की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति
गांव की आबादी लगभग 10 हजार से ज्यादा है और यहां लोग पीने के पानी के लिए भूमिगत टैंकों और टैंकरों पर निर्भर हैं. क्लोरीनेशन की कमी और साफ-सफाई के अभाव ने इस संक्रमण को महामारी जैसा रूप दे दिया. फिलहाल प्रशासन ने गांव में मेडिकल कैंप लगा दिए हैं और करीब 15000 हैलोजन टैबलेट बांटी गई हैं ताकि पानी को साफ किया जा सके. राहत की बात बस इतनी है कि पशुओं से फैलने वाले संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.
गांव वालों का डर
चांयसा गांव के लोग डरे हुए हैं. उनका कहना है कि अगर समय रहते पानी की पाइपलाइनों और टैंकों की सफाई की गई होती, तो आज ये घर चिराग विहीन न होते. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में टिकी हुई हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
इंदौर का वो भागीरथपुरा मामला
इंदौर के भागीरथपुरा में भी ऐसा ही मामला सामने आया था. वहां 30 दिन में 30 मौतें हुई थीं क्योंकि पीने के पानी की पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही थी. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था और भारी हंगामा हुआ था. उस पुराने कांड ने साफ कर दिया था कि जर्जर पाइपलाइनें और गंदे पानी ने लोगो की जानें ली.
प्रशासन की एक जैसी गलती
हैरानी की बात यह है कि इंदौर का मामला पुराना होने के बावजूद पलवल प्रशासन ने उससे कोई सीख नहीं ली. इंदौर में भी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया था और पलवल के चांयसा में भी वही हुआ. आज पलवल के लोग पूछ रहे हैं कि जब इंदौर में इतनी बड़ी त्रासदी हो चुकी थी, तो यहां के पानी की टंकियों की सफाई और पाइपलाइनों की जांच समय पर क्यों नहीं की गई. क्या प्रशासन सिर्फ लाशें गिनने का इंतजार करता है.
फिलहाल चांयसा में मेडिकल कैंप लगे हैं और 15,000 हैलोजन टैबलेट बांटी जा रही हैं, लेकिन गांव के 1567 परिवारों के मन में एक ही सवाल है क्या अब उनके घरों के नलों में सुरक्षित पानी आएगा.