Delhi High Court: कर्मचारियों की खबर: समान काम और समान वेतन चाहिए तो योग्यता भी होनी चाहिए समान, हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला....
Delhi High Court: सरकारी कर्मचारियों के बीच समान काम समान वेतनमान को लेकर उठने वाले मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि समान काम और समान वेतन के लिए योग्यता भी कमोबेश समान होनी चाहिए।
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13 February 2026|दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों के बीच समान काम समान वेतनमान को लेकर उठने वाले मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि समान काम और समान वेतन के लिए योग्यता भी कमोबेश समान होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, 'समान काम के लिए समान वेतन' का सिद्धांत केवल पद या काम की समानता पर आधारित नहीं हो सकता। कोर्ट ने साफ कहा, यदि दो कैडरों के बीच शैक्षणिक योग्यता में अंतर है तो उनके वेतन में अंतर को जायज ठहराया जा सकता है।
दिल्ली मेडिकल टेक्निकल एम्प्लॉइज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। एसोसिएशन के लैब टेक्नीशियन, जो नगर निगम MCD के अस्पतालों में कार्यरत हैं, केंद्र सरकार के संस्थान AIIMS और NICD के लैब टेक्नीशियनों के समान 5,000-8,000 रुपये के वेतनमान की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि चूंकि उनके पद का नाम और काम समान है इसलिए उन्हें भी पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन मिलना चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल CAT के पुराने फैसले बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। डिवीजन बेंच ने कहा, वेतन में समानता का दावा केवल इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि पदनाम या काम की प्रकृति समान है। डिवीजन बेंच ने कहा, वेतन समानता के लिए भर्ती प्रक्रिया, योग्यता और सेवा शर्तों में पूर्ण समानता होनी अनिवार्य है।
शैक्षणिक योग्यता में भारी अंतर
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई, MCD में लैब टेक्नीशियन के लिए न्यूनतम योग्यता केवल मैट्रिक 10वीं पास है, केंद्र सरकार के तहत इसी पद के लिए बी.एससी. B.Sc.स्नातक की डिग्री अनिवार्य है। कोर्ट ने माना कि शैक्षणिक योग्यता वर्गीकरण का एक वैध और तर्कसंगत आधार है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना एक नीतिगत मामला है। MCD तब तक केंद्र सरकार के वेतनमान को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि वह अपनी सेवा शर्तों में आवश्यक बदलाव न करे। इस टिप्पणी के साथ समान काम, समान वेतनमान की मांग वाली एसोसिएशन की याचिका को डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है।