Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव में धांधली को सुप्रीम कोर्ट ने बताया लोकतंत्र की हत्या,चुनाव अधिकारी पर चलेगा मुकदमा

Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार देते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये साफ है कि पीठासीन अधिकारी ने वोटों को विकृत किया।

Update: 2024-02-05 12:49 GMT

Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार देते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये साफ है कि पीठासीन अधिकारी ने वोटों को विकृत किया। उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र का मजाक है। यह लोकतंत्र की हत्या है। इस आदमी (पीठासीन अधिकारी) पर इसके लिए मुकदमा चलना चाहिए।" कोर्ट ने चंडीगढ़ निगम की आगामी बैठक पर भी रोक लगा दी है।

क्या है पूरा मामला?

30 जनवरी को चंडीगढ़ मेयर के चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसमें 20 वोट होने के बाद भी आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस का गठबंधन हार गया था, वहीं 16 वोट होने के बावजूद भाजपा जीत गई थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि पीठासीन अधिकारी ने AAP-कांग्रेस गठबंधन के 8 वोट अमान्य करार दे दिए थे। गठबंधन ने आरोप लगाया कि पीठासीन अधिकारी ने खुद 8 वोटों पर निशान बनाए और फिर उन्हें अमान्य करार दे दिया।

AAP पार्षद ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर आज CJI डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पार्षद के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पीठासीन अधिकारी भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं और उनकी एक समिति के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा कि वोटों पर हस्ताक्षर करते समय अधिकारी ने वोटों से छेड़छाड़ की, इसके बाद 8 वोटों को अवैध करार दिया और वोट उठाकर निकल गए।

सिंघवी ने कहा कि हाई कोर्ट ने वोटों को भी संरक्षित करने का भी आदेश नहीं दिया और ये लोकतंत्र को पूरी तरह नकारना है। उन्होंने CJI को वो वीडियो भी दिखाया, जिसमें पीठासीन अधिकारी वोटों से छेड़छाड़ करते दिख रहे हैं।

वीडियो देखने के बाद CJI ने पीठासीन अधिकारी पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह स्पष्ट है कि उन्होंने बैलेट पेपर को विकृत किया। उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वह कैमरे की ओर क्यों देख रहे हैं?... हम हैरान हैं। क्या ये एक पीठासीन अधिकारी जैसा व्यवहार है? यहां भी नीचे की तरफ क्रॉस है, वो उसे हाथ नहीं लगाते और यहां ऊपर (क्रॉस) है, वो उसे बदल देते हैं। कृपया उनसे कहिए कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें देख रहा है।"



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