हवा में उड़ी रेत तो गंगा किनारे दिखे सैकड़ों दफन शव, नजारा देख कांप उठेगी रूह…. बढ़ाई गई चौकसी…

Update: 2021-05-17 08:09 GMT

प्रयागराज 17 मई 2021. कोरोना संक्रमण की वजह से हो रही मौतों के बाद बड़ी संख्या में लोग नदियों में ही शव को प्रवाह कर रहे हैं। लोग प्रयागराज में संगम के किनारे रेत में शव को दफना दे रहे हैं। इस मामले को पहले तो प्रशासन ने नकारा लेकिन बड़ी संख्या में रेत के नीचे दफनाए गए शवों का खुलासा हुआ है। सैकड़ों की संख्या में यहां मृतकों के शरीर दफन हैं। यूपी सरकार के निर्देश के बाद प्रयागराज पुलिस ने भी नदियों के किनारे गोताखोरों की टीम लगा दी है। इसके साथ ही लगातार जल पुलिस ने नदियों में अपनी निगरानी बढ़ा दी है।

छतनाग घाट पर गंगा तट के तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी में सौ से ज्यादा लाशें दफनाई गई हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है। आदिकाल से मां गंगा हिन्दुओं के लिए आस्था का प्रतीक रही है। मां गंगा को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाता है लेकिन इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और लोगों की उदासीनता के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है। मां गंगा की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त करने को केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इसके उलट हकीकत देखनी हो तो झूंसी के छतनाग घाट पर चले आइए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे की छतनाग घाट पर धज्जियां उड़ाई जा रही है। लोग मनमाने तरीके से मां गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। माघ, महाकुंभ और कुंभ के दौरान छतनाग घाट तक मेला बसाया जाता है। हालांकि इस दौरान शवों का अंतिम संस्कार यहां बंद करा दिया जाता है। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकड़ियों की भी कई टाल हैं।
इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं। इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। ग्रामीणों ने शवों को दफनाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है।

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