आयुष्मान भारत योजना में विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग, डॉक्टर्स फेडरेशन ने शासन को सौंपा ज्ञापन, ICU सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर

Ayushman Bharat yojna: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग को लेकर राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा गया।

Update: 2026-03-24 15:11 GMT

Ayushman Bharat yojna: रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग को लेकर राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में गंभीर मरीजों के उपचार हेतु आवश्यक विशेषज्ञता को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

CGDF के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा, “क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ ICU में जीवनरक्षक उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं। इन्हें PM-JAY के ढांचे में शामिल करना समय की आवश्यकता है, ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।”

वहीं उपाध्यक्ष डॉ. ए. प्रसांत ने बताया कि “विशेषज्ञों की भागीदारी से मरीजों की रिकवरी दर बेहतर होती है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम होती है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर भार कम पड़ता है।”

जूडो अध्यक्ष डॉ रेशम के अनुसार, वर्तमान PM-JAY योजना में कई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं को शामिल किया गया है, लेकिन क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी गई है। इससे ICU प्रबंधन में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आती हैं, खासकर जटिल एवं आपातकालीन मामलों में।

टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलेगा लाभ

फेडरेशन का मानना है कि यदि इन विशेषज्ञों को योजना में शामिल किया जाता है, तो छोटे शहरों और जिला अस्पतालों में भी उच्च स्तरीय ICU सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मुख्य मांगें:

• ICU एवं क्रिटिकल केयर पैकेज में विशेषज्ञों को शामिल किया जाए

• एम्पैनलमेंट और प्रतिपूर्ति (reimbursement) नीति में संशोधन किया जाए

• अस्पतालों में फुल-टाइम इंटेंसिविस्ट की नियुक्ति को बढ़ावा दिया जाए

फेडरेशन ने शासन से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है, ताकि आयुष्मान भारत योजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और मजबूत किया जा सके।

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