हौसलों को उड़ानः सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दिव्यांग छात्र को मिला अमेरिकन कंपनी मेें 23 लाख का पैकेज, कुलपति चक्रवाल बोले… संकल्प पूरा करने के लिए इच्छा शक्ति, समर्पण और एकाग्रता जरूरी

Update: 2021-10-11 07:45 GMT

0 कुलपति ने जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भगवत गीता की प्रति भेंट की

बिलासपुर, 11 अक्टूबर 2021। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) अकादमिक स्तर को सर्वोच्च स्तर पर स्थापित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रामाणिक शिक्षा, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, को प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं श्री अंकित देब। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के शैक्षणिक सत्र 2017-21 के छात्र अंकित देब दृष्टिबाधित दिव्यांग हैं। विश्वविद्यालय की अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विद्यापीठ के अंतर्गत आने वाले इंजीनियरिंग विभाग के शैक्षणिक सत्र 2017-21 बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्र अंकित देब का चयन अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी गोल्डमैन सैक्स के भारत स्थित बेंगलुरु हेतु हुआ है और उन्हें सालाना पैकेज के तौर पर 23 लाख रुपये मिलेंगे।
जिसका संकल्प दृढ़ हो, हौसला बुंलद हो, तैयारी पूरी हो, रास्ता निश्चित हो तो उस रास्ते में मिलने वाली चुनौतियां पायदान का काम करती हैं, अंकित जैसे युवा सफलता का पर्याय बन जाते हैं। दिव्यांगता को जीवन में बाधा न मानते हुए अंकित ने सफलता, साहस और संकल्प की नई इबारत लिखी है जो सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्त्रोत होगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने अंकित की सफलता बधाई देते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि संकल्प को पूरा करने के लिए इच्छा शक्ति, आदर्श आचरण, समय की पाबंदी, समर्पण एवं एकाग्रता जैसे मूलभूत गुणों को पूरा करना होता है।
कुलपति ने कहा है, अंकित की सफलता संकल्प के साथ सृजनात्मकता और चुनौती को स्वीकार करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने मानव-जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अमृतोपदेश के रूप में जानी जाने वाली भगवत गीता की प्रति अंकित को भेंट की। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. शैलेन्द्र कुमार भी उपस्थित थे।
छात्र अंकित देब ने बताया कि अगस्त 2021 में गोल्डमैन सैक्स बेंगलुरु में ज्वाइन कर लिया है। अपनी टीम के साथी और मित्र अनुराग त्रिपाठी के साथ विगत दिनों आयोजित हैकाथोन में दृष्टिबाधित लोगों के लिए वर्चुअल स्क्राइब नाम से प्रोडक्ट भी बनाया है। अंकित ने कहा कि चार वर्षों में विश्वविद्यालय से उन्हें हर स्तर पर हर वर्ग से सहयोग मिला साथ ही चुनौती को स्वीकार कर लक्ष्य प्राप्ति का प्रोत्साहन भी मिला। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को सहानुभूति से ज्यादा अवसर अपेक्षित होता है।
अंकित की सफलता यह स्थापित करने के लिए उचित है कि सभी को समान अवसर एवं आवश्यकतानुरुप शिक्षण से आकादमिक उन्नयन के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया जा सकता है।
ज्ञातव्य है, पदभार ग्रहण करने के पश्चात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चक्रवाल ने अपनी प्राथमिकताओं में शोध, अनुसंधान, नवाचार एवं आवश्यकतानुरूप शिक्षण के प्रादर्श पर बल दिया है।

 

 

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