Sakat Chauth 2026 : आप भी रखने जा रही हैं सकट चौथ व्रत ! क्या आपको पता है कैसे हुई इस व्रत की उत्पत्ति ? सबसे पहले किसने रखा... तो यहाँ जानिए व्रत की कथा, नियम-चंद्रोदय का वक्त

Sakat Chauth 2026 : अगर आप भी यह व्रत रखने वाली है तो सबसे पहले इस व्रत की पूरी विधि के बारे में जान लें जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

Update: 2026-01-05 17:34 GMT

Sakat Chauth 2026 : vrat katha, niyam,  सनातन धर्म में आज संतान की लम्बी आयु और सुख समृद्धि के लिए रखे जाने वाला सकट चौथ व्रत का दिन है। ये व्रत महिलाओं द्वारा संतान सुख, संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस चौथ को तिलकुटा चौथ, संकष्टी चौथ और माघ कृष्ण चतुर्थी भी कहा जाता है।


अगर आप भी यह व्रत रखने वाली है तो सबसे पहले इस व्रत की पूरी विधि के बारे में जान लें जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। साथ ही यह भी जानते है की इस व्रत की उत्पत्ति कैसे हुई और सबसे पहले इस व्रत को किसने रखा...


चन्द्रोदय समय


आज चन्द्रोदय समय रात 08:54 बजे का है। चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 6 जनवरी 2026 की सुबह 08:01 से होगा और समापन 7 जनवरी 2026 की सुबह 06:52 पर होगा।


सकट चौथ व्रत विधि (Sakat Chauth Vrat Vidhi)




  • सकट चौथ व्रत रखने वाली महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन निर्जला व्रत रहें और अगर बिना पानी के व्रत रह पाना संभव न हो तो फलाहार व्रत रखें। सेहत का पहले ध्यान रखें, क्योंकि श्रद्धा से भक्ति की जाती है. 
  • इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा होती है। पूजा के समय सकट व्रत की कथा भी जरूर सुनी जाती है।
  • इस दिन भगवान को तिल, गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग जरूर लगाना चाहिए।
  • भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्र देव की पूजा होती है।
  • इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।
  • चंद्र देव को अर्घ्य जल में दूध और तिल मिलाकर अर्पित करें।


सकट चौथ व्रत में क्या खाएं? (Sakat Chauth Vrat Mein Kya Khaye)




  • तिल के लड्डू
  • फल
  • साबूदाना
  • सिंघाड़े का आटा
  • दूध और ड्राई फ्रूट्स
  • आलू
  • टमाटर

सकट चौथ की कहानी - Sakat Chauth Vrat Katha 




सकट चौथ की कथा अनुसार एक नगर में साहूकार और साहूकारनी रहते थे। उनका धर्म-कर्म के कार्यों में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। इसके कारण उनकी कोई संतान भी नहीं थी। एक दिन साहूकारनी किसी कारण से पड़ोसी के घर गयी। उसने देखा पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी।

साहूकारनी ने पड़ोसन से पूछा ये तुम क्या कर रही हो? तब पड़ोसन ने कहा कि आस सकट चौथ का व्रत है जिसकी मैं कहानी सुना रही हूं। तब साहूकारनी ने पूछा कि सकट क्या होता है? तब पड़ोसन ने उसे बताया कि इस व्रत को करने से अन्न, धन, सुहाग और पुत्र सब मिलता है। साहूकारनी बोली यदि ऐसा है तो मैं सवा सेर तिलकुट करूंगी और चौथ का व्रत भी करूंगी। अगर मैं गर्भवती हो जाती हूं।

श्री गणेश भगवान की कृपया से साहूकारनी गर्भवती हो गई। इसके बाद उसकी इच्छाएं ओर भी ज्यादा बढ़ गई और वो भगवान से कहने लगी कि अगर मेरे लड़का हो जाये, तो में ढाई सेर तिलकुट करूंगी। कुछ दिन बाद उसे लड़का हो गया। इसके बाद वो बोली हे चौथ भगवान! मेरे बेटे का विवाह हो जाए बस, तो मैं सवा पांच सेर का तिलकुट करूंगी।

कुछ वर्षो बाद भगवान गणेश की कृपा से उसका विवाह भी तय हो गया। लेकिन इतने सब के बावजूद उस साहूकारनी ने तिलकुट नहीं किया जिससे चौथ देव क्रोधित हो गये और उन्होंने उसके बेटे को विवाह मंडप से उठाकर पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। सभी लोग वर को खोजने लगे पर वो नहीं मिला। इधर जिस लड़की से साहूकारनी के लड़के का विवाह होने वाला था, वह अपनी सहेलियों के साथ गणगौर पूजने के लिए जंगल में दूब लेने के लिए निकली।

तभी रास्ते में उस लड़की को पीपल के पेड़ से आवाज आई: ओ मेरी अर्धब्यहि! यह सुनकर जब लड़की घर आयी तो वह धीरे-धीरे सूख कर कांटा होने लगी। एक दिन लड़की की मां ने कहा कि तू सूखती क्यों जा रही है? मैं तो तुझे अच्छा खाना खिलाती हूं, तेरा खास ख्याल रखती हूं लेकिन समझ नहीं आ रहा कि तेरा ये हाल क्यों हो गया है। तब लड़की बोली कि वह जब भी दूब लेने जंगल जाती है, तो पीपल के पेड़ से कोई आदमी बोलता है कि ओ मेरी अर्धब्यहि।

उसने अपनी माता को बताया कि उस लड़के ने मेहंदी लगा राखी है और सेहरा भी बांध रखा है। तब उसकी मां पीपल के पेड़ के पास पहुंची और उसने देखा कि ये यह तो उसका जमाई ही है। मां ने जमाई से कहा: यहां क्यों बैठे हैं? मेरी बेटी तो अर्धब्यहि कर दी। साहूकारनी का बेटा बोला मेरी मां ने चौथ का तिलकुट बोला था लेकिन नहीं किया जिसकी सजा मुझे मिल रही है।

यह सुनकर उस लड़की की मां साहूकारनी के घर गई और उससे पूछा कि तुमने सकट चौथ का कुछ बोला है क्या? तब साहूकारनी ने उसे सारी बात बता दी। साहूकारनी को अपनी गलती समझ आ गई और फिर उसने सच्चे मन से भगवान गणेश से कहा कि मेरा बेटा घर आजाये, तो ढाई मन का तिलकुट करूंगी। ये सुन सकट भगवान प्रसंन हो गए और उसके बेटे मंडप पर लाकर बैठा दिया। इसके बेटे का विवाह धूम-धाम से हो गया। जब साहूकारनी के बेटा-बहू घर आए तब साहूकारनी ने ढाई मन तिलकुट किया और बोली हे चौथ देवता आप के आशीर्वाद से मेरे बेटा-बहू घर आ गए हैं। अत: अब से मैं हमेशा तिलकुट करके व्रत करूंगी।

हे सकट चौथ भगवान जिस तरह से आपने साहूकारनी को बेटे-बहू से मिलवाया, वैसे ही हम सब को मिलवाना और इस कथा को कहने सुनने वालों का भला करना। बोलो सकट चौथ की जय। श्री गणेश देव की जय।

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